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डॉक्टर हड़ताल पर, पांच घंटे मरीज परेशान
अमर उजाला, पानीपत
Updated Thu, 19 Sep 2013 11:27 PM IST
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पानीपत में शहर के करीब 250 अस्पतालों के डॉक्टर दोपहर तक हड़ताल पर रहे। इस कारण मरीजों को इलाज के लिए पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा। ये डॉक्टर आईएमए के बैनर तले शहर सहित जिले के डॉक्टर अस्पताल छोड़कर सड़कों पर उतरे थे।
उन्होंने पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के छापे में पकड़ी गई डॉ. मनीषा को निर्दोष और उनके यहां बरामद उपकरणों और दवाओं को लाइफ सेविंग बताया। डॉक्टरों ने मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की। जांच डॉक्टरों के अस्पताल छोड़ने पर मरीज इलाज के लिए परेशान रहे।
मरीजों की तकलीफ अस्पताल में पहुंचने के बाद भी कम नहीं हुई। मरीजों को दोपहर बाद ही इलाज मिल सका। डाक्टर पहले सीएमओ, फिर डीसी और डीएसपी से मिले।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले जिले के लगभग 250 अस्पतालों के डॉक्टर वीरवार को स्काई लार्क पर एकजुट हुए और बैठक की। इसकी अध्यक्षता प्रधान डा. पुरुषोत्तम शर्मा ने की। बैठक में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में पकड़ी डॉ. मनीषा के मामले पर विचार-विमर्श किया। सभी डाक्टरों ने डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया और उसके पास से बरामद उपकरण और दवाओं को लाइफ सेविंग बताया।
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डॉक्टरों का कहना है कि ये सब उपकरण अस्पताल में होने चाहिए। इनके बिना अस्पताल नहीं चलाया जा सकता और न ही किसी मरीज की जान बचाई जा सकती है। इस मौके पर डॉ. रमेश छाबड़ा, डॉ. पंकज मुटनेजा, डॉ. वंदना पाहुजा, डॉ. एसएन गुप्ता, डॉ. वीके गुप्ता, डॉ. कटारिया, डॉ. देवेंद्र बतरा, डॉ. अंजलि बंसल, डॉ. मंजू दहिया, डॉ. बीबीएस बुट्टर, डॉ. हवासिंह, डॉ. ऋतु मलिक, डॉ. वेद गुप्ता, डॉ. अल्का मौजूद रहे।
सीएमओ और डीसी ने दिखाया रास्ता
आईएमए के बैनर तले जिलेभर के सैकड़ों डॉक्टर सिविल सर्जन डॉ. इंद्रजीत धनखड़ से मिले। उन्होंने डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया। सीएमओ ने इस मामले में खुद को असहाय बताया। उन्होंने कहा कि वे भी एक डॉक्टर हैं और एक डॉक्टर का दर्द समझते हैं। लेकिन इस मामले में वे मदद नहीं कर सकते। सीएमओ से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर डॉक्टर लघु सचिवालय पहुंचे और डीसी समीर पाल सरो के सामने डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया।
डॉ. पुरुषोत्तम और अन्य डॉक्टरों ने कहा कि गत दिनों विभाग की जांच में डॉ. मनीषा के अस्पताल से मिले उपकरण और दवा अस्पताल की जरूरत होते हैं। इनके बिना किसी भी मरीज को नहीं बचाया जा सकता। डीसी ने यह मामला कानूनी होने पर एसपी के पास भेज दिया। यहां से डॉक्टर एसपी से मिलने पहुंचे। उनके यहां पर एसपी के न मिलने पर डॉक्टरों ने डीएसपी जितेंद्र गहलावत के सामने पक्ष रखा। उन्होंने डीएसपी के सामने पूरे मामले को रखा और इसकी दोबारा जांच करने की मांग की। डीएसपी ने उनको निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
