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जिले में 50 फीसदी आत्महत्याओं की वजह बनती है घरेलू हिंसा
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पानीपत। घरेलू हिंसा के मामले में काउंसलिंग करती महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी ?
- फोटो : Panipat
आशू गौतम
पानीपत। जिले में कुल आत्महत्याओं के 50 फीसदी मामलों की वजह घरेलू हिंसा है। जिनसे तंग आकर लोग जान दे देते हैं। 10 फीसदी मामलों में आत्महत्या की वजह संपत्ति विवाद, 25 फीसदी आत्महत्याओं की वजह प्रेम प्रसंग और 5 फीसदी मामलों की वजह आर्थिक तंगी है। वहीं कुछ ऐसे मामले भी हैं, जिनके जहन में परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या करने का ख्याल आया, लेकिन उन्होंने हिम्मत रखी और परेशानी पर जीत पाई। शुक्रवार को आत्महत्या रोकथाम दिवस है और यह दिन यही सिखाता है कि किसी भी समस्या का हल आत्महत्या नहीं है, बल्कि हालातों से लड़कर जीतना है। संवाद
केस-1
21 वर्षीय युवती ने बताया कि उसके परिवार ने 14 साल की आयु में उसकी शादी कर दी थी। 18 वर्ष की आयु हाते ही परिवार ने उस पर ससुराल जाने का दबाव बनाया। वह पढ़ना चाहती थी, लेकिन दबाव के कारण वह ससुराल चली गई। मारपीट के कारण वह मायके लौट आई। परिजनों ने दोबारा दबाव बनाया तो उसने आत्महत्या करने के बारे में सोचा और ऑलआउट पी लिया। परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जिससे वह बच गई। युवती ने बताया कि उसकी काउंसलिंग की गई और आज मानना है कि आत्महत्या करने का कदम उठाना, उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
केस-2
हरि नगर निवासी एक युवक ने बताया कि वह एक युवती से प्रेम करता था, लेकिन युवती किसी और से प्रेम करने लगी। जिसका पता चला तो उसने युवती को समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवती ने उसे झूठे केस में फंसवाने की धमकी दी। वह परेशान हो चुका था। तब उसने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन मां ने बचा लिया। परिजनों ने उसे समझाया, अब उनका मानना है कि आत्महत्या करना किसी भी समस्या का हल नहीं है। वह अब एक कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है और शादीशुदा जीवन में खुश है।
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केस-3
देशराज कॉलोनी निवासी एक महिला ने बताया कि वह शादीशुदा है। उसके तीन बच्चे हैं, ब्रेन ट्यूमर की वजह से वह परेशान हो चुकी थी। शरीर में असहनीय दर्द होने लगा था, जिसके बाद उन्होंने तेजाब पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने एक अस्पताल में भर्ती कराया और उसे बचा लिया। परिजनों ने ब्रेन ट्यूमर का एक अच्छे अस्पताल में इलाज कराया और अब वह ठीक है। उनकी दवाइयां चल रहीं हैं। आत्महत्या की बजाए अगर इलाज पर ध्यान देेती तो शायद वह कदम न उठातीं।
पुलिस आंकड़ों में महज 12 आत्महत्याएं, क्योंकि परिजनों ने उठाए सवाल
पुलिस आंकड़ों के अनुसार धारा 306 (किसी के दबाव में आकर आत्महत्या करना) के 12 मामले दर्ज हुए हैं। जबकि अमूमन जिले में हर दूसरे दिन एक आत्महत्या होती है, लेकिन पुलिस इनमें 174 की कार्रवाई करती है। रिकॉर्ड सिर्फ उन्हीं आत्महत्याओं के केसों का रह जाता है, जिसमें परिजन सवाल उठा देते हैं। वहीं रेलवे ट्रेक पर नौ माह में 86 मौतें हुई हैं, इनमें 70 पुरुष, 13 महिलाएं, तीन किशोर हैं। इनमें से 70 फीसदी मामले में आत्महत्या के थे।
