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Panipat News: जल यात्रा के साथ मनाया दसलक्षण पर्व
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पानीपत। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में जैन धर्म के सबसे पवित्र दसलक्षण पर्व का अंतिम दिवस बड़े ही भव्य रूप के साथ मनाया गया। पर्व के दसवें दिवस को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के रूप में मनाया गया। साथ ही अनंत चतुर्दशी व भगवान वासुपूज्य निर्वाणोत्सव भी धूमधाम के साथ मनाया गया। पानीपत के सभी सातों दिगंबर जैन मंदिरों में आज भगवान का अभिषेक व शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात नित्य नियम पूजन के साथ सभी ने निर्वाण लाडू भगवान के चरणों में अर्पित किए।
श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने बताया कि भाद्र माह के शुक्ल चौदस को दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व का दसवां दिन होता है। इस दिन को अनंत चतुर्दशी कहते हैं। इस दिन सभी लोग पानीपत में विराजमान सभी जैन मंदिरों के दर्शन करने जाते है व्रत उपवास रखते हैं। ब्रह्मचर्य हमें सिखाता है कि उन परिग्रहों का त्याग करना जो हमारे भौतिक संपर्क से जुड़ी हुई है। जैसे जमीन पर सोना न कि गद्दे तकियों पर जरूरत से ज्यादा किसी वस्तु का उपयोग न करना, व्यय, मोह, वासना ना रखते सादगी से जीवन व्यतीत करना। ब्रह्म जिसका मतलब आत्मा, और चर्या का मतलब रखना। इसको मिलाकर ब्रह्मचर्य शब्द बना है। ब्रह्मचर्य का मतलब अपनी आत्मा में रहना है।
ब्रह्मचर्य का पालन करने से आपको पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान और शक्ति प्राप्त होगी और ऐसा न करने पर आप सिर्फ अपनी इच्छाओं और कामनाओं के गुलाम ही है। अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया की जैन धर्म में दसलक्षण धर्म की बहुत विशेषता है। दसलक्षण के अंतिम दिवस को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया गया। पानीपत में सैकड़ो वर्षों से इस दिन जल यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा को निभाते हुए आज भव्य जल यात्रा का आयोजन किया गया। यह जल यात्रा बैंड बाजों के साथ जैन मंदिर जैन मोहल्ला से प्रारंभ होकर गुड़ मंडी बाजार, मुख्य बाजार, हलवाई हट्टा, सुभाष बाजार, श्री दिगंबर जैन मंदिर दुन्दीवालान, सालारगंज गेट, इंसार बाजार, इंदिरा बाजार होते हुए पुन: श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला में संपन्न हुई।
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तत्पश्चात श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला में विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की बड़ी मूर्ति का मस्ताकाभिषेक आयोजित किया गया जिसमें सभी ने भाग लिया।
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श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने बताया कि भाद्र माह के शुक्ल चौदस को दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व का दसवां दिन होता है। इस दिन को अनंत चतुर्दशी कहते हैं। इस दिन सभी लोग पानीपत में विराजमान सभी जैन मंदिरों के दर्शन करने जाते है व्रत उपवास रखते हैं। ब्रह्मचर्य हमें सिखाता है कि उन परिग्रहों का त्याग करना जो हमारे भौतिक संपर्क से जुड़ी हुई है। जैसे जमीन पर सोना न कि गद्दे तकियों पर जरूरत से ज्यादा किसी वस्तु का उपयोग न करना, व्यय, मोह, वासना ना रखते सादगी से जीवन व्यतीत करना। ब्रह्म जिसका मतलब आत्मा, और चर्या का मतलब रखना। इसको मिलाकर ब्रह्मचर्य शब्द बना है। ब्रह्मचर्य का मतलब अपनी आत्मा में रहना है।
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ब्रह्मचर्य का पालन करने से आपको पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान और शक्ति प्राप्त होगी और ऐसा न करने पर आप सिर्फ अपनी इच्छाओं और कामनाओं के गुलाम ही है। अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया की जैन धर्म में दसलक्षण धर्म की बहुत विशेषता है। दसलक्षण के अंतिम दिवस को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया गया। पानीपत में सैकड़ो वर्षों से इस दिन जल यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा को निभाते हुए आज भव्य जल यात्रा का आयोजन किया गया। यह जल यात्रा बैंड बाजों के साथ जैन मंदिर जैन मोहल्ला से प्रारंभ होकर गुड़ मंडी बाजार, मुख्य बाजार, हलवाई हट्टा, सुभाष बाजार, श्री दिगंबर जैन मंदिर दुन्दीवालान, सालारगंज गेट, इंसार बाजार, इंदिरा बाजार होते हुए पुन: श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला में संपन्न हुई।
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तत्पश्चात श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला में विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की बड़ी मूर्ति का मस्ताकाभिषेक आयोजित किया गया जिसमें सभी ने भाग लिया।