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Panipat News: ड्रोन दीदी की समस्या दूर, ड्रोन की बैटरी की क्षमता दोगुनी हुई
Sun, 15 Mar 2026 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 15 Mar 2026 01:34 AM IST
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सुमन। स्रोत : स्वयं
- फोटो : जनता ढाबा पर कोयले की भट्टी पर भोजन बनाता कारीगर।
पानीपत। ड्रोन दीदी सुमन रावल दो साल ड्रोन की बैटरी की समस्या से परेशान थी। अब 15 दिन पहले ही नई बैटरी मिलने के बाद राहत मिली है।
सुमन ने बताया कि वह स्वयं सहायता समूह से 2017 में जुड़ी थी। उससे पहले वह केवल घर तक सीमित रहती थी। उसके पति कंपनी में काम कर आजीविका चला रहे थे। समूह से जुड़ने के बाद अपने पति की आर्थिक मदद करनी शुरू की और आत्मनिर्भर बनाने की शुरूआत की। वह गांव में 10 से 12 महिलाओं का एक समूह बनाकर देती है और अब तक 25 समूह बना चुकी हैं। उन्हें एक समूह पर मिशन की तरफ से 500 रुपये की सहायता दी जाती है। समूह बनाने के साथ वह घर पर ही सीएससी केंद्र चला रही है इसमें उसका बेटा भी उसकी मदद करता है।
करीब दो साल तक बैटरी की समस्या से रही परेशान
सुमन ने बताया कि उन्हें 2024 में प्रशिक्षण के बाद ड्रोन मिला लेकिन ड्रोन की बैटरी क्षमता कम होने से उन्हें काफी परेशानी हुई। बैटरी केवल 25 मिनट तक ही चल पाती थी। एक एकड़ में करीब छह मिनट का समय लगता है। बैटरी को बार-बार चार्ज करना पड़ता था। इससे बिजली बिल ज्यादा आने लगा था, इससे परेशान होकर उन्होंने सिर्फ अपने खेतों तक ही छिड़काव को सीमित रखा। अब मिशन की तरफ से 15 दिन पहले ही नई बैटरी मिली है। नई बैटरी मिलने पर धान की फसल में होने वाले छिड़काव के लिए उन्होंने गांव वालों का पंजीकरण करना शुरू कर दिया है। इस बार वह अपने खेतों के साथ गांव के अन्य खेतों में भी ड्रोन के माध्यम से छिड़काव करेगी।
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सुमन ने बताया कि वह स्वयं सहायता समूह से 2017 में जुड़ी थी। उससे पहले वह केवल घर तक सीमित रहती थी। उसके पति कंपनी में काम कर आजीविका चला रहे थे। समूह से जुड़ने के बाद अपने पति की आर्थिक मदद करनी शुरू की और आत्मनिर्भर बनाने की शुरूआत की। वह गांव में 10 से 12 महिलाओं का एक समूह बनाकर देती है और अब तक 25 समूह बना चुकी हैं। उन्हें एक समूह पर मिशन की तरफ से 500 रुपये की सहायता दी जाती है। समूह बनाने के साथ वह घर पर ही सीएससी केंद्र चला रही है इसमें उसका बेटा भी उसकी मदद करता है।
करीब दो साल तक बैटरी की समस्या से रही परेशान
सुमन ने बताया कि उन्हें 2024 में प्रशिक्षण के बाद ड्रोन मिला लेकिन ड्रोन की बैटरी क्षमता कम होने से उन्हें काफी परेशानी हुई। बैटरी केवल 25 मिनट तक ही चल पाती थी। एक एकड़ में करीब छह मिनट का समय लगता है। बैटरी को बार-बार चार्ज करना पड़ता था। इससे बिजली बिल ज्यादा आने लगा था, इससे परेशान होकर उन्होंने सिर्फ अपने खेतों तक ही छिड़काव को सीमित रखा। अब मिशन की तरफ से 15 दिन पहले ही नई बैटरी मिली है। नई बैटरी मिलने पर धान की फसल में होने वाले छिड़काव के लिए उन्होंने गांव वालों का पंजीकरण करना शुरू कर दिया है। इस बार वह अपने खेतों के साथ गांव के अन्य खेतों में भी ड्रोन के माध्यम से छिड़काव करेगी।
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सुमन। स्रोत : स्वयं- फोटो : जनता ढाबा पर कोयले की भट्टी पर भोजन बनाता कारीगर।
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