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हानीपत: शहर की संपत्तियों पर निगम का 415 करोड़ रुपये बकाया, रिकवरी सिर्फ 1र1 करोड़ की
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पानीपत। नगर निगम पर आमदनी उठन्नी और खर्चा रुपया वाली बात चरितार्थ हो रही है। निगम का खजाना खाली होता जा रहा है, लेकिन अफसरों और नेताओं के पास इसे भरने की कोई कारगर योजना नहीं है। न ही इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम उठाए गए। शहर की संपत्तियों से नगर निगम को अब भी करीब 415 करोड़ रुपये का टैक्स वसूलना है। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, फायर टैक्स, पिछले 10 साल का एरिअर और ब्याज शामिल है, लेकिन अब तक निगम केवल 11 करोड़ की ही रिकवरी कर पाया है। हैरानी की बात यह है कि पिछले पौने चार वर्षों में शहर की सरकार एक बार भी निगम की फाइनेंशियल कमेटी की बैठक नहीं कर पाई है। अब तक केवल एक बार इस बैठक को बुलाया गया था, लेकिन मेयर और पूर्व मेयर के हंगामे के चलते बैठक स्थगित कर दी गई।
अपने ट्रांसफर से एक दिन पहले सिर्फ निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने निगम के खाली खजाने को भरने के लिए अफसरों के साथ बैठक कर 400 करोड़ की रिकवरी का प्लान बनाया था। उनके ट्रांसफर के बाद नव नियुक्त आयुक्त ने अब तक निगम ज्वाइन नहीं किया है। इसलिए अधिकारियों के पास भी इस ओर कदम उठाने की क्षमता नहीं है। दूसरी ओर शहर की सरकार भी हाथ पर हाथ धरे खाली बैठी है। अगर यह हाल रहा तो निगम में जल्द विकास कार्य तो दूर कर्मचारियों की तनख्वाह देने तक के लाले पड़े जाएंगे। सीएम मनोहर लाल स्पष्ट कर चुके हैं कि वे निगम को बजट नहीं देंगे। निगम इंडिपेंडेंट बॉडी है, जिसे खुद कमा कर खुद खर्च करना होगा।
...
ऐसे समझें 415 करोड़ टैक्स बकाये का आंकड़ा :
- निगम क्षेत्र में याशी सर्वे के मुताबिक 1.73 लाख सपंत्तियां हैं, जबकि जीआईएस सर्वे के अनुसार 1.45 लाख संपत्तियां हैं।
- निगम ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में 24.55 करोड़ की प्रॉपर्टी टैक्स डिमांड बनाई थी। इसमें से अब तक 11 करोड़ की रिकवरी हुई है।
- नगर निगम का शहर की संपत्तियों पर 2.03 करोड़ रुपये फॉयर टैक्स और 15.99 करोड़ इस टैक्स का एरिअर बकाया है।
- शहर की संपत्तियों पर 236.59 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स एरिअर और इनके ऊपर 135.67 करोड़ रुपये का ब्याज बनता है।
वर्जन-
हालात चिंताजनक, खोजेंगे विकल्प : भट्ट
शहर के लिए हालात चिंताजनक बन चुके हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। जल्द ही सकारात्मक परिणाम के लिए विकल्प खोजे जाएंगे।
- दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, उपाध्यक्ष फाइनेंस कमेटी।
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अपने ट्रांसफर से एक दिन पहले सिर्फ निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने निगम के खाली खजाने को भरने के लिए अफसरों के साथ बैठक कर 400 करोड़ की रिकवरी का प्लान बनाया था। उनके ट्रांसफर के बाद नव नियुक्त आयुक्त ने अब तक निगम ज्वाइन नहीं किया है। इसलिए अधिकारियों के पास भी इस ओर कदम उठाने की क्षमता नहीं है। दूसरी ओर शहर की सरकार भी हाथ पर हाथ धरे खाली बैठी है। अगर यह हाल रहा तो निगम में जल्द विकास कार्य तो दूर कर्मचारियों की तनख्वाह देने तक के लाले पड़े जाएंगे। सीएम मनोहर लाल स्पष्ट कर चुके हैं कि वे निगम को बजट नहीं देंगे। निगम इंडिपेंडेंट बॉडी है, जिसे खुद कमा कर खुद खर्च करना होगा।
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ऐसे समझें 415 करोड़ टैक्स बकाये का आंकड़ा :
- निगम क्षेत्र में याशी सर्वे के मुताबिक 1.73 लाख सपंत्तियां हैं, जबकि जीआईएस सर्वे के अनुसार 1.45 लाख संपत्तियां हैं।
- निगम ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में 24.55 करोड़ की प्रॉपर्टी टैक्स डिमांड बनाई थी। इसमें से अब तक 11 करोड़ की रिकवरी हुई है।
- नगर निगम का शहर की संपत्तियों पर 2.03 करोड़ रुपये फॉयर टैक्स और 15.99 करोड़ इस टैक्स का एरिअर बकाया है।
- शहर की संपत्तियों पर 236.59 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स एरिअर और इनके ऊपर 135.67 करोड़ रुपये का ब्याज बनता है।
वर्जन-
हालात चिंताजनक, खोजेंगे विकल्प : भट्ट
शहर के लिए हालात चिंताजनक बन चुके हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। जल्द ही सकारात्मक परिणाम के लिए विकल्प खोजे जाएंगे।
- दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, उपाध्यक्ष फाइनेंस कमेटी।