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दो दशक से औद्योगिक नगरी में चल रहा रंगदारी का खेल
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औद्योगिक नगरी में गैंगस्टर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए रंगदारी ना देने वालों को निशाना बना रहे हैं। रंगदारी का ये खेल पिछले 20 साल से चलता आ रहा है। इसमें अब तक छह गैंगस्टर समेत शराब व लॉटरी जैसे कारोबारों से जुड़े 8 की मौत हो चुकी है। रंगदारी के कारण ही प्रदेश की सबसे बड़ी टोका मंडी खत्म हो चुकी है।
समालखा प्रदेश की सबसे बड़ी टोका मंडी थी। रंगदारी से परेशान होकर उद्यमियों ने टोका उद्योग को छोड़ दिया। अब पानीपत में शराब और सट्टा के बाजारों में रंगदारी का बड़ा खेल है। गैंगस्टर लंबू रंगदारी नहीं मिलने पर तीन बार अजीत ठेकेदार पर हमला करवा चुका है।
रंगदारी में गैंगवार-
- 2000 में रंगदारी को लेकर अजीत पहलवान की हत्या कर दी गई
- 2001 में बाबरपुर में एक बड़े कारोबारी की हत्या कर अजीत पहलवान की हत्या का बदला लिया गया
- 2003 में रंगदारी के खेल में ही गैंगस्टर कुलदीप कालवां की कोर्ट परिसर में हत्या की गई
- 2017 में मिठाई की दुकानों से रंगदारी के लेनदेन में तहसील कैंप में राकेश श्योकंद की हत्या कर दी गई
- 2018 में काबड़ी रोड पर शराब बेचने को लेकर नितिन की हत्या
- 2020 के अक्तूबर में छाजपुर गांव में हत्या
- रंगदारी की वजह से टोका उद्योग सिमटा-
समालखा का टोका उद्योग देश में प्रसिद्ध था। माफिया की नजर इस उद्योग पर पड़ी। वे उद्यमियों से रंगदारी मांगने लगे। उद्यमियों ने भयभीत होकर धंधा समेटना शुरू कर दिया। वर्ष 2000 तक टोका उद्योग 100 से सिमट कर महस 25 फैक्टरियों तक रह गया। इस क्षेत्र में गैंगस्टर दिनेश चुलकाना, सोनू मालपुरिया, राजेश मालपुरिया और जगबीर आट्टा का दखल रहा है।
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- जेल से भी गैंग ऑपरेट करने की बात आई सामने
सिवाह के गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू के जेल से ही गैंग को ऑपरेट करने की बात सामने आई है। वह जेल से ही वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड कर चुका है। लंबू का नाम लेकर शराब ठेकेदार को पीटने और धमकाने के मामले में उसके दो गुर्गों को पुलिस गिरफ्तार भी कर चुकी है। इन मामलों की जांच सीआईए-टू कर रही है। शराब ठेकेदार अजीत के भाई सुरेंद्र ने लंबू के विकास नाम के आरोपी से बातचीत की वीडियो भी पुलिस को सौंपी है। आरोप है कि गैंगस्टर लंबू जेल से जमानत पर आने वाले गुर्गों के माध्यम से वारदातों को अंजाम देता है।
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समालखा प्रदेश की सबसे बड़ी टोका मंडी थी। रंगदारी से परेशान होकर उद्यमियों ने टोका उद्योग को छोड़ दिया। अब पानीपत में शराब और सट्टा के बाजारों में रंगदारी का बड़ा खेल है। गैंगस्टर लंबू रंगदारी नहीं मिलने पर तीन बार अजीत ठेकेदार पर हमला करवा चुका है।
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रंगदारी में गैंगवार-
- 2000 में रंगदारी को लेकर अजीत पहलवान की हत्या कर दी गई
- 2001 में बाबरपुर में एक बड़े कारोबारी की हत्या कर अजीत पहलवान की हत्या का बदला लिया गया
- 2003 में रंगदारी के खेल में ही गैंगस्टर कुलदीप कालवां की कोर्ट परिसर में हत्या की गई
- 2017 में मिठाई की दुकानों से रंगदारी के लेनदेन में तहसील कैंप में राकेश श्योकंद की हत्या कर दी गई
- 2018 में काबड़ी रोड पर शराब बेचने को लेकर नितिन की हत्या
- 2020 के अक्तूबर में छाजपुर गांव में हत्या
- रंगदारी की वजह से टोका उद्योग सिमटा-
समालखा का टोका उद्योग देश में प्रसिद्ध था। माफिया की नजर इस उद्योग पर पड़ी। वे उद्यमियों से रंगदारी मांगने लगे। उद्यमियों ने भयभीत होकर धंधा समेटना शुरू कर दिया। वर्ष 2000 तक टोका उद्योग 100 से सिमट कर महस 25 फैक्टरियों तक रह गया। इस क्षेत्र में गैंगस्टर दिनेश चुलकाना, सोनू मालपुरिया, राजेश मालपुरिया और जगबीर आट्टा का दखल रहा है।
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- जेल से भी गैंग ऑपरेट करने की बात आई सामने
सिवाह के गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू के जेल से ही गैंग को ऑपरेट करने की बात सामने आई है। वह जेल से ही वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड कर चुका है। लंबू का नाम लेकर शराब ठेकेदार को पीटने और धमकाने के मामले में उसके दो गुर्गों को पुलिस गिरफ्तार भी कर चुकी है। इन मामलों की जांच सीआईए-टू कर रही है। शराब ठेकेदार अजीत के भाई सुरेंद्र ने लंबू के विकास नाम के आरोपी से बातचीत की वीडियो भी पुलिस को सौंपी है। आरोप है कि गैंगस्टर लंबू जेल से जमानत पर आने वाले गुर्गों के माध्यम से वारदातों को अंजाम देता है।