फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   English attacking the existence of Hindi, mother tongue struggling with modernity

हिंदी के अस्तित्व पर प्रहार कर रही अंग्रेजी, आधुनिकता से जूझ रही मातृभाषा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 01:02 AM IST
विज्ञापन
English attacking the existence of Hindi, mother tongue struggling with modernity
हिंदी भारत की राजभाषा है। हिंदी भाषा का प्राथमिक चलन 1000 ईसवी, यानी आदिकाल से है। जैसे-जैसे काल परिवर्तित होते गए, वैसे-वैसे हिंदी को नया रूप मिलता गया और नए शब्दों का जन्म होता चला गया। हिंदी की चमक आधुनिक युग की भाषा की मांग के सामने फीकी सी पड़ रही है। आज हिंदी भाषा को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए आधुनिक भाषा से जूझना पड़ रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो आधुनिक कही जाने वाली अंग्रेजी, हिंदी के अस्तित्व पर ही प्रहार करती नजर आ रही है। अधिकतर निजी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई पर ही जोर दिया जा रहा है। अभिभावक भी अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में ही पढ़ाने को प्राथमिकता देते हैं।
विज्ञापन

हम भारतीय विशेषकर नौजवान अपनी हिंदी भाषा को बोलने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि पढ़े लिखे लोग जो महानगरों में नौकरी करते हैं, उन्हें हिंदी का कोई भविष्य दिखाई नहीं देता है। उनका मानना है कि किसी भी नौकरी को पाने हेतु अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। विशेष तौर पर युवाओं के बीच तो हिंदी जैसे गुम सी होती जा रही है।
विज्ञापन

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अंग्रेजी भाषा आज भारी हो गई है। पहले प्राथमिक कक्षा में हिंदी की बारहखड़ी सिखायी जाती थी। इससे मात्राओं और शुद्ध उच्चारण का ज्ञान होता था। अब बच्चों में हिंदी भाषा का ज्ञान औपचारिकता तक सिमट गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- जसविंद्र मलिक, अधिवक्ता, पानीपत।
विश्व के ज्यादातर देशों की पहचान उनकी भाषा है। अंग्रेजी को उनके वहां अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ाया जाता। उसी प्रकार से एक देश-एक भाषा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए। हमारे देश में अधिकांश लोग हिंदी भाषी हैं, परंतु अंग्रेजी भाषा के कारण किसी व्यक्ति की शिक्षा में अवरोध आए ऐसा नही होना चाहिए। अंग्रेजी भाषा को ऐच्छिक करना चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी अधिकतर अंग्रेजी माध्यम के परीक्षार्थियों को ज्यादा सफलता मिलती है। उसका कारण है कि अंग्रेजी भाषा पर सभी विद्यालयों में ज्यादा जोर दिया जाता है।
- प्रो. बीबी शर्मा, हिंदी प्रोफेसर, पाईट कॉलेज, समालखा।
नई शिक्षा नीति 2020 में हिंदी भाषा के अस्तित्व पर जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति में पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक अपनी मातृभाषा में पढ़ाई हो सकेगी। पहले भी सरकारी स्कूलों में छठी कक्षा में अंग्रेजी शुरू होती थी। अधिकतर निजी स्कूलों में प्राथमिक स्तर से अंग्रेजी शुरू होने के कारण हिंदी भाषा पर असर पड़ता है। हमारी मातृभाषा हिंदी भाषा है।
- राजेश्वर वर्मा, लेक्चरर, अर्थशास्त्र, केंद्रीय विद्यालय।
इसमें कोई दो राय नहीं कि निजी स्कूलों में अंग्रेजी पर बहुत जोर दिया जाता है। ज्ञान अर्जन करने का माध्यम भाषा होती है, चाहे इंग्लिश हो या हिंदी। स्कूल हिंदी को माध्यम इसलिए नहीं बना पाते, क्योंकि हिंदी वैश्विक स्तर की भाषा नहीं है और एक सीमित क्षेत्र में बोली जाती है। अंग्रेजी पूरे विश्व में बोली और समझी जाती है तो बच्चा कहीं भी, किसी भी देश में अपना भविष्य बना सकता है। नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा को अपनी मातृभाषा में पढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि बच्चा विषयों को अच्छे से समझ सके।

- सुनीता मान, प्रिंसिपल, सर छोटू राम हेरिटेज स्कूल, विकास नगर, पानीपत।
आम तौर पर हम अपनी भाषा में सोचते हैं, लेकिन विशेष रूप से अंग्रेजी माध्यम के शैक्षिक संस्थानों में, स्कूलों में अंग्रेजी में व्यक्त करने के लिए मजबूर किया जाता है। वैश्वीकरण को अपनाना समय की मांग है परंतु वसुधैव कुटुंबकम को भी हमें भूलना नहीं है। हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान बच्चों के विकास की अहम कड़ी है।
- प्रो. हरीसिंह वर्मा, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed