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Panipat News: देवशयनी एकादशी आज, शुरू होंगे चातुर्मास, नहीं होंगे मांगलिक कार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू हो जाते हैं। इस बार 29 जून को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होगी। इस बार सावन अधिक मास होने से चातुर्मास चार के बजाय पांच माह का होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. राधे-राधे ने बताया कि भगवान विष्णु 29 जून एकादशी को कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तक क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाएंगे। इन पांच महीनों में मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। 23 नवंबर देवउठनी एकादशी से विवाह समारोह और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। शास्त्रों में बताया गया है कि हर शुभ कार्य के लिए भगवान विष्णु का आह्वान किया जाता है। साथ ही इन महीनों में सूर्य, चंद्रमा व प्रकृति का तेज कम हो जाता है। चातुर्मास में व्रत, साधना, जप-तप, ध्यान, पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व रहता है। साधु-संत तीर्थ यात्रा करने के बजाय अधिकतर समय मौन रहते हैं। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
इस बार 19 साल बाद सावन मास 59 दिन का होगा। सह संयोग 2004 में बना था। सावन भगवान शिव को प्रिय है और अधिकमास व पुरुषोत्तम मास के चलते भक्त भगवान विष्णु व शिव दोनों की पूजा कर सकेंगे। साथ ही भक्तों को मंगल गौरी के नौ व्रत भी करने को मिलेंगे। हर तीन साल में एक अधिक मास आता है। इस बार सावन माह का अधिक पुरुषोत्तम मास का संयोग बन रहा है। अधिक मास होने के कारण सावन का महीना 59 दिनों तक रहेगा।
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करनाल। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू हो जाते हैं। इस बार 29 जून को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होगी। इस बार सावन अधिक मास होने से चातुर्मास चार के बजाय पांच माह का होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. राधे-राधे ने बताया कि भगवान विष्णु 29 जून एकादशी को कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तक क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाएंगे। इन पांच महीनों में मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। 23 नवंबर देवउठनी एकादशी से विवाह समारोह और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। शास्त्रों में बताया गया है कि हर शुभ कार्य के लिए भगवान विष्णु का आह्वान किया जाता है। साथ ही इन महीनों में सूर्य, चंद्रमा व प्रकृति का तेज कम हो जाता है। चातुर्मास में व्रत, साधना, जप-तप, ध्यान, पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व रहता है। साधु-संत तीर्थ यात्रा करने के बजाय अधिकतर समय मौन रहते हैं। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
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इस बार 19 साल बाद सावन मास 59 दिन का होगा। सह संयोग 2004 में बना था। सावन भगवान शिव को प्रिय है और अधिकमास व पुरुषोत्तम मास के चलते भक्त भगवान विष्णु व शिव दोनों की पूजा कर सकेंगे। साथ ही भक्तों को मंगल गौरी के नौ व्रत भी करने को मिलेंगे। हर तीन साल में एक अधिक मास आता है। इस बार सावन माह का अधिक पुरुषोत्तम मास का संयोग बन रहा है। अधिक मास होने के कारण सावन का महीना 59 दिनों तक रहेगा।
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