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फूल अर्पित कर की माता चंद्रघंटा की पूजा,आज करेंगे मां कुष्मांडा की अराधना
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नवरात्र के तीसरे दिन वीरवार को श्रद्धालुओं ने देवी मंदिर समेत शहर के सभी मंदिरों में मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की। कुछ लोगों ने कोरोना संक्रमण के चलते घर में रहकर पूजा की और व्रत रखा। आज चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होगी। नवरात्र के नौ दिन मां के नौ रूपों की पूजा की जाएगी और तीसरे दिन मां के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की गई। देवी मंदिर में पूरे दिन में पांच हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने माता बाला सुंदरी के दर्शन किए। मंदिर समिति की ओर से परिसर में कोविड-19 गाइडलाइन का पालन कराया जा रहा है। मास्क लगाने वालों को ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। सभी को सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाते हुए पूजा करने की अनुमति दी जा रही है। अधिक देर तक मंदिर में ठहरने पर रोक है।
राक्षसों का वध करने वाली हैं मां चंद्रघंटा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा धारण किया है। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है, जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं। नवरात्र के तीसरे दिन व्रत और पूजा करने वाले भक्तों की सारी मनोकामना पूरी हो जाती है।
पंडितों ने बताई पूजन विधि
नवरात्र के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा की जाएगी। पंडित शिव दत्त ने बताया कि माता कुष्मांडा की पूजा के लिए सुबह स्नान करने के बाद मां कुष्मांडा का स्मरण करके उनको धूप, गंध, अक्षत, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। अब मां कुष्मांडा को हलवा और दही का भोग लगाएं, फिर उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां कुष्मांडा की आरती करें। -आचार्य लाल मणि पांडे, देवी मंदिर
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घर पर कर रही हूं मां की पूजा : सुनीता
बिचपड़ी की रहने वाली महिला ने बताया कि वह हर साल नवरात्र में बिचपड़ी से माता के दर्शन करने के लिए देवी मंदिर जाती थी, लेकिन इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए घर पर ही माता की पूजा कर रहीं हैं। पूजा घर में करो या मंदिर में, मन में श्रद्धा होनी चाहिए।
- सुनीता अग्रवाल, गृहिणी
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राक्षसों का वध करने वाली हैं मां चंद्रघंटा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा धारण किया है। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है, जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं। नवरात्र के तीसरे दिन व्रत और पूजा करने वाले भक्तों की सारी मनोकामना पूरी हो जाती है।
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पंडितों ने बताई पूजन विधि
नवरात्र के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा की जाएगी। पंडित शिव दत्त ने बताया कि माता कुष्मांडा की पूजा के लिए सुबह स्नान करने के बाद मां कुष्मांडा का स्मरण करके उनको धूप, गंध, अक्षत, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। अब मां कुष्मांडा को हलवा और दही का भोग लगाएं, फिर उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां कुष्मांडा की आरती करें। -आचार्य लाल मणि पांडे, देवी मंदिर
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घर पर कर रही हूं मां की पूजा : सुनीता
बिचपड़ी की रहने वाली महिला ने बताया कि वह हर साल नवरात्र में बिचपड़ी से माता के दर्शन करने के लिए देवी मंदिर जाती थी, लेकिन इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए घर पर ही माता की पूजा कर रहीं हैं। पूजा घर में करो या मंदिर में, मन में श्रद्धा होनी चाहिए।
- सुनीता अग्रवाल, गृहिणी