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राम की महिमा पर भाव विभोर हुए श्रद्धालु

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2022 02:15 AM IST
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Devotees were overwhelmed to hear the glory of Ram's name
पानीपत। नेता जी कॉलोनी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण साईं बाबा मंदिर के 53वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित त्रिदिवसीय श्रीराम कथा सत्संग का बुधवार को शुभारंभ हुआ। इसमें प्रवचन करते हुए स्वामी दयानंद सरस्वती ने राम नाम की महिमा का वर्णन किया। मुख्यातिथि के रूप में अशोक रेवड़ी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया। दयानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि एक बार महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र की मुलाकात हुई। महर्षि विश्वामित्र ने वशिष्ठ को एक हजार वर्ष की तपस्या का फल दिया। इसके बदले महर्षि वशिष्ठ ने केवल दो घड़ी के सत्संग का पुण्यफल विश्वामित्र को दिया। विश्वामित्र मुनि ने इसे अपना अपमान समझा। तब दोनों ऋर्षि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास यह पूछने गए कि एक हजार वर्ष की तपस्या या दो घड़ी का सत्संग इनमें से क्या श्रेष्ठ है लेकिन इसका उत्तर नहीं मिला। तब वे दोनों शेषनाग के पास गए। शेषनाग ने कहा कि मुझ पर पृथ्वी का भार टिका है। यदि आप इसे कुछ देर के लिए उठा लें तो मैं निर्णय कर सकता हूं। विश्वामित्र ने अपनी एक हजार वर्ष की तपस्या के फल से पृथ्वी को उठाना चाहा लेकिन वह नीचे आने लगी और जब वशिष्ठ ने दो घड़ी के सत्संग के पुण्य के साथ पृथ्वी को उठाना चाहा तो वह टिकी रही। यह देखकर विश्वामित्र ने सत्संग की सर्वोच्चता को मान लिया। इस अवसर पर किशन लखीना, राजेंद्र टुटेजा, राजेश लखीना, नरेश रेवड़ी, शैंकी सेठी, अनिल रेवड़ी, पंकज नारंग, मोहित नारंग, रिषभ, सेठी, राम नारायण तनेजा व जुगल नंदवानी उपस्थित रहे।
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