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रेफर करने के मामले में डॉक्टरों को क्लीन चिट
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पानीपत। सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने के मामले में डॉक्टरों और एंबुलेंस चालकों को क्लीन चिट मिल गई है। कमेटी ने डॉक्टरों व एंबुलेंस चालकों को इस मामले में निर्दोष माना है।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों का इलाज या तो सिविल अस्पताल में ही किया जाता है या फिर डॉक्टर उन्हें खानपुर मेडिकल कॉलेज या रोहतक पीजीआई रेफर करते हैं। डॉक्टरों मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर नहीं करते। कहीं भी रिकॉर्ड में ये नहीं मिला है कि मरीजों को किसी निजी अस्पताल में रेफर किया गया हो। मरीज अपनी मर्जी से स्वयं निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस चालक भी मरीजों को निजी अस्पतालों में लेकर नहीं जाते।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन सुनेजा, एमएसओ डॉ. श्यामलाल महाजन व डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया की कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर को दे दी है। उन्होंने डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय में भिजवा दी है।
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इन जांचों में भी मिल चुकी है डॉक्टरों को क्लीन चिट
पिछले साल कोरोना के रोगी की डेडबॉडी 15 दिन तक शवगृह में रखी रही थी। इस मामले की जांच कमेटी से कराई थी। कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट में कहा कि इसमें डॉक्टर की गलती नहीं है। ये सब मिस अंडरस्टेंडिंग से हुआ है।
लेबर वार्ड में मरीजों के परिजनों से बधाई मांगने के मामले में भी कमेटी ने जांच की। जांच में कमेटी ने स्टाफ नर्सों व वहां के स्टाफ को फटकार लगाकर छोड़ दिया था। रिपोर्ट में कहा गया कि लोगों से बधाई मांगने जैसे कोई सबूत नहीं मिले।
एंबुलेंस चालक का आरोप था कि फ्लीट मैनेजर कंडम एंबुलेंस में पेट्रोल भरा दिखा रहे हैं, इसमें कई डॉक्टर भी शामिल हैं। इस मामले की जांच डिप्टी सिविल सर्जन ने की। उन्होंने जांच के बाद मैनेजर को क्लीन चिट दे दी।
अस्पताल में एलटी, फार्मासिस्ट समेत 63 पदों पर भर्ती के मामले में डॉक्टरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। आरोप था कि डॉक्टरों ने अपने चहेतों को गलत तरीके से भर्ती किया। इस मामले की जांच सिटी मैजिस्ट्रेट से भी कराई गई। उन्होंने भी भर्ती को गलत माना लेकिन तत्कालीन सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों को बेकसूर बताते हुए कहा कि भर्ती निष्पक्ष हुई है।
हमने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की
निजी अस्पतालों में मरीज रेफर करने के मामले की कमेटी ने निष्पक्ष जांच की है। मरीजों के परिजनों से भी पूछताछ की गई रिकॉर्ड खंगाला गया और डॉक्टरों से भी पूछताछ हुई। मरीजों के परिजन अपनी मर्जी से मरीजों को निजी अस्पतालों में लेकर जाते हैं। इसमें डॉक्टरों का कोई कसूर नहीं है। उन्होंने रिपोर्ट पीएमओ को सौंप दी है। - डॉ. श्यामलाल महाजन, एसएमओ सिविल अस्पताल
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कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों का इलाज या तो सिविल अस्पताल में ही किया जाता है या फिर डॉक्टर उन्हें खानपुर मेडिकल कॉलेज या रोहतक पीजीआई रेफर करते हैं। डॉक्टरों मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर नहीं करते। कहीं भी रिकॉर्ड में ये नहीं मिला है कि मरीजों को किसी निजी अस्पताल में रेफर किया गया हो। मरीज अपनी मर्जी से स्वयं निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस चालक भी मरीजों को निजी अस्पतालों में लेकर नहीं जाते।
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डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन सुनेजा, एमएसओ डॉ. श्यामलाल महाजन व डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया की कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर को दे दी है। उन्होंने डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय में भिजवा दी है।
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इन जांचों में भी मिल चुकी है डॉक्टरों को क्लीन चिट
पिछले साल कोरोना के रोगी की डेडबॉडी 15 दिन तक शवगृह में रखी रही थी। इस मामले की जांच कमेटी से कराई थी। कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट में कहा कि इसमें डॉक्टर की गलती नहीं है। ये सब मिस अंडरस्टेंडिंग से हुआ है।
लेबर वार्ड में मरीजों के परिजनों से बधाई मांगने के मामले में भी कमेटी ने जांच की। जांच में कमेटी ने स्टाफ नर्सों व वहां के स्टाफ को फटकार लगाकर छोड़ दिया था। रिपोर्ट में कहा गया कि लोगों से बधाई मांगने जैसे कोई सबूत नहीं मिले।
एंबुलेंस चालक का आरोप था कि फ्लीट मैनेजर कंडम एंबुलेंस में पेट्रोल भरा दिखा रहे हैं, इसमें कई डॉक्टर भी शामिल हैं। इस मामले की जांच डिप्टी सिविल सर्जन ने की। उन्होंने जांच के बाद मैनेजर को क्लीन चिट दे दी।
अस्पताल में एलटी, फार्मासिस्ट समेत 63 पदों पर भर्ती के मामले में डॉक्टरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। आरोप था कि डॉक्टरों ने अपने चहेतों को गलत तरीके से भर्ती किया। इस मामले की जांच सिटी मैजिस्ट्रेट से भी कराई गई। उन्होंने भी भर्ती को गलत माना लेकिन तत्कालीन सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों को बेकसूर बताते हुए कहा कि भर्ती निष्पक्ष हुई है।
हमने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की
निजी अस्पतालों में मरीज रेफर करने के मामले की कमेटी ने निष्पक्ष जांच की है। मरीजों के परिजनों से भी पूछताछ की गई रिकॉर्ड खंगाला गया और डॉक्टरों से भी पूछताछ हुई। मरीजों के परिजन अपनी मर्जी से मरीजों को निजी अस्पतालों में लेकर जाते हैं। इसमें डॉक्टरों का कोई कसूर नहीं है। उन्होंने रिपोर्ट पीएमओ को सौंप दी है। - डॉ. श्यामलाल महाजन, एसएमओ सिविल अस्पताल