{"_id":"6acd531023a3e8b19304508d","slug":"dr-swati-is-showing-women-the-path-to-self-reliance-panipat-news-c-244-1-pnp1011-165860-2026-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: महिलाओं को डॉ. स्वाति दिखा रहीं आत्मनिर्भरता की राह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: महिलाओं को डॉ. स्वाति दिखा रहीं आत्मनिर्भरता की राह
विज्ञापन
डॉ. स्वाति गोयल। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। दिल्ली से शादी के बाद पानीपत आईं डॉ. स्वाति गोयल ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाई। आईसीआईसीआई बैंक में मैनेजर रह चुकीं स्वाति ने नौकरी नहीं मिलने पर ट्यूशन और ट्रेडिंग से शुरुआत की। इसके बाद ससुर का हैंडलूम कारोबार संभाला और अब व्यवसाय के साथ महिलाओं को आत्मविश्वास बढ़ाने, तनाव से निपटने और अपनी क्षमताएं पहचानने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
विराट नगर निवासी डॉ. स्वाति ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से कंप्यूटर साइंस ऑनर्स में स्नातक और एमबीए किया है। शादी के बाद पानीपत में अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने दूसरे विकल्प तलाशे। पारिवारिक कारोबार की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्टाफ और डीलर शुरुआत में उन्हें गंभीरता से नहीं लेते थे। हालांकि, मेहनत से कारोबार की बारीकियां सीखकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
इस सफर में ससुर और मां का सहयोग भी मिला। उन्हें व्यवसाय प्रबंधन के क्षेत्र में मानद डॉक्टरेट की उपाधि और बिजनेसवुमन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
विज्ञापन
ऑनलाइन कक्षाओं से महिलाओं को कर रहीं जागरूक
कारोबार के दौरान डॉ. स्वाति ने महसूस किया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों, तनाव और आत्मविश्वास की कमी के कारण कई महिलाएं अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ देती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने जनवरी में महिलाओं के व्यक्तिगत विकास के लिए कक्षाएं शुरू कीं। शुरुआत में छह महीने तक निशुल्क प्रशिक्षण देने के बाद उन्होंने इसे सशुल्क कर दिया।
उन्होंने जेनोवेट कोचिंग हब के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कीं। इसमें खासकर 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को भावनात्मक मजबूती, तनाव प्रबंधन और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने इस पहल को एमएसएमई के तहत भी पंजीकृत कराया है।
एक लाख महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य
डॉ. स्वाति का लक्ष्य एक साल में एक लाख महिलाओं को भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना है। उनका मानना है कि महिलाओं की प्रगति के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ मानसिक और भावनात्मक मजबूती भी जरूरी है। महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर नई शुरुआत करनी चाहिए। एक सशक्त महिला अपने परिवार और समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
विज्ञापन
पानीपत। दिल्ली से शादी के बाद पानीपत आईं डॉ. स्वाति गोयल ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाई। आईसीआईसीआई बैंक में मैनेजर रह चुकीं स्वाति ने नौकरी नहीं मिलने पर ट्यूशन और ट्रेडिंग से शुरुआत की। इसके बाद ससुर का हैंडलूम कारोबार संभाला और अब व्यवसाय के साथ महिलाओं को आत्मविश्वास बढ़ाने, तनाव से निपटने और अपनी क्षमताएं पहचानने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
विराट नगर निवासी डॉ. स्वाति ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से कंप्यूटर साइंस ऑनर्स में स्नातक और एमबीए किया है। शादी के बाद पानीपत में अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने दूसरे विकल्प तलाशे। पारिवारिक कारोबार की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्टाफ और डीलर शुरुआत में उन्हें गंभीरता से नहीं लेते थे। हालांकि, मेहनत से कारोबार की बारीकियां सीखकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
विज्ञापन
इस सफर में ससुर और मां का सहयोग भी मिला। उन्हें व्यवसाय प्रबंधन के क्षेत्र में मानद डॉक्टरेट की उपाधि और बिजनेसवुमन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
विज्ञापन
ऑनलाइन कक्षाओं से महिलाओं को कर रहीं जागरूक
कारोबार के दौरान डॉ. स्वाति ने महसूस किया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों, तनाव और आत्मविश्वास की कमी के कारण कई महिलाएं अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ देती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने जनवरी में महिलाओं के व्यक्तिगत विकास के लिए कक्षाएं शुरू कीं। शुरुआत में छह महीने तक निशुल्क प्रशिक्षण देने के बाद उन्होंने इसे सशुल्क कर दिया।
उन्होंने जेनोवेट कोचिंग हब के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कीं। इसमें खासकर 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को भावनात्मक मजबूती, तनाव प्रबंधन और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने इस पहल को एमएसएमई के तहत भी पंजीकृत कराया है।
एक लाख महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य
डॉ. स्वाति का लक्ष्य एक साल में एक लाख महिलाओं को भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना है। उनका मानना है कि महिलाओं की प्रगति के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ मानसिक और भावनात्मक मजबूती भी जरूरी है। महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर नई शुरुआत करनी चाहिए। एक सशक्त महिला अपने परिवार और समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है।