सभी डॉक्टरों को डाल दो जेल में
डॉ. रमेश छाबड़ा ने कहा कि डॉ. मनीषा के पास स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उपकरण और दवा बरामद की हैं। आईएमए की टीम ने इस पूरे मामले और रिकार्ड को जांचा है। ये सब लाइफ सेविंग दवाओं में आती हैं और हर अस्पताल में इनका होना बेहद जरूरी है। इन उपकरणों और दवाओं के बिना मरीज या बच्चे को नहीं बचाया जा सकता। डॉ. मनीषा पर एमटीपी एक्ट लगता है तो सारे डाक्टर दोषी हैं। उन सबको जेल में बंद कर दो।
डरे रहते हैं डॉक्टर
प्रधान डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि लोग अस्पतालों में इलाज कराने आते हैं। डॉक्टर मरीज को बचाने का हर संभव प्रयास करते हैं। कई बार गंभीर होने पर मरीज को नहीं बचा पाते। ऐसे में परिजन अस्पतालों में तोड़ फोड़ करते हैं। शहर ही नहीं पूरे जिले के डॉक्टर ऐसी वारदातों से डरे हैं। वे गंभीर मामलों में कोई रिस्क नहीं लेते।
डॉक्टर मनीषा के लिए मांगी राहत
आईएमए की पूर्व प्रधान डॉ. ऋतु मलिक ने कहा कि डॉ. मनीषा साफ छवि की हैं। वे समाजसेवा में भी आगे रहतीं हैं। वे गर्भपात के विरोध में हैं। इस कारण उसने एमटीपी की परमिशन भी नहीं ली। विभाग की टीम को घंटों चली जांच में कोई गर्भपात कराने पहुंचने वालों का एक भी केस नहीं मिला। प्रशासन और विभाग को उसके परिवार को देखते हुए मामले में राहत देनी चाहिए।
ऐसे बीता डाक्टरों का आधा दिन
9:30 बजे स्काई लार्क पर एकजुट हुए।
10:05 बजे सीएमओ से मिलने पहुंचे।
10:27 बजे सीएमओ से मिलकर लौटे।
10:35 बजे दोबारा स्काईलार्क पहुंचे।
11:10 बजे लघु सचिवालय पहुंचे।
11:26 बजे डीसी के सामने पक्ष रखा
11:35 बजे डॉक्टर डीएसपी से मिले।
11:45 बजे डॉक्टर वापस आ गए।
ये है मामला
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गत दिनों सूचना के आधार पर परशुराम कॉलोनी स्थित एएनएम मीना के क्लीनिक, तहसील कैंप स्थित मनीषा मैटरनिटी और अस्पताल और समालखा की चांद कॉलोनी स्थित मलिक अस्पताल पर छापा मारा। एएनएम मीना स्वास्थ्य विभाग के कुटानी सब स्टेशन पर तैनात है। इस दौरान तीनों जगह से गर्भपात कराने के उपकरण और दवा बरामद की। पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर पूर्व चिकित्सा अधिकारी और मनीषा अस्पताल की संचालिका डॉ. मनीषा, स्वास्थ्य विभाग की एएनएम मीना और समालखा में मलिक अस्पताल की डॉ. वंदना मलिक के खिलाफ एमटीपी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने डॉ. मनीषा और एएनएम मीना को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया और जबकि डॉ. वंदना मलिक अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
मरीज इंतजार कर थके, नहीं मिला इलाज
शहर समेत जिले के करीब 250 अस्पताल और क्लीनिक वीरवार को डॉ. मनीषा के समर्थन में दोपहर तक बंद रहे। इसके चलते मरीजों को दोपहर तक इलाज नहीं मिल सका। इन अस्पतालों में पहुंचे हजारों मरीज परेशान रहे। वे कभी अस्पताल तो कभी बाहर सड़क पर पहुंचते रहे। डॉक्टरों के सहायक भी मरीजों को मरहम नहीं लगा सके। कुछ मरीज बिना दवा के ही लौट गए तो कुछ मरीज दोपहर बाद डाक्टर के आने पर दवा लेकर अपने घर लौटे।
