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Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Dyeing entrepreneurs have raised rates by up to 20%; difficulties set to mount further with the imposition of GRAP.

Panipat News: डाइंग उद्यमियों ने 20 प्रतिशत तक बढ़ाए रेट, अब ग्रैप लगने पर और बढ़ेगी मुश्किल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:50 AM IST
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Dyeing entrepreneurs have raised rates by up to 20%; difficulties set to mount further with the imposition of GRAP.
नितिन अरोड़ा।
माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। टेक्सटाइल सिटी पानीपत में उत्पादन लागत बढ़ने के चलते डाइंग उद्यमियों ने जॉब वर्क के रेट में 20 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी है। इसके साथ ही परिवहन और अन्य खर्चों को देखते हुए किराये में भी दो प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। उद्यमियों का कहना है कि कच्चे माल, रंग-रसायन, बिजली और श्रम समेत अन्य खर्च लगातार बढ़ने के कारण पुराने रेट पर काम करना मुश्किल हो गया था।

टेक्सटाइल उद्योग में डाइंग को आधारभूत कड़ी माना जाता है। सेक्टर-25 टू में करीब 600 डाइंग इकाइयां हैं। इसके अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में भी डाइंग यूनिट संचालित हैं। इनमें धागे की रंगाई की जाती है, जिसके बाद इसी धागे से विभिन्न टेक्सटाइल उत्पाद तैयार होते हैं। उद्यमियों के अनुसार, पश्चिमी एशिया में तनाव के बाद रंगों और रसायनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
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इसके अलावा बिजली की दर, श्रम लागत और पर्यावरण मानकों के अनुपालन पर होने वाले खर्च ने भी डाइंग इकाइयों की लागत बढ़ा दी है। यार्न डाइंग, पॉलिएस्टर डाइंग, फैब्रिक डाइंग, बाथमैट डाइंग और कॉन डाइंग समेत विभिन्न श्रेणियों की प्रोसेसिंग लागत बढ़ी है। पर्यावरण शुल्क के अतिरिक्त बोझ से भी उद्यमियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में डाइंग एसोसिएशन ने संशोधित रेट लिस्ट जारी की है।
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सर्दियों में ग्रैप लागू होने पर बढ़ेगी चुनौती

सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू किया जाता है। इसके तहत औद्योगिक इकाइयों में जेनरेटर संचालन, बॉयलर और अन्य गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उद्यमियों का कहना है कि ग्रैप लागू होने के बाद उत्पादन प्रभावित होने के साथ लागत और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर डाइंग इकाइयों के साथ कपड़ा निर्माताओं पर भी पड़ेगा।


वर्जन

उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। रंग-रसायन की नई दरों और पर्यावरण संबंधी अतिरिक्त खर्चों को देखते हुए मौजूदा डाइंग रेट पर काम करना उद्यमियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था। इसी मजबूरी में रेट बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा है।

नितिन अरोड़ा, प्रधान, पानीपत डाइंग एसोसिएशन
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