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उद्यमी ई-कॉमर्स की राह पर, घरेलू बाजार रह गया आधा
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पानीपत। प्रदेश में गुरुग्राम के बाद सबसे अधिक टैक्स देने वाली टेक्सटाइल नगरी का घरेलू बजार 90 से घटकर 45 हजार करोड़ पर सिमट गया है। पानीपत का स्थानीय घरेलू बाजार बीते दो साल से नुकसान झेल रहा है। कंबल एवं टेक्सटाइल उद्यमियों ने ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार कर लिया और खरीदार भी ई-कॉमर्स कंपनियों से ही माल खरीद रहा है, नतीजा पानीपत में टेक्सटाइल और कंबल की दुकान खोलकर बैठा थोक व्यापारी नुकसान झेल रहा है।
ऐसे में कंबल की मार्केट 15 हजार करोड़ से घटकर 5 हजार करोड़, बेडशीट की मार्केट 8 हजार करोड़ से घटकर तीन हजार करोड़ पर आ गई है। टेक्सटाइल के अन्य सभी उत्पाद ई- कॉमर्स कंपनी से जुड़ चुके हैं, इसलिए ग्राहक दुकानों पर जाने की बजाए ई-कॉमर्स कंपनियों को माल का ऑर्डर ऑनलाइन ही दे रहा है।
अनलॉक के बाद बदल की गई व्यापार की दिशा
कोरोना महामारी में लॉकडाउन लगा और फिर जब अनलॉक हुआ तो व्यापार की दिशा ही बदल गई। ऑनलाइन कारोबार रफ्तार पकड़ने लगा। बीते दो साल में बड़े टेक्सटाइल और कंबल के उद्यमियों ने बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ बैठक कीं। करार कर ई- कॉमर्स कंपनियों को अपने उत्पाद के सैंपल और डिजाइन दिए। दूसरा उद्यमियों को ई-कॉमर्स कंपनियों से स्थानीय कारोबारियों को माल बेचने से अधिक मुनाफा मिला। यह मुनाफा करीब दोगुना हो गया।
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दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान का खरीदार गायब
सर्दी आने वाली है, इसके साथ ही पानीपत में मिंक कंबल की खरीदारी के लिए दिल्ली, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान का खरीदार आने लगता था, लेकिन इस बार हालत उलट हैं। कोरोना के साथ किसान आंदोलन ने भी इन खरीदारों को रोक दिया। ई- कॉमर्स कंपनियां ही उन्हें उत्पाद उनके शहर में उपलब्ध करा रही हैं। यही कारण है कि पानीपत की घरेलू कंबल मार्केट आधी रह गई है।
कंपनियां ई-कॉमर्स से जुड़ रहीं, युवाओं को मिल रहा रोजगार
घरेलू दुकानदारों को ई- कॉमर्स बिजनेस से बहुत अधिक घाटा हुआ है। मार्केट आधी रह गई है। एक्सपोर्ट भी ऑनलाइन बिजनेस की ओर जा रहा है। हालांकि ई- कॉमर्स से युवाओं को रोजगार मिल रहा है। ई- कॉमर्स ग्राहकों को सस्ते दामों पर उत्पाद उपलब्ध करवा रहा है। ऐसे में दुकानें बंद होने की कगार पर आ गई है। - विनोद धमीजा, एक्पोर्टर ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया
बाहर से ग्राहक नहीं आ रहे, बड़े उद्यमी कमा रहे हैं मुनाफा
ई- कॉमर्स से बड़े उद्यमी करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उन्हें विदेशों से मोटे ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन उनके दुकानदार आर्थिक स्थिति से जूझ रहे हैं। किसान आंदोलन के कारण बाहर का ग्राहक पानीपत में नहीं आ रहा है। ये ही वक्त होता है जब दुकानदार अपनी रोजी रोटी के लिए पैसे जोड़ता है, लेकिन दो साल में पानीपत की घरेलू मार्केट आधी से कम हो चुकी है। - अशोक नारंग, प्रधान कंबल बाजार
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ऐसे में कंबल की मार्केट 15 हजार करोड़ से घटकर 5 हजार करोड़, बेडशीट की मार्केट 8 हजार करोड़ से घटकर तीन हजार करोड़ पर आ गई है। टेक्सटाइल के अन्य सभी उत्पाद ई- कॉमर्स कंपनी से जुड़ चुके हैं, इसलिए ग्राहक दुकानों पर जाने की बजाए ई-कॉमर्स कंपनियों को माल का ऑर्डर ऑनलाइन ही दे रहा है।
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अनलॉक के बाद बदल की गई व्यापार की दिशा
कोरोना महामारी में लॉकडाउन लगा और फिर जब अनलॉक हुआ तो व्यापार की दिशा ही बदल गई। ऑनलाइन कारोबार रफ्तार पकड़ने लगा। बीते दो साल में बड़े टेक्सटाइल और कंबल के उद्यमियों ने बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ बैठक कीं। करार कर ई- कॉमर्स कंपनियों को अपने उत्पाद के सैंपल और डिजाइन दिए। दूसरा उद्यमियों को ई-कॉमर्स कंपनियों से स्थानीय कारोबारियों को माल बेचने से अधिक मुनाफा मिला। यह मुनाफा करीब दोगुना हो गया।
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दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान का खरीदार गायब
सर्दी आने वाली है, इसके साथ ही पानीपत में मिंक कंबल की खरीदारी के लिए दिल्ली, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान का खरीदार आने लगता था, लेकिन इस बार हालत उलट हैं। कोरोना के साथ किसान आंदोलन ने भी इन खरीदारों को रोक दिया। ई- कॉमर्स कंपनियां ही उन्हें उत्पाद उनके शहर में उपलब्ध करा रही हैं। यही कारण है कि पानीपत की घरेलू कंबल मार्केट आधी रह गई है।
कंपनियां ई-कॉमर्स से जुड़ रहीं, युवाओं को मिल रहा रोजगार
घरेलू दुकानदारों को ई- कॉमर्स बिजनेस से बहुत अधिक घाटा हुआ है। मार्केट आधी रह गई है। एक्सपोर्ट भी ऑनलाइन बिजनेस की ओर जा रहा है। हालांकि ई- कॉमर्स से युवाओं को रोजगार मिल रहा है। ई- कॉमर्स ग्राहकों को सस्ते दामों पर उत्पाद उपलब्ध करवा रहा है। ऐसे में दुकानें बंद होने की कगार पर आ गई है। - विनोद धमीजा, एक्पोर्टर ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया
बाहर से ग्राहक नहीं आ रहे, बड़े उद्यमी कमा रहे हैं मुनाफा
ई- कॉमर्स से बड़े उद्यमी करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उन्हें विदेशों से मोटे ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन उनके दुकानदार आर्थिक स्थिति से जूझ रहे हैं। किसान आंदोलन के कारण बाहर का ग्राहक पानीपत में नहीं आ रहा है। ये ही वक्त होता है जब दुकानदार अपनी रोजी रोटी के लिए पैसे जोड़ता है, लेकिन दो साल में पानीपत की घरेलू मार्केट आधी से कम हो चुकी है। - अशोक नारंग, प्रधान कंबल बाजार