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Panipat News: यातायात नियमों की अनदेखी को रोकने के लिए हो प्रयास
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पानीपत। किसी भी हादसे में रोड इंजीनियरिंग में कमी और यातायात नियमों की अनदेखी बड़ा कारण माने जाते हैं। इनको रोकने के लिए इन दोनों क्षेत्रों में काम करना जरूरी है। रोड इंजीनियरिंग में सड़क के निर्माण और संकेतक जुड़े हुए हैं। जबकि यातायात नियम आमजन से जुड़ा है। संबंधित विभाग सड़क पर नियमों को पूरा कर यातायात नियमों की पालन सुनिश्चित कराएं तो काफी हद तक हादसे रोकने के साथ जान-माल के नुकसान को भी कम किया जा सकता है।
यह तथ्य अमर उजाला के संवाद में निकलकर सामने आया। अमर उजाला के जीटी रोड स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद में यातायात पुलिस के अधिकारियों के साथ रोड सेफ्टी इकाई के प्रतिनिधि और प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। करीब डेढ़ घंटे चले संवाद में लोगों ने अपनी बात खुलकर रखी। यातायात पुलिस शहर प्रभारी नरेश कुमार ने कहा कि धुंध में सड़कों पर दृश्यता घट जाती है। ऐसे में वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। वे वाहन की गति कम रखें और म्यूजिक न चलाएं। वाहनों पर आगे और पीछे रिफ्लेक्टर लगाना चाहिए। यह धुंध में लाइट पड़ने पर चमक उठता है।
उन्होंने कहा कि वाहन चालक को यातायात नियमों को लेकर किसी प्रकार की कमी महसूस होती है तो वे पुलिस कंट्रोल रूम या अन्य आपातकालीन नंबरों पर इसकी सूचना दे सकते हैं। वाहन में तकनीकी खराबी आने की स्थिति में सड़क किनारे रोकना पड़े तो इसके इंडीकेटर जला लें और अन्य सूचक भी लगा दें। किसी प्रकार का हादसा होने पर पुलिस को इसकी सूचना जरूर दें।
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कोट्स
हादसों को रोकने के लिए जागरुकता जरूरी : भूपेंद्र
सीए भूपेंद्र दीक्षित ने बताया कि यातायात नियमों का पालन व्यक्ति को खुद करनी है। प्रत्येक काम सरकार पर नहीं छोड़ना चाहिए। व्यक्ति खुद जागरूक होंगे तो हादसों को रोका जा सकता है। हमें धुंध के मौसम में नियमों को अपनाना चाहिए। इसके साथ रोड इंजीनियरिंग में अपना सहयोग देना चाहिए।
कोट्स
यातायात नियमों की अवहेलना से होते हैं हादसे : प्रशांत नाथ
विजन-30 एकेडमी के निदेशक प्रशांत नाथ ने बताया कि यातायात नियमों की अवहेलना के कारण हादसे होते हैं। हम दिल्ली और चंडीगढ़ जाते हैं तो नियमों का पालन करते हैं। जबकि यहां हम अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं। इन सबकी लापरवाही के चलते हादसे होते हैं। धुंध के दिनों में अल सुबह व देर शाम को सफर करने से बचना चाहिए।
कोट्स-
धुंध के समय वाहन चालक बरतें सावधानी : प्रिंस
युवा प्रिंस नारंग ने बताया कि ऑटो और ई-रिक्शा अधिक हैं। जीटी रोड पर एक यात्री को बैठाने के लिए तीन-तीन ऑटो एक साथ रुक जाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था बिगड़ती है। इसको सही से लागू करना चाहिए। धुंध के समय वाहन चालकों को खुद भी सावधानी बरतनी चाहिए। सामाजिक जिम्मेदारी से हादसों को रोका जा सकता है।
कोट्स
रॉन्ग साइड में चलने वालों पर हो सख्त कार्रवाई : अमित
