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Panipat News: जिला योजनाकार ने भी माना गलत तरीके से बेची गई है जमीन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 06:54 AM IST
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District planner also admitted that the land has been sold wrongly.
पानीपत। टीडीआई सेक्टर 23 में हुए करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन के गोलमाल की रिपोर्ट जिला योजनाकार ने सीनियर योजनाकार को भेज दी है। सीनियर टाउन प्लानर ने इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। अधिकारियों का मानना है कि अब टीडीआई का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है। इसके अलावा और भी कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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जिला योजनाकार का भी मानना है कि टीडीआई ने गलत तरीके से जमीन को बेचा है। जिस पर कार्रवाई होना निश्चित है। अब मुख्यालय के आदेशानुसार ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अब तक डीटीपी की ओर से अंसल में चार जगहों पर एक ही कंपनी के नाम नोटिस तक भेजे जा चुके हैं। जिला योजनाकार का कहना है कि टीडीआई के प्रकरण में वे केवल अपने विभाग की ही जानकारी दे सकते हैं। इसकी प्रॉपर्टी आईडी नगर निगम ने कैसे बनाई या तहसील ने इसकी रजिस्टरी कैसे की, इस बारे में संबंधित विभाग अधिकारी ही बता सकते हैं।
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दूसरी ओर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने जिला योजनाकार से टीडीआई को लेआउट प्लान व अन्य जानकारी मांगी है। ताकि सरकारी जमीन पर बनी प्रॉपर्टी आईडी का रिकॉर्ड तलब किया जा सके। जबकि जिला योजनाकार का कहना है कि अभी तक कार्यालय में नगर निगम की ओर कोई पत्राचार प्राप्त नहीं हुआ है। अगर नगर निगम की ओर से रिकॉर्ड मांगा जाता तो निगम को रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दिया जाता।
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हैरानी की बात ये है कि अब तक नगर निगम की प्रॉपर्टी आईडी के आधार पर तहसील में भी टीडीआई की यूडीलैंड, पार्क, ग्रीनबेल्ट सड़कों की जमीन की कई रजिस्टरी भी हो चुकी हैं लेकिन अब तक तहसीलदार की ओर से उनको रद्द नहीं किया गया है। इसके अलावा शिकायत के बाद पुलिस ने भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
ऐसे किया सरकारी जमीन का फर्जीवाड़ा-
शिकायकर्ता जोगिंद्र स्वामी का आरोप है कि टीडीआई सेक्टर 23 में अनिर्धारित यानी यूडीलैंड बेची गई है। ये प्लॉट टीडीआई के लेआउट प्लान में ही नहीं थे। इस यूडीलैंड अनिर्धारित भूमि के बिना लेआउट प्लान के ही जबरन और जालसाजी से प्लाॅट बना दिए गए। जबकि ये अनिर्धारित भूमि केवल हरियाली के लिए ही आरक्षित है। इसमें साथ लगने वाले प्लाट के आसपास बची जमीन को प्लॉट बनाया गया। इसकी लोकेशन यानी सही स्थिति की जानकारी और प्लॉट का नाम तक दे दिया गया। इसके लिए आसपास के प्लॉट का नंबर लिख उसके आगे अंग्रेजी भाषा का ए शब्द जोड़ दिया गया। जो एक नया नाम और पता बन गया। इस जमीन के प्लॉट के टुकड़ों की टीडीआई ने रजिस्टरी करवा दी। इनमें स्टॉम्प ड्यूटी की भी बड़े स्तर पर चोरी की गई है।


जिला योजनाकार ने सभी पंजीकरण दस्तावेजों के सबूत जुटा इनकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। जिस पर मुख्यालय को सूचित कर टीडीआई का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा भी की जा रही है। इसके अलावा घपले में संलिप्त लोगों पर भी एफआईआर दर्ज करवाने की अनुशंसा की गई है। विशेष बात ये है कि इस मामले में संलिप्त दो नायब तहसीलदारों का अब तबादला हो चुका है जबकि डीआओ मौजूदा कार्यभार संभाल रहे हैं।
वर्जन:
टीडीआई प्रकरण की रिपोट एसटीपी को भेजी गई है। वहां से मुख्यालय को रिपोर्ट जाएगी। इस पर मुख्यालय कार्रवाई कर सकता है। लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।
पंकज बेनीवाल, डीटीपी।
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