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गोचरांद भूमि की नीलामी हुई तो जाएंगे कोर्ट : गोशाला संचालक
पानीपत
Updated Mon, 05 May 2014 12:12 AM IST
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गो आयोग और प्रदेश के गोशाला संचालकों ने जिले समेत प्रदेश में गोचरांद की जमीन की बोली न होने देने की हुंकार भर दी है और किसी भी गांव में एक भी एकड़ जमीन की बोली करने पर उपायुक्त के खिलाफ कोर्ट में जाने की चेतावनी दी है। यही नहीं संचालकों ने ऐसा होने पर गोशालाओं से गायें खोलने की भी बात कह दी है। यह फैसला सेक्टर-25 स्थित पाइट संस्कृति स्कूल में रविवार को हुई बैठक में लिया गया जिसमें प्रदेश के कई जिलों के गोशाला संचालक व प्रबंधक शामिल हुए। अध्यक्षता गो आयोग के उपाध्यक्ष हरिओम तायल ने की। बैठक का संचालन पूर्व कमिश्नर एवं कामधेनु गोधाम विसर मेवात के चेयरमैन एसपी गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि पानीपत प्रशासन ने गोचरांद जमीन की बोली कराने के आदेश कर दिए हैं।
प्रशासन का यह कदम कोर्ट के आदेशों की उल्लंघना है। गोशाला संघ और गो सेवका इसका विरोध करेंगे और ऐसा करने पर उपायुक्त के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे गोधन को सड़कों पर खोलने को भी मजबूर हो जाएंगे। इसके बाद गायों की जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि गोचरांद भूमि को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश के गोभक्त किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि 20 मई, 2013 को पंचायत विभाग के प्रधान सचिव द्वारा सभी उपायुक्तों को गोचरांद जमीन की बोली न कराने के आदेश दे रखे हैं। हरिओम तायल ने कहा कि प्रदेश में गो सेवा आयोग बना दिया, लेकिन आयोग के तहत आज तक कोई ग्रांट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि गोशालाओं के पास चारे की कमी है और वे गायों की देखभाल करने को लेकर परेशान हैं। इसको लेकर सरकार से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन सरकार इसमें कुछ भी योगदान नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशों में प्रति गाय के हिसाब से खर्चा दिया जा रहा है। इससे वहां की गायें सुरक्षित हैं।
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उन्हाेंने कहा कि सरकार गाय की नस्ल सुधार के नाम ग्रांट बेतुकी खर्च कर रही है। एक कंपनी के साथ 12.55 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया गया है जिसमें भारी घपला होने का अंदेशा है। वे इस एग्रीमेंट को रद्द करने और इसकी जांच कराने की मांग करते हैं। इससे पूर्व प्रदेशभर की विभिन्न गोशालाओं से पहुंचे पदाधिकारियों ने गोधन बचाने को लेकर विचार-विमर्श किया। इस मौके पर वेणू गोपाल, अंबाला गोशाला जोन के प्रभारी सुमन गुप्ता, करनाल से गोपाल स्वामी, हरभजन सिंह, कुलबीर सिंह, गिरधारी लाल गोय, सुरेश पाराशर, सुनील शास्त्री, चरण अजीत सिंह, अशोक अग्रवाल, दीपचंद मौजूद रहे।
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प्रशासन का यह कदम कोर्ट के आदेशों की उल्लंघना है। गोशाला संघ और गो सेवका इसका विरोध करेंगे और ऐसा करने पर उपायुक्त के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे गोधन को सड़कों पर खोलने को भी मजबूर हो जाएंगे। इसके बाद गायों की जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि गोचरांद भूमि को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश के गोभक्त किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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उन्होंने कहा कि 20 मई, 2013 को पंचायत विभाग के प्रधान सचिव द्वारा सभी उपायुक्तों को गोचरांद जमीन की बोली न कराने के आदेश दे रखे हैं। हरिओम तायल ने कहा कि प्रदेश में गो सेवा आयोग बना दिया, लेकिन आयोग के तहत आज तक कोई ग्रांट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि गोशालाओं के पास चारे की कमी है और वे गायों की देखभाल करने को लेकर परेशान हैं। इसको लेकर सरकार से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन सरकार इसमें कुछ भी योगदान नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशों में प्रति गाय के हिसाब से खर्चा दिया जा रहा है। इससे वहां की गायें सुरक्षित हैं।
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उन्हाेंने कहा कि सरकार गाय की नस्ल सुधार के नाम ग्रांट बेतुकी खर्च कर रही है। एक कंपनी के साथ 12.55 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया गया है जिसमें भारी घपला होने का अंदेशा है। वे इस एग्रीमेंट को रद्द करने और इसकी जांच कराने की मांग करते हैं। इससे पूर्व प्रदेशभर की विभिन्न गोशालाओं से पहुंचे पदाधिकारियों ने गोधन बचाने को लेकर विचार-विमर्श किया। इस मौके पर वेणू गोपाल, अंबाला गोशाला जोन के प्रभारी सुमन गुप्ता, करनाल से गोपाल स्वामी, हरभजन सिंह, कुलबीर सिंह, गिरधारी लाल गोय, सुरेश पाराशर, सुनील शास्त्री, चरण अजीत सिंह, अशोक अग्रवाल, दीपचंद मौजूद रहे।