एडवोकेट अमित राठी ने कहा कि रॉन्ग साइड में चलने से हादसे अधिक होते हैं। पानीपत में गत दिनों एक ट्रक चालक ने रॉन्ग साइड में चलते हुए छह हादसे किए थे। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इसके साथ ऐसे प्वाइंटों को चिह्नित कर पुलिसकर्मी तैनात किए जाने चाहिए। लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है।
कोट्स
ड्राइव करते समय रील बनाने से भी हो रहे हादसे : जुगविंद्र
एडवोकेट जुगविंद्र मलिक ने बताया कि देश में सड़क हादसों और इनमें मरने वालों की संख्या सबसे अधिक है। यह सब यातायात नियमों की अनदेखी और ठीक से पालन न करने पर होते हैं। शहर और आउटर पर सड़क हादसों में अंतर होता है। शहर में हादसे होने पर हल्की चोट लगती है। जबकि बाहरी सड़कों पर मरने वालों की संख्या अधिक होती है। इसका बड़ा कारण ड्रिंक एंड ड्राइव और अधिक स्पीड है। पहले फोन सुनने के लिए मोबाइल प्रयोग करते थे, अब ड्राइव करते समय वीडियो और रील बनाते हैं। यही हादसों का बड़ा कारण है। बेसहारा गोवंश को सड़कों से हटाना चाहिए। ये भी हादसों का बड़ा कारण बनते हैं।
कोट्स
नहीं लगे हैं दिशा सूचक और संकेतक : धमीजा
सीए जगदीश धमीजा ने कहा कि ट्रैफिक लाइट काम नहीं करती। ये सब हादसों का बड़ा कारण हैं। इसके साथ सड़कों पर दिशा सूचक और दूसरे संकेतक नहीं हैं। ब्रेकर मनमर्जी से ऊंचे बना दिए जाते हैं। इन सबके चलते धुंध में हादसे होने का खतरा बढ़ जाता है। संबंधित विभाग को सड़क इंजीनियरिंग पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ यातायात नियमों का अनुपालन होना चाहिए। अवैध पार्किंग रोकने के लिए ऐप बनाया जाना चाहिए।
कोट्स
ब्लैक स्पॉट को खत्म करने की दिशा में काम जरूरी : मेहुल
एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि शहर रॉन्ग साइड चलने पर अक्सर हादसे होते हैं। इनको सख्ती के साथ रोकना जरूरी है। शहर ही नहीं नेशनल हाईवे पर भी लोग रॉन्ग साइड में चलते हैं। ब्लैक स्पॉट को खत्म करने की दिशा में अपेक्षाकृत कम काम किया जा रहा है। हर महीने होने वाली बैठक के विषयों पर तुरंत काम होना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को आगे आना होगा।
कोट्स
ब्लाइंड कटों पर हो रोशनी की व्यवस्था : गौरव
गौरव लिखा ने बताया कि धुंध में यातायात नियमों की पालन गंभीरता से करनी चाहिए। हाईवे पर रॉन्ग साइड से नहीं चलना चाहिए। सरकारी तंत्र के साथ एलएंडटी कंपनी को भी काम करना होगा। ब्लाइंड कटों पर रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ यहां इसका संकेतक भी हो। सामान्य देखने में आया है कि इस तरह के नियमों की पालन नहीं की जाती।
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सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी : संदीप
एडवोकेट संदीप जिंदल ने बताया कि किसी भी हादसे का बड़ा कारण रोड इंजीनियरिंग और नियमों की अनदेखी पाई जाती है। ये दोनों सही हों तो हादसा नहीं हो सकता। धुंध तेज होने से पहले इन सबका समाधान जरूरी है। इसको लेकर सरकारी विभागों के साथ लोगों को स्वयं भी जागरूक होकर आगे आना होगा। सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी है।
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गोशालाओं में पहुंचाएं गोवंश : अनिल
