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आरटीआई से रजिस्ट्री के फर्जीवाड़े का खुलासा
amar ujala beuro panipat
Updated Fri, 30 Dec 2016 12:07 AM IST
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जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) कार्यालय की फर्जी एनओसी बनाकर तहसील में प्लाट की रजिस्ट्री कराने के फर्जीवाड़े का आरटीआई से खुलासा हुआ है। आरटीआई एक्टिविस्ट ने उपायुक्त से क्रेता-विक्रेता सहित फर्जीवाड़ा चलाने वाले गिरोह में संलिप्त सभी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और फर्जी एनओसी से रजिस्ट्री को तत्काल रद करने की मांग की है।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि गांव गढ़ी सिकंदरपुर में गत 10 जुलाई 2015 को गुरुदेव ने 14 सौ वर्ग गज भूमि की रजिस्ट्री राखी रानी निवासी सावन पार्क मॉडल टाउन पानीपत के नाम पानपीत तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री कराई थी। अर्बन एरिया एक्ट 1975 की धारा 7-ए लागू होने के चलते संपति के क्रय-विक्रय की रजिस्ट्री कराने के लिए जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) से भूमि की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना अनिवार्य है। इसलिए क्रेता व विक्रेता ने क्रमांक संख्या 71, 22 जून 2015 के तहत डीटीपी कार्यालय से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी तहसील में रजिस्ट्री के समय रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ लगाया।
इसी एनओसी दस्तावेज को सही मानकर तहसीलदार द्वारा रजिस्ट्री कर दी गई। कपूर ने बताया कि तहसील कार्यालय पानीपत में दलालों द्वारा फर्जी एनओसी खुद बनाकर रजिस्ट्रियां कराने की सूचना मिलने पर उन्होंने डीटीपी पानीपत व तहसीलदार पानीपत को 25 अक्टूबर 2016 को अलग-अलग आरटीआई लगाई। आरटीआई के जवाब मेें 18 नवंबर 2016 को सब-रजिस्ट्रार पानीपत ने रजिस्ट्री के साथ लगी हुई एनओसी की प्रति दी, जोकि डीटीपी पानीपत के हस्ताक्षर सहित क्रमांक मीमो नंबर 71, 22 जून 2015 को जारी गुरुदेव सिंह व राखी रानी (क्रेता) के नाम से है। जबकि दूसरी और आरटीआई के जवाब में डीटीपी(ई) पानीपत ने अपने सात नवंबर 2016 के पत्र द्वारा खुलासा किया है कि उनके कार्यालय द्वारा 22 जून 2015 को क्रमांक सं. 71 के तहत कोई एनओसी जारी नहीं की है। डीटीपी (ई) पानीपत ने पत्र में यह भी बताया कि गुरुदेव निवासी गांव गढ़ी सिकंदरपुर (पानीपत) को उनके कार्यालय द्वारा माह जून 2016 में कोई एनओसी जारी नहीं गई गई। डीटीपी (ई) ने अपने जवाब में यह भी सूचित किया कि मीमो पत्र क्रमांक 71, 30 मार्च 2015 द्वारा राम कुमार निवासी शिमला मोलाना को एनओसी जारी हुई है।
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तहसील में गिरोह सक्रिय, कार्रवाई की मांग की
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि पानीपत तहसील दफ्तर में फर्जी एनओसी बना कर रजिस्ट्रियां कराने वाले दलालों का गिरोह सक्रिय है। फर्जी एनओसी से धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां हो रही हैं। कपूर ने कहा कि एनओसी से हुई सभी रजिस्ट्रियों में बड़ा घोटाला होने की आशंका के चलते पूरे मामले की विजिलेंव से जांच कराने की मांग की है।
डीटीपी की फर्जी एनओसी बनवाकर तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री कराने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तहसील में इस तरह का खेल नहीं चलने दिया जाएगा।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, उपायुक्त पानीपत।
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आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि गांव गढ़ी सिकंदरपुर में गत 10 जुलाई 2015 को गुरुदेव ने 14 सौ वर्ग गज भूमि की रजिस्ट्री राखी रानी निवासी सावन पार्क मॉडल टाउन पानीपत के नाम पानपीत तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री कराई थी। अर्बन एरिया एक्ट 1975 की धारा 7-ए लागू होने के चलते संपति के क्रय-विक्रय की रजिस्ट्री कराने के लिए जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) से भूमि की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना अनिवार्य है। इसलिए क्रेता व विक्रेता ने क्रमांक संख्या 71, 22 जून 2015 के तहत डीटीपी कार्यालय से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी तहसील में रजिस्ट्री के समय रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ लगाया।
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इसी एनओसी दस्तावेज को सही मानकर तहसीलदार द्वारा रजिस्ट्री कर दी गई। कपूर ने बताया कि तहसील कार्यालय पानीपत में दलालों द्वारा फर्जी एनओसी खुद बनाकर रजिस्ट्रियां कराने की सूचना मिलने पर उन्होंने डीटीपी पानीपत व तहसीलदार पानीपत को 25 अक्टूबर 2016 को अलग-अलग आरटीआई लगाई। आरटीआई के जवाब मेें 18 नवंबर 2016 को सब-रजिस्ट्रार पानीपत ने रजिस्ट्री के साथ लगी हुई एनओसी की प्रति दी, जोकि डीटीपी पानीपत के हस्ताक्षर सहित क्रमांक मीमो नंबर 71, 22 जून 2015 को जारी गुरुदेव सिंह व राखी रानी (क्रेता) के नाम से है। जबकि दूसरी और आरटीआई के जवाब में डीटीपी(ई) पानीपत ने अपने सात नवंबर 2016 के पत्र द्वारा खुलासा किया है कि उनके कार्यालय द्वारा 22 जून 2015 को क्रमांक सं. 71 के तहत कोई एनओसी जारी नहीं की है। डीटीपी (ई) पानीपत ने पत्र में यह भी बताया कि गुरुदेव निवासी गांव गढ़ी सिकंदरपुर (पानीपत) को उनके कार्यालय द्वारा माह जून 2016 में कोई एनओसी जारी नहीं गई गई। डीटीपी (ई) ने अपने जवाब में यह भी सूचित किया कि मीमो पत्र क्रमांक 71, 30 मार्च 2015 द्वारा राम कुमार निवासी शिमला मोलाना को एनओसी जारी हुई है।
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तहसील में गिरोह सक्रिय, कार्रवाई की मांग की
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि पानीपत तहसील दफ्तर में फर्जी एनओसी बना कर रजिस्ट्रियां कराने वाले दलालों का गिरोह सक्रिय है। फर्जी एनओसी से धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां हो रही हैं। कपूर ने कहा कि एनओसी से हुई सभी रजिस्ट्रियों में बड़ा घोटाला होने की आशंका के चलते पूरे मामले की विजिलेंव से जांच कराने की मांग की है।
डीटीपी की फर्जी एनओसी बनवाकर तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री कराने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तहसील में इस तरह का खेल नहीं चलने दिया जाएगा।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, उपायुक्त पानीपत।