लॉकडाउन के दौरान हुई सबसे ज्यादातर आत्महत्याएं
कोरोना महामारी के दौरान आत्महत्याओं में तेजी आई। सेक्टर-18 निवासी डॉक्टर ने कोरोना संक्रमित होने पर आत्महत्या कर ली थी। वहीं रोजगार न होने से युवाओं ने अपनी जान ले ली।
एक दिन में घरेलू हिंसा के आधा दर्जन से अधिक मामले आते हैं। इनमें अधिकतर मामलों में लड़का या लड़की पक्ष की तरफ से आत्महत्या करने की धमकी दी जाती है, लेकिन काउंसलिंग के बाद दोनों पक्षों की समस्या का समाधान किया जाता है। आत्महत्या करना समस्या का कोई उपाय नहीं है, हर समस्या का डट कर सामना करना चाहिए।
-रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी।
परिवार में प्रत्येक सदस्यों को एक दूसरे से बातचीत करते रहना चाहिए। अगर लगता है कि कोई सदस्य मानसिक तनाव से गुजर रहा है या फिर वह परिवार में एक से दो बार आत्महत्या के बारे में बोल चुका है तो उसे हल्के में न ले। किसी मनोरोग विशेषज्ञ से इलाज कराएं। वहीं अगर कोई आत्महत्या करने का प्रयास कर चुका है तो डॉक्टर को दिखाएं। समस्या का समाधान करें।
- डॉ. मोना नागपाल, मनोरोग विशेषज्ञ
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
हर समय उदास रहना
काम में मन नहीं लगना
मन में नकारात्मक विचार आना
कभी-कभी रोने का मन करना
यह कदम उठाएं
भाई, दोस्त, पिता, मां, रिश्तेदार, जिससे भी बात करें, परेशानी बताएं
घरेलू हिंसा के मामलों में मतभेदों को दूर करें, काउंसलर के पस जाएं
कोई दबाव बनाता है तो पुलिस की मदद लें
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पानीपत। जिले में कुल आत्महत्याओं के 50 फीसदी मामलों की वजह घरेलू हिंसा है। जिनसे तंग आकर लोग जान दे देते हैं। 10 फीसदी मामलों में आत्महत्या की वजह संपत्ति विवाद, 25 फीसदी आत्महत्याओं की वजह प्रेम प्रसंग और 5 फीसदी मामलों की वजह आर्थिक तंगी है। वहीं कुछ ऐसे मामले भी हैं, जिनके जहन में परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या करने का ख्याल आया, लेकिन उन्होंने हिम्मत रखी और परेशानी पर जीत पाई। शुक्रवार को आत्महत्या रोकथाम दिवस है और यह दिन यही सिखाता है कि किसी भी समस्या का हल आत्महत्या नहीं है, बल्कि हालातों से लड़कर जीतना है। संवाद
केस-1
21 वर्षीय युवती ने बताया कि उसके परिवार ने 14 साल की आयु में उसकी शादी कर दी थी। 18 वर्ष की आयु हाते ही परिवार ने उस पर ससुराल जाने का दबाव बनाया। वह पढ़ना चाहती थी, लेकिन दबाव के कारण वह ससुराल चली गई। मारपीट के कारण वह मायके लौट आई। परिजनों ने दोबारा दबाव बनाया तो उसने आत्महत्या करने के बारे में सोचा और ऑलआउट पी लिया। परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जिससे वह बच गई। युवती ने बताया कि उसकी काउंसलिंग की गई और आज मानना है कि आत्महत्या करने का कदम उठाना, उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
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केस-2