एडवोकेट अनिल शर्मा ने बताया कि शहर समेत जिले में बेसहारा गोवंश की भरमार है। सड़क किनारे खड़े रहते हैं। धुंध के दिनों में इसके चलते हादसा होने का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम व संबंधित विभाग को गोवंश को गोशालाओं में पहुंचाना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता है गोवंश के गले में रिफ्लेक्टर टेप बांधी जा सकती हैं। इससे हादसों में कमी आएगी।
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यह तथ्य अमर उजाला के संवाद में निकलकर सामने आया। अमर उजाला के जीटी रोड स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद में यातायात पुलिस के अधिकारियों के साथ रोड सेफ्टी इकाई के प्रतिनिधि और प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। करीब डेढ़ घंटे चले संवाद में लोगों ने अपनी बात खुलकर रखी। यातायात पुलिस शहर प्रभारी नरेश कुमार ने कहा कि धुंध में सड़कों पर दृश्यता घट जाती है। ऐसे में वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। वे वाहन की गति कम रखें और म्यूजिक न चलाएं। वाहनों पर आगे और पीछे रिफ्लेक्टर लगाना चाहिए। यह धुंध में लाइट पड़ने पर चमक उठता है।
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उन्होंने कहा कि वाहन चालक को यातायात नियमों को लेकर किसी प्रकार की कमी महसूस होती है तो वे पुलिस कंट्रोल रूम या अन्य आपातकालीन नंबरों पर इसकी सूचना दे सकते हैं। वाहन में तकनीकी खराबी आने की स्थिति में सड़क किनारे रोकना पड़े तो इसके इंडीकेटर जला लें और अन्य सूचक भी लगा दें। किसी प्रकार का हादसा होने पर पुलिस को इसकी सूचना जरूर दें।
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हादसों को रोकने के लिए जागरुकता जरूरी : भूपेंद्र
सीए भूपेंद्र दीक्षित ने बताया कि यातायात नियमों का पालन व्यक्ति को खुद करनी है। प्रत्येक काम सरकार पर नहीं छोड़ना चाहिए। व्यक्ति खुद जागरूक होंगे तो हादसों को रोका जा सकता है। हमें धुंध के मौसम में नियमों को अपनाना चाहिए। इसके साथ रोड इंजीनियरिंग में अपना सहयोग देना चाहिए।
कोट्स
यातायात नियमों की अवहेलना से होते हैं हादसे : प्रशांत नाथ
विजन-30 एकेडमी के निदेशक प्रशांत नाथ ने बताया कि यातायात नियमों की अवहेलना के कारण हादसे होते हैं। हम दिल्ली और चंडीगढ़ जाते हैं तो नियमों का पालन करते हैं। जबकि यहां हम अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं। इन सबकी लापरवाही के चलते हादसे होते हैं। धुंध के दिनों में अल सुबह व देर शाम को सफर करने से बचना चाहिए।
कोट्स-
धुंध के समय वाहन चालक बरतें सावधानी : प्रिंस
युवा प्रिंस नारंग ने बताया कि ऑटो और ई-रिक्शा अधिक हैं। जीटी रोड पर एक यात्री को बैठाने के लिए तीन-तीन ऑटो एक साथ रुक जाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था बिगड़ती है। इसको सही से लागू करना चाहिए। धुंध के समय वाहन चालकों को खुद भी सावधानी बरतनी चाहिए। सामाजिक जिम्मेदारी से हादसों को रोका जा सकता है।
कोट्स
रॉन्ग साइड में चलने वालों पर हो सख्त कार्रवाई : अमित
एडवोकेट अमित राठी ने कहा कि रॉन्ग साइड में चलने से हादसे अधिक होते हैं। पानीपत में गत दिनों एक ट्रक चालक ने रॉन्ग साइड में चलते हुए छह हादसे किए थे। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इसके साथ ऐसे प्वाइंटों को चिह्नित कर पुलिसकर्मी तैनात किए जाने चाहिए। लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है।
