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भूजल निकालने की एनओसी के लिए अप्लाई नहीं करने वाले उद्यमियों का डाटा तैयार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 13 Oct 2019 01:58 AM IST
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पानीपत। भूजल के लिए एनओसी लेने की अंतिम तिथि जा चुकी है। एनओसी के लिए पानीपत के 520 उद्योगों ने 30 सितंबर तक ऑनलाइन अप्लाई किया है। अब भी 150 उद्यमियों ने एनओसी के लिए अप्लाई नहीं किया है। इन उद्योगों की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिस्ट तैयार कर ली है। आरओ इस लिस्ट को इसी सप्ताह में दिल्ली में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के समक्ष पेश करेंगे। इसके बाद इन फैक्टिरियों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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टेक्सटाइल और कॉटन कंपनी अनुमति लेने में सबसे अधिक
अनुमति लेने के लिए करीब 80 प्रतिशत टेक्सटाइल इंडस्ट्री की तरफ से आवेदन किया गया है। इसके बाद कॉटन और राइस मिल मालिकों ने अनुमति मांगी है। सीपीसीबी ने शिकायत के आधार पर पानीपत की 55 इंडस्ट्री के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यहां 500 से अधिक डाइंग यूनिट है जो अवैध रूप से भूमिगत जल का दोहन कर रहे थे। सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच के भी निर्देश दिए हैं। अगर पानी की क्वालिटी खराब मिली तो ट्यूबवैल को सील कर दिया जाएगा।
135 इंडस्ट्री को क्लोजर नोटिस जारी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड इन दिनों जल दोहन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक करीब 135 इंडस्ट्री को खामियां मिलने पर क्लोजर नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से 30 प्रतिशत इंडस्ट्री पर अनुमति के बिना जल दोहन के तहत कार्रवाई की गई है। अब एनओसी लेने के लिए मात्र 18 दिन बचे हैं। 30 सितंबर तक उद्यमी ऑनलाइन एनओसी के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके बाद उद्यमियों को हर रोज 5 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। अब उद्यमियों का कहना है कि वो एनओसी के लिए अप्लाई कर रहे हैं उनको पहले इस तरह की अनुमति लेने की जानकारी नहीं थी।
रियल एस्टेट और कई बड़ी कंपनी अभी बाकी
पानीपत में करीब 20 हजार छोटी-बड़ी इंडस्ट्री हैं। अब तक सात इंडस्ट्री व रियल एस्टेट कंपनी जल दोहन की अनुमति से चल रही हैं। बड़ी संख्या में इंडस्ट्री अवैध रूप से पानी का दोहन कर रही हैं। सबसे हैरान करने वाला विषय रियल एस्टेट कंपनियों की अनुमति नहीं लेना है। अब तक केवल एक ही कंपनी एनओसी ले पाई है।
500 से अधिक यूनिट निकाल रही बिना परमिशन के भूजल
दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 55 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यहां 500 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही है। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया था।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल-
सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वालिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए।
पानी में मिल चुका है साइनाइड-
2018 में केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने पानीपत के पानी को बताया था पीने के लिए अयोग्य
केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने पानीपत में अलग अलग जगह से पानी के सैंपल लिए थे। सैंपल की लैब में जांच हुई। शहर के पानी में कई स्थानों पर साइनाइड की मात्रा 0.3 प्रतिशत मिली जोकि स्वास्थ्य के लिए घातक है। इस पर प्राधिकरण ने चिंता जाहिर करते हुए भूमिगत जल का खराब करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए थे।
10 साल में 5 डीसी आए, किसी ने नहीं दिया भू-जल स्तर पर ध्यान
पिछले 10 साल में पानीपत का भू-जल स्तर 10 फीट तक नीचे गिर गया। पानीपत की औद्योगिक इकाइयों, अवैध रूप से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लगे ट्यूबवेल लगातार भूमिगत जल का दोहन करते रहे। 10 साल में 5 डीसी पानीपत में आए, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 10 साल पहले तक भूजल प्राधिकरण भी सक्रिय नहीं था। इस कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। आरोप ये भी है कि उद्योगपतियों की राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलीभगत होती थी, इसलिए औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषित पानी सीधा भूमिगत जल पर छोड़ने पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए पिछले दो साल से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही पानीपत में उद्योगों में छापेमारी कर कार्रवाई करता आया है।
एनओसी के लिए आवेदन किया गया था सरल
उद्यमियों की मांग को देखते हुए सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने एनओसी का आवेदन को सरल किया है। औपचारिकताएं कम की गई थी। आवेदन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कंसेंट, रेन हार्वेस्टिग डिजाइन की प्रति, अथॉगिरटी लेटर, पानी वितरित नहीं कर रहे का सर्टिफिकेट ही देना अनिवार्य किया था। यदि वाहिट कैटेगरी में यूनिट आता है तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट के स्थान पर छूट का पत्र लेना सुनिश्चित किया था।
अधिकतर ने किया है अप्लाई- राणा
भू जल प्राधिकरण ने एनओसी की प्रक्रिया सरल कर दी थी। 30 सितंबर तक इसके लिए अप्लाई करना था। अधिकतर उद्योगों ने इसके लिए अप्लाई कर दिया है। एनओसी अप्लाई के लिए पर्याप्त समय दिया था।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
केंद्र से जैसे निर्देाश मिलेंगे कार्रवाई होगी- संजीव
एनओसी अप्लाई के लिए अंतिम तिथि जा चुकी है । अब जिन्होंने अप्लाई नहीं किया है उन पर क्या एक्शन लेना है जो भी इसके लिए निर्देश आएंगे वो कार्रवाई कर देंगे।
संजीव बुद्घिराजा, आरओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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