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पानीपत से अमरनाथ पहुंचे भक्त सुरक्षित, आज पहुंचेंगे घर
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पानीपत। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले जिले के तकरीबन सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं। वे रविवार तक घर पहुंचेंगे। अमरनाथ में शुक्रवार शाम को बादल फटने से कई श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं। इसे लेकर जिलेवासियों में भी यहां से जाने वालों को लेकर चिंता बन रही है। शनिवार को यहां से जाने वाले श्रद्धालुओं से उनके परिजनों ने संपर्क के बाद राहत की सांस ली। अमरनाथ पहुंचे भक्तों ने बताया कि वे सुरक्षित हैं।
उन्होंने बताया कि जत्थे में जितने भी श्रद्धालु जिले से गए थे, सभी को सुरक्षित ढूंढ लिया गया है। इसके लिए बॉयोमीट्रिक कार्ड का इस्तेमाल भी किया गया। राहत-बचाव कार्य में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से मदद दी जा रही है। कई टीमें आपदा में फंसे लोगों को निकाल रही हैं। अब सभी श्राइन बोर्ड की ओर से दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दे रहे हैं।
वार्ड- 20 के पार्षद लोकेश नांगरू भी अपने परिवार सहित बाबा बर्फानी के दर्शन को गए थे, जो सकुशल लौट रहे हैं। शहर निवासी सोनू ने बताया कि अमरनाथ में प्रदेश भर के जिलों से टेंट एवं लंगर लगाए गए हैं। यात्री इनमें ठहरे हैं और सुरक्षित हैं। उनके साथ पानीपत से करीब 25 लोग हैं। सभी अपने परिजनों से संपर्क कर चुके हैं। स्थानीय प्रशासन भी उनका पूरा सहयोग कर रहा है।
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सोनू ने बताया कि वे अमरनाथ गुफा के दर्शन करने के बाद चल पड़े थे। जब बादल फटा, उस समय वे पास ही संगम टॉप पर थे। शुक्रवार शाम को अचानक बादल फट गया। लाखों करोड़ों लीटर पानी एक साथ पहाड़ों से तेजी से बहता आ रहा था। जो अपने साथ पहाड़ों का मलबा भी लिए तेजी से घाटी की ओर बढ़ रहा था। जब तक लोग कुछ समझ पाते तब तक तो पानी ने कई टेंट, भंडारे तक उखाड़ दिए। कुछ देर पहले उन्होंने भी उन्हीं टेंट और लंगरों से खाना लिया था। इसके बाद तबाही का मंजर दिखा। हालांकि सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है।सोनू बताते हैं कि वे पिछले 20 साल से लगातार अमर नाथ की यात्रा कर रहे हैँ। लेकिन इस बार भीड़ सबसे ज्यादा देखी। अभी भी लाखों लोग दर्शन के लिए पहलगाम रुके हुए हैँ। यहां के सभी होटल फुल हैं।
सोनू ने बताया कि उन सभी सार्थियों ने कश्मीर का ही पोस्टपेड मोबाइल नंबर लिया था। इसका भी कहीं नेटवर्क आता है तो कहीं नहीं आता। इस वजह से आपस में बिछड़े लोग एक दूसरे से संपर्क कर पाए। हालांकि गुफा के पास मोबाइल ले जाने की मनाही रहती है। वहां सिर्फ प्रसाद ही लेकर जाया जाता है, लेकिन वे तब तक दर्शन कर निकल चुके थे। अब वे पवित्र गुफा के दर्शन कर वापस पहलगाम लौट चुके हैं, जो रविवार या सोमवार तक वापस आ जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि जत्थे में जितने भी श्रद्धालु जिले से गए थे, सभी को सुरक्षित ढूंढ लिया गया है। इसके लिए बॉयोमीट्रिक कार्ड का इस्तेमाल भी किया गया। राहत-बचाव कार्य में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से मदद दी जा रही है। कई टीमें आपदा में फंसे लोगों को निकाल रही हैं। अब सभी श्राइन बोर्ड की ओर से दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दे रहे हैं।
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वार्ड- 20 के पार्षद लोकेश नांगरू भी अपने परिवार सहित बाबा बर्फानी के दर्शन को गए थे, जो सकुशल लौट रहे हैं। शहर निवासी सोनू ने बताया कि अमरनाथ में प्रदेश भर के जिलों से टेंट एवं लंगर लगाए गए हैं। यात्री इनमें ठहरे हैं और सुरक्षित हैं। उनके साथ पानीपत से करीब 25 लोग हैं। सभी अपने परिजनों से संपर्क कर चुके हैं। स्थानीय प्रशासन भी उनका पूरा सहयोग कर रहा है।
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सोनू ने बताया कि वे अमरनाथ गुफा के दर्शन करने के बाद चल पड़े थे। जब बादल फटा, उस समय वे पास ही संगम टॉप पर थे। शुक्रवार शाम को अचानक बादल फट गया। लाखों करोड़ों लीटर पानी एक साथ पहाड़ों से तेजी से बहता आ रहा था। जो अपने साथ पहाड़ों का मलबा भी लिए तेजी से घाटी की ओर बढ़ रहा था। जब तक लोग कुछ समझ पाते तब तक तो पानी ने कई टेंट, भंडारे तक उखाड़ दिए। कुछ देर पहले उन्होंने भी उन्हीं टेंट और लंगरों से खाना लिया था। इसके बाद तबाही का मंजर दिखा। हालांकि सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है।सोनू बताते हैं कि वे पिछले 20 साल से लगातार अमर नाथ की यात्रा कर रहे हैँ। लेकिन इस बार भीड़ सबसे ज्यादा देखी। अभी भी लाखों लोग दर्शन के लिए पहलगाम रुके हुए हैँ। यहां के सभी होटल फुल हैं।
सोनू ने बताया कि उन सभी सार्थियों ने कश्मीर का ही पोस्टपेड मोबाइल नंबर लिया था। इसका भी कहीं नेटवर्क आता है तो कहीं नहीं आता। इस वजह से आपस में बिछड़े लोग एक दूसरे से संपर्क कर पाए। हालांकि गुफा के पास मोबाइल ले जाने की मनाही रहती है। वहां सिर्फ प्रसाद ही लेकर जाया जाता है, लेकिन वे तब तक दर्शन कर निकल चुके थे। अब वे पवित्र गुफा के दर्शन कर वापस पहलगाम लौट चुके हैं, जो रविवार या सोमवार तक वापस आ जाएंगे।