कोट्स
ड्राइव करते समय रील बनाने से भी हो रहे हादसे : जुगविंद्र
एडवोकेट जुगविंद्र मलिक ने बताया कि देश में सड़क हादसों और इनमें मरने वालों की संख्या सबसे अधिक है। यह सब यातायात नियमों की अनदेखी और ठीक से पालन न करने पर होते हैं। शहर और आउटर पर सड़क हादसों में अंतर होता है। शहर में हादसे होने पर हल्की चोट लगती है। जबकि बाहरी सड़कों पर मरने वालों की संख्या अधिक होती है। इसका बड़ा कारण ड्रिंक एंड ड्राइव और अधिक स्पीड है। पहले फोन सुनने के लिए मोबाइल प्रयोग करते थे, अब ड्राइव करते समय वीडियो और रील बनाते हैं। यही हादसों का बड़ा कारण है। बेसहारा गोवंश को सड़कों से हटाना चाहिए। ये भी हादसों का बड़ा कारण बनते हैं।
कोट्स
नहीं लगे हैं दिशा सूचक और संकेतक : धमीजा
सीए जगदीश धमीजा ने कहा कि ट्रैफिक लाइट काम नहीं करती। ये सब हादसों का बड़ा कारण हैं। इसके साथ सड़कों पर दिशा सूचक और दूसरे संकेतक नहीं हैं। ब्रेकर मनमर्जी से ऊंचे बना दिए जाते हैं। इन सबके चलते धुंध में हादसे होने का खतरा बढ़ जाता है। संबंधित विभाग को सड़क इंजीनियरिंग पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ यातायात नियमों का अनुपालन होना चाहिए। अवैध पार्किंग रोकने के लिए ऐप बनाया जाना चाहिए।
कोट्स
ब्लैक स्पॉट को खत्म करने की दिशा में काम जरूरी : मेहुल
एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि शहर रॉन्ग साइड चलने पर अक्सर हादसे होते हैं। इनको सख्ती के साथ रोकना जरूरी है। शहर ही नहीं नेशनल हाईवे पर भी लोग रॉन्ग साइड में चलते हैं। ब्लैक स्पॉट को खत्म करने की दिशा में अपेक्षाकृत कम काम किया जा रहा है। हर महीने होने वाली बैठक के विषयों पर तुरंत काम होना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को आगे आना होगा।
कोट्स
ब्लाइंड कटों पर हो रोशनी की व्यवस्था : गौरव
गौरव लिखा ने बताया कि धुंध में यातायात नियमों की पालन गंभीरता से करनी चाहिए। हाईवे पर रॉन्ग साइड से नहीं चलना चाहिए। सरकारी तंत्र के साथ एलएंडटी कंपनी को भी काम करना होगा। ब्लाइंड कटों पर रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ यहां इसका संकेतक भी हो। सामान्य देखने में आया है कि इस तरह के नियमों की पालन नहीं की जाती।
कोट्स
सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी : संदीप
एडवोकेट संदीप जिंदल ने बताया कि किसी भी हादसे का बड़ा कारण रोड इंजीनियरिंग और नियमों की अनदेखी पाई जाती है। ये दोनों सही हों तो हादसा नहीं हो सकता। धुंध तेज होने से पहले इन सबका समाधान जरूरी है। इसको लेकर सरकारी विभागों के साथ लोगों को स्वयं भी जागरूक होकर आगे आना होगा। सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी है।
कोट्स
गोशालाओं में पहुंचाएं गोवंश : अनिल
एडवोकेट अनिल शर्मा ने बताया कि शहर समेत जिले में बेसहारा गोवंश की भरमार है। सड़क किनारे खड़े रहते हैं। धुंध के दिनों में इसके चलते हादसा होने का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम व संबंधित विभाग को गोवंश को गोशालाओं में पहुंचाना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता है गोवंश के गले में रिफ्लेक्टर टेप बांधी जा सकती हैं। इससे हादसों में कमी आएगी।