आईएमए के बैनर तले डाक्टर उनसे मिले हैं। उन्होंने बीते दिनों पकड़ी गई डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया है। उन्होंने मामले की दोबारा जांच करने की मांग की है। डॉक्टरों को पुलिस की तरफ से निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
जितेंद्र गहलावत, डीएसपी पानीपत
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उन्होंने पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के छापे में पकड़ी गई डॉ. मनीषा को निर्दोष और उनके यहां बरामद उपकरणों और दवाओं को लाइफ सेविंग बताया। डॉक्टरों ने मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की। जांच डॉक्टरों के अस्पताल छोड़ने पर मरीज इलाज के लिए परेशान रहे।
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मरीजों की तकलीफ अस्पताल में पहुंचने के बाद भी कम नहीं हुई। मरीजों को दोपहर बाद ही इलाज मिल सका। डाक्टर पहले सीएमओ, फिर डीसी और डीएसपी से मिले।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले जिले के लगभग 250 अस्पतालों के डॉक्टर वीरवार को स्काई लार्क पर एकजुट हुए और बैठक की। इसकी अध्यक्षता प्रधान डा. पुरुषोत्तम शर्मा ने की। बैठक में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में पकड़ी डॉ. मनीषा के मामले पर विचार-विमर्श किया। सभी डाक्टरों ने डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया और उसके पास से बरामद उपकरण और दवाओं को लाइफ सेविंग बताया।
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डॉक्टरों का कहना है कि ये सब उपकरण अस्पताल में होने चाहिए। इनके बिना अस्पताल नहीं चलाया जा सकता और न ही किसी मरीज की जान बचाई जा सकती है। इस मौके पर डॉ. रमेश छाबड़ा, डॉ. पंकज मुटनेजा, डॉ. वंदना पाहुजा, डॉ. एसएन गुप्ता, डॉ. वीके गुप्ता, डॉ. कटारिया, डॉ. देवेंद्र बतरा, डॉ. अंजलि बंसल, डॉ. मंजू दहिया, डॉ. बीबीएस बुट्टर, डॉ. हवासिंह, डॉ. ऋतु मलिक, डॉ. वेद गुप्ता, डॉ. अल्का मौजूद रहे।
सीएमओ और डीसी ने दिखाया रास्ता
आईएमए के बैनर तले जिलेभर के सैकड़ों डॉक्टर सिविल सर्जन डॉ. इंद्रजीत धनखड़ से मिले। उन्होंने डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया। सीएमओ ने इस मामले में खुद को असहाय बताया। उन्होंने कहा कि वे भी एक डॉक्टर हैं और एक डॉक्टर का दर्द समझते हैं। लेकिन इस मामले में वे मदद नहीं कर सकते। सीएमओ से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर डॉक्टर लघु सचिवालय पहुंचे और डीसी समीर पाल सरो के सामने डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया।
डॉ. पुरुषोत्तम और अन्य डॉक्टरों ने कहा कि गत दिनों विभाग की जांच में डॉ. मनीषा के अस्पताल से मिले उपकरण और दवा अस्पताल की जरूरत होते हैं। इनके बिना किसी भी मरीज को नहीं बचाया जा सकता। डीसी ने यह मामला कानूनी होने पर एसपी के पास भेज दिया। यहां से डॉक्टर एसपी से मिलने पहुंचे। उनके यहां पर एसपी के न मिलने पर डॉक्टरों ने डीएसपी जितेंद्र गहलावत के सामने पक्ष रखा। उन्होंने डीएसपी के सामने पूरे मामले को रखा और इसकी दोबारा जांच करने की मांग की। डीएसपी ने उनको निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
सभी डॉक्टरों को डाल दो जेल में
