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Panipat News: जांच की में दो मिले एचआईवी संक्रमित
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पानीपत। विश्व एड्स दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल, रेलवे स्टेशन व थर्मल क्षेत्र स्थित सीमेंट प्लांट में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के एड्स विंग के काउंसलर ने लोगों को एड्स के लक्षण व बचाव के बारे में बताया। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. ललित वर्मा ने सभी कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। इन कार्यक्रम के दौरान 91 लोगों की एचआईवी जांच की गई, इनमें से दो पॉजिटिव मिले। इनको जिला नागरिक अस्पताल में रेफर किया गया है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि जिले में करीब 2626 संक्रमित हैं। इसी साल की बात करें तो अब तक करीब 225 संक्रमित मिल चुके हैं। इनमें 21 गर्भवती हैं। इनका इलाज कर बच्चों को संक्रमण से रोकने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इस साल अब तक 11591 लोगों की एड्स की जांच की। इनमें 225 एड्स संक्रमित मिले। 5654 गर्भवतियों की एड्स की जांच की गई। इनमें 12 गर्भवती एचआईवी संक्रमित मिलीं। आजकल हर किसी में टैटू बनवाने का ट्रेंड है। युवा और महिलाओं में यह कुछ अधिक है। कई बार देखने में आया है कि टैटू बनाते समय उसी सूंई का दूसरे व्यक्ति पर प्रयोग कर दिया जाता है। इस तरह संक्रमित व्यक्ति पर प्रयोग की सूंई दूसरे व्यक्ति को लगना ज्यादा खतरनाक है। एचआईवी संक्रमित होने पर किसी को डरना नहीं चाहिए। इसका इलाज कुछ हद तक संभव हो गया है। गर्भवती महिला संक्रमित मिलती है तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है। इसके लिए नियमित रूप से दवा खाने की जरूरत है।
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डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि जिले में करीब 2626 संक्रमित हैं। इसी साल की बात करें तो अब तक करीब 225 संक्रमित मिल चुके हैं। इनमें 21 गर्भवती हैं। इनका इलाज कर बच्चों को संक्रमण से रोकने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इस साल अब तक 11591 लोगों की एड्स की जांच की। इनमें 225 एड्स संक्रमित मिले। 5654 गर्भवतियों की एड्स की जांच की गई। इनमें 12 गर्भवती एचआईवी संक्रमित मिलीं। आजकल हर किसी में टैटू बनवाने का ट्रेंड है। युवा और महिलाओं में यह कुछ अधिक है। कई बार देखने में आया है कि टैटू बनाते समय उसी सूंई का दूसरे व्यक्ति पर प्रयोग कर दिया जाता है। इस तरह संक्रमित व्यक्ति पर प्रयोग की सूंई दूसरे व्यक्ति को लगना ज्यादा खतरनाक है। एचआईवी संक्रमित होने पर किसी को डरना नहीं चाहिए। इसका इलाज कुछ हद तक संभव हो गया है। गर्भवती महिला संक्रमित मिलती है तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है। इसके लिए नियमित रूप से दवा खाने की जरूरत है।
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