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Panipat News: चिकित्सक न मिलने से प्रमाणपत्र के लिए चक्कर काट रहे दिव्यांग
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सतेंद्र। संवाद
- फोटो : संवाद
पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल में बुधवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए विशेष शिविर लगाया गया। इसके लिए 26 लोगों ने पंजीकरण कराया। इनमें से मात्र 15 के प्रमाणपत्र बन पाए। दिव्यांगों को चिकित्सक न मिलने से बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अस्पताल के बोर्ड में पूरे चिकित्सक न बैठने से दिव्यांगों की परेशानी बढ़ रही है। बुधवार को मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल न होने से मरीजों को ज्यादा परेशानी हुई।
बुधवार को अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए बैठने वाले बोर्ड में पूरे चिकित्सक न होने से दिव्यांगों को दोहरी परीक्षा देकर प्रमाणपत्र बनवाने पड़ रहे हैं। इस बुधवार 26 दिव्यांगों ने पंजीकरण करवाया। हड्डी रोग विशेषज्ञ के 12, ईएनटी के दो और आंख का एक ही प्रमाणपत्र बना। वहीं मनोरोग विशेषज्ञ के दिव्यांगों को पिछले दो महीने से अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ ओपीडी ब्लॉक एक में धरातल पर और ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञ ब्लॉक-एक में पहली मंजिल पर बैठ रहे हैं और बाकी का बोर्ड रेडियोलॉजिस्ट कक्ष के सामने बैठता है इसलिए दिव्यागों को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए यहां-वहां अस्पताल के भटकना पड़ रहा है।
फोटाे
बराना निवासी सतेंद्र ने बताया कि उसकी रीढ़ में समस्या है। वह अच्छे से खड़े नहीं पाता है और न ही चल पाता है। वह करीब डेढ़ महीने से अस्पताल के चक्कर काट रहा है लेकिन हर बार चिकित्सक नहीं मिलते हैं और उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ता है। इस बुधवार वे सुबह करीब दस बजे अस्पताल पहुंच गए थे और 12 बजे तक भी उनका नंबर नहीं आया था। विशेषज्ञ ने उसे एक्स-रे करवाने के लिए भेज दिया और जब तक वह आया तब तक चिकित्सक चल गए। अब उसे अगले बुधवार फिर से अस्पताल आना पड़ेगा।
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हड़ताली निवासी सोनू कुमार ने बताया कि पैर की हड्डी में परेशानी है। वह एक पैर से चल नहीं पाता है। वह इस बार लगातार चौथे बुधवार को अस्पताल आया है। तीन बुधवार चिकित्सक न मिलने से कारण उसे घंटों इंतजार करने बाद बिना प्रमाण-पत्र के ही लौटना पड़ रहा है। इस बुधवार वह सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंचा और 12 बजे तक लाइन में लगा रहा। लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ ने अगले बुधवार आने के लिए कहा।
अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ छुट्टी पर चल रही हैं। बाकी सभी चिकित्सकों ने अपने-अपने मरीजों के दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए हैं। अगले सप्ताह बोर्ड में मनोरोग विशेषज्ञ भी शामिल होंगी। दिव्यांगों को कोई परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
- डॉ. बिजेंद्र हुड्डा, डिप्टी सीएमओ।
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बुधवार को अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए बैठने वाले बोर्ड में पूरे चिकित्सक न होने से दिव्यांगों को दोहरी परीक्षा देकर प्रमाणपत्र बनवाने पड़ रहे हैं। इस बुधवार 26 दिव्यांगों ने पंजीकरण करवाया। हड्डी रोग विशेषज्ञ के 12, ईएनटी के दो और आंख का एक ही प्रमाणपत्र बना। वहीं मनोरोग विशेषज्ञ के दिव्यांगों को पिछले दो महीने से अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ ओपीडी ब्लॉक एक में धरातल पर और ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञ ब्लॉक-एक में पहली मंजिल पर बैठ रहे हैं और बाकी का बोर्ड रेडियोलॉजिस्ट कक्ष के सामने बैठता है इसलिए दिव्यागों को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए यहां-वहां अस्पताल के भटकना पड़ रहा है।
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फोटाे
बराना निवासी सतेंद्र ने बताया कि उसकी रीढ़ में समस्या है। वह अच्छे से खड़े नहीं पाता है और न ही चल पाता है। वह करीब डेढ़ महीने से अस्पताल के चक्कर काट रहा है लेकिन हर बार चिकित्सक नहीं मिलते हैं और उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ता है। इस बुधवार वे सुबह करीब दस बजे अस्पताल पहुंच गए थे और 12 बजे तक भी उनका नंबर नहीं आया था। विशेषज्ञ ने उसे एक्स-रे करवाने के लिए भेज दिया और जब तक वह आया तब तक चिकित्सक चल गए। अब उसे अगले बुधवार फिर से अस्पताल आना पड़ेगा।
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हड़ताली निवासी सोनू कुमार ने बताया कि पैर की हड्डी में परेशानी है। वह एक पैर से चल नहीं पाता है। वह इस बार लगातार चौथे बुधवार को अस्पताल आया है। तीन बुधवार चिकित्सक न मिलने से कारण उसे घंटों इंतजार करने बाद बिना प्रमाण-पत्र के ही लौटना पड़ रहा है। इस बुधवार वह सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंचा और 12 बजे तक लाइन में लगा रहा। लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ ने अगले बुधवार आने के लिए कहा।
अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ छुट्टी पर चल रही हैं। बाकी सभी चिकित्सकों ने अपने-अपने मरीजों के दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए हैं। अगले सप्ताह बोर्ड में मनोरोग विशेषज्ञ भी शामिल होंगी। दिव्यांगों को कोई परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
- डॉ. बिजेंद्र हुड्डा, डिप्टी सीएमओ।

सतेंद्र। संवाद- फोटो : संवाद

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