डॉ. रमेश छाबड़ा ने कहा कि डॉ. मनीषा के पास स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उपकरण और दवा बरामद की हैं। आईएमए की टीम ने इस पूरे मामले और रिकार्ड को जांचा है। ये सब लाइफ सेविंग दवाओं में आती हैं और हर अस्पताल में इनका होना बेहद जरूरी है। इन उपकरणों और दवाओं के बिना मरीज या बच्चे को नहीं बचाया जा सकता। डॉ. मनीषा पर एमटीपी एक्ट लगता है तो सारे डाक्टर दोषी हैं। उन सबको जेल में बंद कर दो।
डरे रहते हैं डॉक्टर
प्रधान डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि लोग अस्पतालों में इलाज कराने आते हैं। डॉक्टर मरीज को बचाने का हर संभव प्रयास करते हैं। कई बार गंभीर होने पर मरीज को नहीं बचा पाते। ऐसे में परिजन अस्पतालों में तोड़ फोड़ करते हैं। शहर ही नहीं पूरे जिले के डॉक्टर ऐसी वारदातों से डरे हैं। वे गंभीर मामलों में कोई रिस्क नहीं लेते।
डॉक्टर मनीषा के लिए मांगी राहत
आईएमए की पूर्व प्रधान डॉ. ऋतु मलिक ने कहा कि डॉ. मनीषा साफ छवि की हैं। वे समाजसेवा में भी आगे रहतीं हैं। वे गर्भपात के विरोध में हैं। इस कारण उसने एमटीपी की परमिशन भी नहीं ली। विभाग की टीम को घंटों चली जांच में कोई गर्भपात कराने पहुंचने वालों का एक भी केस नहीं मिला। प्रशासन और विभाग को उसके परिवार को देखते हुए मामले में राहत देनी चाहिए।
ऐसे बीता डाक्टरों का आधा दिन
9:30 बजे स्काई लार्क पर एकजुट हुए।
10:05 बजे सीएमओ से मिलने पहुंचे।
10:27 बजे सीएमओ से मिलकर लौटे।
10:35 बजे दोबारा स्काईलार्क पहुंचे।
11:10 बजे लघु सचिवालय पहुंचे।
11:26 बजे डीसी के सामने पक्ष रखा
11:35 बजे डॉक्टर डीएसपी से मिले।
11:45 बजे डॉक्टर वापस आ गए।
ये है मामला
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गत दिनों सूचना के आधार पर परशुराम कॉलोनी स्थित एएनएम मीना के क्लीनिक, तहसील कैंप स्थित मनीषा मैटरनिटी और अस्पताल और समालखा की चांद कॉलोनी स्थित मलिक अस्पताल पर छापा मारा। एएनएम मीना स्वास्थ्य विभाग के कुटानी सब स्टेशन पर तैनात है। इस दौरान तीनों जगह से गर्भपात कराने के उपकरण और दवा बरामद की। पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर पूर्व चिकित्सा अधिकारी और मनीषा अस्पताल की संचालिका डॉ. मनीषा, स्वास्थ्य विभाग की एएनएम मीना और समालखा में मलिक अस्पताल की डॉ. वंदना मलिक के खिलाफ एमटीपी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने डॉ. मनीषा और एएनएम मीना को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया और जबकि डॉ. वंदना मलिक अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
मरीज इंतजार कर थके, नहीं मिला इलाज
शहर समेत जिले के करीब 250 अस्पताल और क्लीनिक वीरवार को डॉ. मनीषा के समर्थन में दोपहर तक बंद रहे। इसके चलते मरीजों को दोपहर तक इलाज नहीं मिल सका। इन अस्पतालों में पहुंचे हजारों मरीज परेशान रहे। वे कभी अस्पताल तो कभी बाहर सड़क पर पहुंचते रहे। डॉक्टरों के सहायक भी मरीजों को मरहम नहीं लगा सके। कुछ मरीज बिना दवा के ही लौट गए तो कुछ मरीज दोपहर बाद डाक्टर के आने पर दवा लेकर अपने घर लौटे।
आईएमए के बैनर तले डाक्टर उनसे मिले हैं। उन्होंने बीते दिनों पकड़ी गई डॉ. मनीषा को निर्दोष बताया है। उन्होंने मामले की दोबारा जांच करने की मांग की है। डॉक्टरों को पुलिस की तरफ से निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
जितेंद्र गहलावत, डीएसपी पानीपत