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Panipat News: करोड़ों खर्च फिर भी सफाई नहीं
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पानीपत। औद्योगिक नगरी में सफाई पर हर महीने करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, बावजूद इसके सफाई नजर नहीं आ रही है। निगम के अधिकारियों से लेकर पार्षद व मेयर भी केवल दावों तक सिमटे रहे। धरातल पर शहर में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इन सबके चलते शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग में सुधार नहीं हो पा रहा है। शहर में सबसे बड़ी चुनौती जेबीएम कंपनी का डंपिंग प्वाइंट है।
जेबीएम कंपनी ने 2018 में शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान शुरू किया था। कंपनी ने उस समय कूड़े के कलेक्शन प्वाइंंट बनाने के साथ डंपिंग प्वाइंट बनाने की बात कही थी। इन सालों में जेबीएम डंपिंग प्वाइंट नहीं बना पाई है। पहले सेक्टर-25 में खाली जगह पर डंपिंग प्वाइंट बनाया गया। स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो डेढ़ साल पहले सिवाह गांव स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के नजदीक डंपिंग प्वाइंट बनाया गया। ग्रामीण यहां पर भी विरोध में खड़े हो गए। निगम अधिकारियों ने इसके बाद डंपिंग प्वाइंट के लिए पुराना चीनी मिल, डाहर गांव स्थित एनएफएल की झील और महराना गांव में जगह तलाश की। निगम ने इसके बाद गोहाना रोड बिंझौल झाल के नजदीक कूड़ा डालना शुरू कर दिया। अब यहां से निकल पाना भी मुश्किल हो गया है।
कोट्स फोटो
शहर में सफाई का खास प्रबंध नहीं
प्रवीण शर्मा ने बताया कि शहर में सफाई के कोई खास प्रबंध नहीं हैं। कूड़े के जगह-जगह ढेर लगे हुए हैं। बूंदाबांदी या बारिश के सीजन में कूड़े के नजदीक से निकल पाना भी मुश्किल हो जाता है। निगम अधिकारी इसकी व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। कंपनी के रिकॉर्ड में अधिक सफाईकर्मी हैं, जबकि धरातल पर कम हैं। यह सब अधिकारियों की सांठगांठ से हो रहा है।
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कोट्स फोटो
कभी-कभी होती है सफाई
चांद दलाल ने बताया कि कॉलोनियों में गंदगी पसरा रहता है। नालों व नालियों तक की सफाई नहीं की जाती। कभी कभार सफाई होती है तो उसका कूड़ा गली में पड़ा रहता है। ऐसे में लोगों को जीना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई सुधार नहीं है। निगम का बजट अधिक खर्च होता है, जबकि सफाई अपेक्षाकृत नजर नहीं आती। इसमें सुधार की जरूरत है।
कोट्स फोटो
अधिकारियों का ध्यान नहीं
बलराज ने बताया कि बिंझौल झाल पर गोहाना रोड के साथ कूड़ा डंपिंग प्वाइंट बनाया गया है। कूड़े से हर समय बदबू उठती रहती है। यह सड़क शहर को नेशनल हाईवे को जोड़ती है। रोहतक व गोहाना से शहर में आने वाले लोग इसी सड़क से आते हैं। ऐसे मे लोगों को निकल पाना भी मुश्किल होता है। अधिकारियों का समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी सफाई नजर नहीं आ रही।
कोट्स फोटो
सफाई की स्थिति में हुआ है सुधार
भाजपा के जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट ने बताया कि शहर को चार सेक्टर में बांटकर दो कंपनियों को सफाई का ठेका दिया है। जेबीएम कंपनी डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का जिम्मा है। शहर में पहले से सफाई की स्थिति में सुधार है। इसकी स्थिति में और सुधार किया जा रहा है। निगम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।
कोट्स फोटो
भाजपा ने धरातल पर नहीं किया काम
कांग्रेस के नेता बलजीत सिंह ने बताया कि भाजपा सरकार ने 10 साल में केवल घोषणा ही की हैं। धरातल पर किसी प्रकार का काम नहीं किया है। शहर में सफाई के नाम पर पैसे कमाए गए हैं। कांग्रेस की सरकार आने पर सफाई कराई जाएगी। इसको लेकर ग्राउंड पर काम किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होगी।
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जेबीएम कंपनी ने 2018 में शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान शुरू किया था। कंपनी ने उस समय कूड़े के कलेक्शन प्वाइंंट बनाने के साथ डंपिंग प्वाइंट बनाने की बात कही थी। इन सालों में जेबीएम डंपिंग प्वाइंट नहीं बना पाई है। पहले सेक्टर-25 में खाली जगह पर डंपिंग प्वाइंट बनाया गया। स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो डेढ़ साल पहले सिवाह गांव स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के नजदीक डंपिंग प्वाइंट बनाया गया। ग्रामीण यहां पर भी विरोध में खड़े हो गए। निगम अधिकारियों ने इसके बाद डंपिंग प्वाइंट के लिए पुराना चीनी मिल, डाहर गांव स्थित एनएफएल की झील और महराना गांव में जगह तलाश की। निगम ने इसके बाद गोहाना रोड बिंझौल झाल के नजदीक कूड़ा डालना शुरू कर दिया। अब यहां से निकल पाना भी मुश्किल हो गया है।
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शहर में सफाई का खास प्रबंध नहीं
प्रवीण शर्मा ने बताया कि शहर में सफाई के कोई खास प्रबंध नहीं हैं। कूड़े के जगह-जगह ढेर लगे हुए हैं। बूंदाबांदी या बारिश के सीजन में कूड़े के नजदीक से निकल पाना भी मुश्किल हो जाता है। निगम अधिकारी इसकी व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। कंपनी के रिकॉर्ड में अधिक सफाईकर्मी हैं, जबकि धरातल पर कम हैं। यह सब अधिकारियों की सांठगांठ से हो रहा है।
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कभी-कभी होती है सफाई
चांद दलाल ने बताया कि कॉलोनियों में गंदगी पसरा रहता है। नालों व नालियों तक की सफाई नहीं की जाती। कभी कभार सफाई होती है तो उसका कूड़ा गली में पड़ा रहता है। ऐसे में लोगों को जीना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई सुधार नहीं है। निगम का बजट अधिक खर्च होता है, जबकि सफाई अपेक्षाकृत नजर नहीं आती। इसमें सुधार की जरूरत है।
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अधिकारियों का ध्यान नहीं
बलराज ने बताया कि बिंझौल झाल पर गोहाना रोड के साथ कूड़ा डंपिंग प्वाइंट बनाया गया है। कूड़े से हर समय बदबू उठती रहती है। यह सड़क शहर को नेशनल हाईवे को जोड़ती है। रोहतक व गोहाना से शहर में आने वाले लोग इसी सड़क से आते हैं। ऐसे मे लोगों को निकल पाना भी मुश्किल होता है। अधिकारियों का समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी सफाई नजर नहीं आ रही।
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सफाई की स्थिति में हुआ है सुधार
भाजपा के जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट ने बताया कि शहर को चार सेक्टर में बांटकर दो कंपनियों को सफाई का ठेका दिया है। जेबीएम कंपनी डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का जिम्मा है। शहर में पहले से सफाई की स्थिति में सुधार है। इसकी स्थिति में और सुधार किया जा रहा है। निगम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।
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भाजपा ने धरातल पर नहीं किया काम
कांग्रेस के नेता बलजीत सिंह ने बताया कि भाजपा सरकार ने 10 साल में केवल घोषणा ही की हैं। धरातल पर किसी प्रकार का काम नहीं किया है। शहर में सफाई के नाम पर पैसे कमाए गए हैं। कांग्रेस की सरकार आने पर सफाई कराई जाएगी। इसको लेकर ग्राउंड पर काम किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होगी।