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Panipat News: फर्जी अधिकारी बनकर ठगी कर रहे साइबर अपराधी, संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर दें सूचना
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पानीपत। साइबर अपराधी आमजन को डर और भ्रम में डालकर ठगी करने के लिए डिजिटल अरेस्ट जैसे नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अपराधी खुद को सीबीआई, पुलिस, नारकोटिक्स या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई प्रक्रिया नहीं है। पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि ठग पीड़ित को फोन कर उसके परिजनों के आपराधिक गतिविधि में शामिल होने या पार्सल में प्रतिबंधित सामग्री मिलने की झूठी कहानी सुनाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये पीछे पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय जैसा माहौल बनाकर पीड़ित को डराया जाता है। आरोपी पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रोके रखते हैं और मामला रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।
पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती। यदि किसी के पास ऐसी कोई संदिग्ध कॉल आती है, तो घबराने के बजाय तुरंत अपने स्वजनों से संपर्क कर स्थिति की सत्यता जांचें।
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पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर ब्लैकमेल या डिजिटल अरेस्ट की धमकी देता है, तो डरे बिना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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इस संबंध में पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई प्रक्रिया नहीं है। पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि ठग पीड़ित को फोन कर उसके परिजनों के आपराधिक गतिविधि में शामिल होने या पार्सल में प्रतिबंधित सामग्री मिलने की झूठी कहानी सुनाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये पीछे पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय जैसा माहौल बनाकर पीड़ित को डराया जाता है। आरोपी पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रोके रखते हैं और मामला रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।
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पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती। यदि किसी के पास ऐसी कोई संदिग्ध कॉल आती है, तो घबराने के बजाय तुरंत अपने स्वजनों से संपर्क कर स्थिति की सत्यता जांचें।
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पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर ब्लैकमेल या डिजिटल अरेस्ट की धमकी देता है, तो डरे बिना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।