{"_id":"6ad75dcdcc4a2727f4094ecf","slug":"dr-rajesh-muni-who-has-undertaken-a-abhigraha-a-solemn-self-imposed-vow-arrived-at-the-sambhavnath-jain-temple-the-event-showcased-a-unique-confluence-of-jain-identity-that-transcended-the-boundaries-of-various-sects-panipat-news-c-244-1-pnp1001-166326-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: संभावनाथ जैन मंदिर में पहुंचे अभिग्रह धारी डॉ. राजेश मुनि, संप्रदायों की सीमाओं से परे दिखा जैनत्व का अनूठा संगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: संभावनाथ जैन मंदिर में पहुंचे अभिग्रह धारी डॉ. राजेश मुनि, संप्रदायों की सीमाओं से परे दिखा जैनत्व का अनूठा संगम
विज्ञापन
महा अभिग्रह धारी डॉ. राजेश मुनि महाराज ठाणे-4 से आशीर्वाद लेते समाज के लोग। स्रोत : सभा
-आत्मानंद जैन सभा के निमंत्रण पर सेक्टर 11 पहुंचे मुनि
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। सेक्टर-11 स्थित श्री संभावनाथ जैन मंदिर में मंगलवार को महा अभिग्रह धारी डॉ. राजेश मुनि महाराज ठाणे-4 एक घंटे के लिए पहुंचे। इस दौरान मुनि ने मंदिर में विराजकर लगभग आधा घंटा गहन ध्यान किया। सभा के स्वाध्याय कक्ष में अनवरत नवकार महामंत्र का जाप गूंजता रहा।
मुनि के आगमन पर आत्मानंद जैन सभा के महामंत्री अरुण जैन ने उनका आभार व्यक्त किया। उनकी धर्मपत्नी निधि जैन व अन्य सहयोगियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। गांधी मंडी समाज के महामंत्री डॉ. ईश्वर जैन ने इस ऐतिहासिक अवसर को जैन धर्म की विभिन्न धाराओं का अत्यंत मधुर मिलन बताया। मंत्री राजेंद्र जैन ने भी अपने विचार रखे और अंजलि जैन ने मधुर भजन प्रस्तुत किया।
मुनि डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज ठाणे-4 ने कहा कि मुझे पहले 10 तारीख को आना था, चलो आज दसवीं तिथि को आ गया हूं। उनके इस कथन पर पूरा पंडाल प्रफुल्लित हो उठा। इसके बाद मुनि के निर्देश पर महासाध्वी समता महाराज व साध्वी भविका महाराज ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का संचालन किया। राजेंद्र मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को मंगल पाठ श्रवण कराया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आराधना पद्धति की थोड़ी-थोड़ी भिन्नता के कारण जैन धर्म की चार मुख्य धाराएं हैं। इनमें दिगंबर, श्वेतांबर मूर्ति पूजक, श्वेतांबर स्थानकवासी और तेरापंथी हैं। बावजूद इसके सबकी मूल आत्मीय चेतना एक ही है। श्वेतांबर स्थानकवासी संत होने के बाद डॉ. राजेश मुनि का श्वेतांबर मंदिर में पहुंचना और इस प्रकार का समागम यह सिद्ध करता है।
गांधी मंडी से निकला भव्य विहार
श्रद्धालुओं के साथ संत-सतियों ने गांधी मंडी से विहार प्रारंभ किया। यात्रा के दौरान जौंधन वाले ईश्वर जैन और राजाखेड़ी वाले सुभाष चंद्र जैन के निवास पर अल्प विश्राम व पड़ाव रखा गया। इसके पश्चात सभी ने सुबह साढ़े सात बजे स्वाध्याय भवन में प्रवेश किया। त्मानंद जैन सभा के महामंत्री अरुण जैन, मंत्री सुमित सुराणा ने मुनि की अत्यंत भाव-भक्ति पूर्ण अगवानी की।
5
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। सेक्टर-11 स्थित श्री संभावनाथ जैन मंदिर में मंगलवार को महा अभिग्रह धारी डॉ. राजेश मुनि महाराज ठाणे-4 एक घंटे के लिए पहुंचे। इस दौरान मुनि ने मंदिर में विराजकर लगभग आधा घंटा गहन ध्यान किया। सभा के स्वाध्याय कक्ष में अनवरत नवकार महामंत्र का जाप गूंजता रहा।
मुनि के आगमन पर आत्मानंद जैन सभा के महामंत्री अरुण जैन ने उनका आभार व्यक्त किया। उनकी धर्मपत्नी निधि जैन व अन्य सहयोगियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। गांधी मंडी समाज के महामंत्री डॉ. ईश्वर जैन ने इस ऐतिहासिक अवसर को जैन धर्म की विभिन्न धाराओं का अत्यंत मधुर मिलन बताया। मंत्री राजेंद्र जैन ने भी अपने विचार रखे और अंजलि जैन ने मधुर भजन प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
मुनि डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज ठाणे-4 ने कहा कि मुझे पहले 10 तारीख को आना था, चलो आज दसवीं तिथि को आ गया हूं। उनके इस कथन पर पूरा पंडाल प्रफुल्लित हो उठा। इसके बाद मुनि के निर्देश पर महासाध्वी समता महाराज व साध्वी भविका महाराज ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का संचालन किया। राजेंद्र मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को मंगल पाठ श्रवण कराया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आराधना पद्धति की थोड़ी-थोड़ी भिन्नता के कारण जैन धर्म की चार मुख्य धाराएं हैं। इनमें दिगंबर, श्वेतांबर मूर्ति पूजक, श्वेतांबर स्थानकवासी और तेरापंथी हैं। बावजूद इसके सबकी मूल आत्मीय चेतना एक ही है। श्वेतांबर स्थानकवासी संत होने के बाद डॉ. राजेश मुनि का श्वेतांबर मंदिर में पहुंचना और इस प्रकार का समागम यह सिद्ध करता है।
गांधी मंडी से निकला भव्य विहार
श्रद्धालुओं के साथ संत-सतियों ने गांधी मंडी से विहार प्रारंभ किया। यात्रा के दौरान जौंधन वाले ईश्वर जैन और राजाखेड़ी वाले सुभाष चंद्र जैन के निवास पर अल्प विश्राम व पड़ाव रखा गया। इसके पश्चात सभी ने सुबह साढ़े सात बजे स्वाध्याय भवन में प्रवेश किया। त्मानंद जैन सभा के महामंत्री अरुण जैन, मंत्री सुमित सुराणा ने मुनि की अत्यंत भाव-भक्ति पूर्ण अगवानी की।
5