फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Drying the goods in the dryer increases the cost

ड्रायर में माल सुखाने से बढ़ा खर्च

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 01:21 AM IST
विज्ञापन
Drying the goods in the dryer increases the cost
पानीपत। जनवरी में छह दिन हुई बारिश व 12 दिन से बादल छाए रहने के कारण ब्रेक कांबर व डाइंग के बाद माल सूख नहीं पा रहा। इसका सीधा असर कॉटन यार्न व डाइंग के कारोबार पर पड़ रहा है। डायर्स को माल ड्रायर में सूखाना पड़ रहा है। इससे उद्यमियों का खर्च 10 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ जाता है। दूसरी ओर यदि धूप में माल सुखाया जाता है तो खर्च एक रुपये प्रति किलोग्राम आता है।
विज्ञापन

पानीपत में धागा व डाइंग की 1500 से अधिक यूनिट है। हर रोज 10 लाख किलोग्राम धागे पर रंगाई होती है, लेकिन माल न सूखने के कारण रंगाई का काम भी काफी धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में उद्यमियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कॉटन यार्न उद्योग में आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के कारण भाव में एक रुपया किलोग्राम की तेजी चल रही है।
विज्ञापन

दूसरी ओर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वीरवार व शुक्रवार को उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। इन दो दिन उद्योगों को बंद रखना पड़ता है। रविवार को काम कम होता है इसलिए उस दिन भी उद्योगों में न के बराबर काम होता है। ऐसे में उद्योगों में नियमित रूप से चार दिन ही उद्योग चल पा रहे हैं। कोरोना के प्रभाव व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पाबंदियों से उद्यमियों में हताशा है। लाइट जाने के बाद उद्योगों में जनरेटर सेट नहीं चला पा रहे। शहर में नाइट कर्फ्यू भी है। इन सभी पाबंदियों का प्रभाव उद्योगों पर पड़ रहा है। उद्यमी समय पर ऑर्डर तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जनवरी का एक्यूआई औसतन 120, फिर भी प्रतिबंध जारी
जिले का एक्यूआई जनवरी में करनाल, अंबाला, कुरुक्षेत्र व हिसार जैसे जिलों से बेहतर रहा है। जनवरी में छह दिन एक्यूआई ग्रीन जोन में रहा, आठ बार येलो जोन में रहा। जबकि 10 दिन ऑरेंज जोन में रहा है। बावजूद इसके सीपीसीबी की पाबंदियां जारी है। उद्यमियों की मांग है कि पानीपत को एनसीआर से बाहर किया जाए।
क्या है कांबर
रिंग फ्रेम फाइन काउंट बनाने वाली मिलों से निकलने वाले वेस्ट को ‘कांबर’ बोला जाता है। पानीपत में कतरन रग्ज से रुई बनाकर भी धागा बनाया जाता है। बारिश के कारण नमी अधिक होने से भी कच्चा माल सूखने में समय अधिक लगता है।

मौसम की मार के कारण 10 गुना अधिक लागत आ रही है
जनवरी में मौसम साफ नहीं रहा है। जो माल उनके पास डाइंग के लिए आया है उसे ड्रायर में सुखाना पड़ रहा है। इससे 10 गुना ज्यादा लागत आई है। अधिक डीजल लगता है। उधर सीपीसीबी ने उद्योगों को पांच दिन ही चलने की अनुमति दी है। उद्यमी अपना काम नहीं कर पा रहे हैं। -भीम राणा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed