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तीन लोगों ने पूर्व भाजपा विधायक पति सुरेंद्र रेवड़ी पर लगाए करोड़ों रुपये की 1700 गज जमीन हड़पने के आरोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Nov 2020 12:38 AM IST
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तीन ग्रामीणों ने भाजपा से पूर्व शहरी विधायक रही रोहिता रेवड़ी के पति सुरेंद्र रेवड़ी पर जबरन उनकी 1700 गज जमीन हड़पने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि वे पिछले सवा महीने से अपनी फरियाद लेकर सभी पुलिस अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन पुलिस उनकी फरियाद को ठुकरा उल्टा उन्हें ही धमका कर भगा देती है। इसकी शिकायत वे सीएम मनोहर लाल, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को भी लिख चुके हैं, वहीं, गृह मंत्री अनिल विज से डायरेक्ट जाकर भेंट तक कर चुके हैं, लेकिन महज आश्वासन ही मिला। आंखों में आंसू लिए तीनों ग्रामीणों ने हारकर मीडिया को अपने दर्द सुनाने के लिए बुधवार को प्रेसवार्ता की। तीनों लोगों ने उनकी सुनवाई न होने पर मजबूरन आत्महत्या करने की चेतावनी तक दी है।
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हैरान कर देने वाली बात सामने तब आई जब इस प्रकरण में शामिल एक मुख्य व्यक्ति प्रेसवार्ता से पहले ही उनकी जगह पर जाकर बैठ गया और उनको वहां से जाने के लिए कहने लगा। ये वही आदमी था, जिससे तीनों ग्रामीणों ने अपनी जमीन खरीदी थी। जिस पर पीड़ितों ने कहा कि आप खुद ही देख लीजिए इनकी दंबगिरी। प्रेसवार्ता हम कर रहे हैं और सफाई देने हमारी जगह आरोपी पक्ष पहुंचा है।
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पहले जंगल था, सेक्टर कटा तो हड़प ली जमीन
गांव रिशपुर निवासी कृपाल सिंह, ईदागाह कॉलोनी रामनिवास, ओमप्रकाश निवासी छाजपुर खुर्द ने बताया कि उन्होंने गांव रिसालू निवासी देई राम से 1999 से लेकर 2005 तक अलग-अलग समय पर करीब 1700 गज जमीन खरीदी थी। उस समय यहां पर जंगल हुआ करता था। अब यहां सेक्टर 23 और टीडीआई सिटी बन गए हैं। उनकी जमीन टीडीआई सिटी में आ गई है। करोड़ों रुपये की जमीन को हड़पने के लिए सुरेंद्र रेवड़ी व उनके सहयोगियों देई राम हाल निवासी गन्नौर ने गलत रजिस्ट्री दिखाकर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। उनकी चाहरदीवारी व कमरों को जेसीबी से तोड़ दिया।
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पेंशन से भरते हैं पेट, इसके चक्कर में 15 गाय भी मर गई
पीड़ित पक्ष ने बताया कि उनकी गांव में एक गौशाला है, जिसमें सौ से भी ज्यादा गाय थीं। पुलिस-थानों, मंत्रियों के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं। इस चक्कर में करीब 15 गाय भी मर चुकी हैं। वे भी खुद पेंशन से अपने व अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। एक आखिरी आस इस जमीन की थी, जो हड़पी जा चुकी है।
पुलिस का कब्जे से कोई मतलब नहीं : डीएसपी
पुलिस का कब्जे से कोई मतलब नहीं है, ये सिविल का मैटर है। जितनी पुलिस की कार्रवाई बनेेगी की जाएगी। इसका फैसला कोर्ट में होगा। जैसे कोर्ट आदेश करेगी उनके आदेशों की पालना की जाएगी। अगर किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत आएगी तो मामले की छानबीन की जाएगी।

सतीश वत्स, डीएसपी, मुख्यालय, पानीपत।
बेईमान किस्म के लोग हैं, पैसे ऐठना चाहते हैं : रेवड़ी
इन लोगों के पास जमीन के पूरे दस्तावेज भी नहीं हैं। ये बेईमान लोग हैं, जो सिर्फ हल्ला करके मुझसे पैसे ऐंठना चाहते हैं। हमारे पास जमीन के असल और सही कागजात हैं। हमने निशानदेही तक करवाई है। ये पूरे प्रशासन को भी झूठलाना चाहते हैं। इनसे पहले तो हमने ही दरखास्त भी दी थी।
सुरेंद्र रेवड़ी, पूर्व भाजपा विधायक पति।
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