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Panipat News: ठंड की उद्योगों पर मार, ड्रायर से सूख रहे कंबल, लागत बढ़ी
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पानीपत। पिछले एक सप्ताह से तापमान में कमी आई। ठंड ने जन जीवन को प्रभावित किया। 26 दिसंबर के बाद से धूप नहीं निकली है। इसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ रहा है। दिन भर बादल छाए रहने से धागा और पोलर कंबल उद्यमियों के लिए परेशानियां बढ़ गई हैं। डाइंग के बाद माल सूख नहीं रख रहा है। धागा समय पर न सूखने से कपड़ा उत्पादन लगभग ठप हो गया है।
उद्यमी माल तैयार कर समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में ऑर्डर कैंसल होने की भी चिंता बनी हुई है। उद्यमी समय पर बायलर को माल नहीं दे पा रहे हैं। धूप न निकलने से कंबल सूख नहीं पा रहा। उद्यमी कपड़े को ड्रायर में सुखाते हैं तो लागत 10 प्रतिशत बढ़ रही है। ये उद्यमियों पर भारी पड़ रही है। मौसम का असर काॅटन यार्न के उत्पादन पर पड़ा है। काॅटन यार्न मिलों में धागा ब्रेक कांबर से बनाया जाता है। सूखा कांबर उपलब्ध न होने से धागे का उत्पादन आधा रह गया है। मांग बराबर चल रही है। आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के कारण भाव में एक रुपया प्रति किलो की तेजी चल रही है। जिले में 500 से अधिक डाइंग यूनिट, 350 धागा उद्योग व 70 पोलर कंबल उद्योग हैं । सभी उद्योग एक दूसरे से जुड़े हैं। खराब मौसम के कारण धागे में भी नमी है। इसलिए कपड़ा बनाने में परेशानी हो रही है। डाइंग के बाद कपड़ा नहीं सूख रहा है। पोलर कंबल की मांग बराबर चल रही है लेकिन गीला होने से समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। मंगलवार को धूप निकली तो उद्यमियों के चेहरे पर खुशी लौटी। उद्यमियों ने खाली पड़े प्लॉटों में कंबल व धागा सुखाया है।
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उद्यमी माल तैयार कर समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में ऑर्डर कैंसल होने की भी चिंता बनी हुई है। उद्यमी समय पर बायलर को माल नहीं दे पा रहे हैं। धूप न निकलने से कंबल सूख नहीं पा रहा। उद्यमी कपड़े को ड्रायर में सुखाते हैं तो लागत 10 प्रतिशत बढ़ रही है। ये उद्यमियों पर भारी पड़ रही है। मौसम का असर काॅटन यार्न के उत्पादन पर पड़ा है। काॅटन यार्न मिलों में धागा ब्रेक कांबर से बनाया जाता है। सूखा कांबर उपलब्ध न होने से धागे का उत्पादन आधा रह गया है। मांग बराबर चल रही है। आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के कारण भाव में एक रुपया प्रति किलो की तेजी चल रही है। जिले में 500 से अधिक डाइंग यूनिट, 350 धागा उद्योग व 70 पोलर कंबल उद्योग हैं । सभी उद्योग एक दूसरे से जुड़े हैं। खराब मौसम के कारण धागे में भी नमी है। इसलिए कपड़ा बनाने में परेशानी हो रही है। डाइंग के बाद कपड़ा नहीं सूख रहा है। पोलर कंबल की मांग बराबर चल रही है लेकिन गीला होने से समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। मंगलवार को धूप निकली तो उद्यमियों के चेहरे पर खुशी लौटी। उद्यमियों ने खाली पड़े प्लॉटों में कंबल व धागा सुखाया है।
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