हरि नगर निवासी एक युवक ने बताया कि वह एक युवती से प्रेम करता था, लेकिन युवती किसी और से प्रेम करने लगी। जिसका पता चला तो उसने युवती को समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवती ने उसे झूठे केस में फंसवाने की धमकी दी। वह परेशान हो चुका था। तब उसने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन मां ने बचा लिया। परिजनों ने उसे समझाया, अब उनका मानना है कि आत्महत्या करना किसी भी समस्या का हल नहीं है। वह अब एक कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है और शादीशुदा जीवन में खुश है।
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देशराज कॉलोनी निवासी एक महिला ने बताया कि वह शादीशुदा है। उसके तीन बच्चे हैं, ब्रेन ट्यूमर की वजह से वह परेशान हो चुकी थी। शरीर में असहनीय दर्द होने लगा था, जिसके बाद उन्होंने तेजाब पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने एक अस्पताल में भर्ती कराया और उसे बचा लिया। परिजनों ने ब्रेन ट्यूमर का एक अच्छे अस्पताल में इलाज कराया और अब वह ठीक है। उनकी दवाइयां चल रहीं हैं। आत्महत्या की बजाए अगर इलाज पर ध्यान देेती तो शायद वह कदम न उठातीं।
पुलिस आंकड़ों में महज 12 आत्महत्याएं, क्योंकि परिजनों ने उठाए सवाल
पुलिस आंकड़ों के अनुसार धारा 306 (किसी के दबाव में आकर आत्महत्या करना) के 12 मामले दर्ज हुए हैं। जबकि अमूमन जिले में हर दूसरे दिन एक आत्महत्या होती है, लेकिन पुलिस इनमें 174 की कार्रवाई करती है। रिकॉर्ड सिर्फ उन्हीं आत्महत्याओं के केसों का रह जाता है, जिसमें परिजन सवाल उठा देते हैं। वहीं रेलवे ट्रेक पर नौ माह में 86 मौतें हुई हैं, इनमें 70 पुरुष, 13 महिलाएं, तीन किशोर हैं। इनमें से 70 फीसदी मामले में आत्महत्या के थे।
लॉकडाउन के दौरान हुई सबसे ज्यादातर आत्महत्याएं
कोरोना महामारी के दौरान आत्महत्याओं में तेजी आई। सेक्टर-18 निवासी डॉक्टर ने कोरोना संक्रमित होने पर आत्महत्या कर ली थी। वहीं रोजगार न होने से युवाओं ने अपनी जान ले ली।
एक दिन में घरेलू हिंसा के आधा दर्जन से अधिक मामले आते हैं। इनमें अधिकतर मामलों में लड़का या लड़की पक्ष की तरफ से आत्महत्या करने की धमकी दी जाती है, लेकिन काउंसलिंग के बाद दोनों पक्षों की समस्या का समाधान किया जाता है। आत्महत्या करना समस्या का कोई उपाय नहीं है, हर समस्या का डट कर सामना करना चाहिए।
-रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी।
परिवार में प्रत्येक सदस्यों को एक दूसरे से बातचीत करते रहना चाहिए। अगर लगता है कि कोई सदस्य मानसिक तनाव से गुजर रहा है या फिर वह परिवार में एक से दो बार आत्महत्या के बारे में बोल चुका है तो उसे हल्के में न ले। किसी मनोरोग विशेषज्ञ से इलाज कराएं। वहीं अगर कोई आत्महत्या करने का प्रयास कर चुका है तो डॉक्टर को दिखाएं। समस्या का समाधान करें।
- डॉ. मोना नागपाल, मनोरोग विशेषज्ञ
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
हर समय उदास रहना
काम में मन नहीं लगना
मन में नकारात्मक विचार आना
कभी-कभी रोने का मन करना
यह कदम उठाएं
भाई, दोस्त, पिता, मां, रिश्तेदार, जिससे भी बात करें, परेशानी बताएं
घरेलू हिंसा के मामलों में मतभेदों को दूर करें, काउंसलर के पस जाएं
कोई दबाव बनाता है तो पुलिस की मदद लें