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शहर का प्रदूषण स्तर ग्रीन जोन में, एक्यूआई 76
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पानीपत। सितंबर 2021 के बाद इस साल जनवरी में लगातार पांच दिन से पानीपत का प्रदूषण स्तर ग्रीन जोन में है। मंगलवार को पानीपत का एक्यूूआई 76 दर्ज किया गया। शहर की हवा फिलहाल स्वास्थ्य के लिए ठीक चल रही है। इससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी संतुष्ट है।
माना जा रहा है कि पानीपत के बेहतर प्रदूषण स्तर का काम एनसीआर में ग्रैप का लागू होना भी है। एनजीटी ने उद्योगों में फिलहाल जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध लगाया है। नाइट कर्फ्यू के कारण वाहनों का आवागमन भी कम है। यह भी पानीपत के प्रदूषण स्तर का ग्रीन जोन में आने का कारण माना जा रहा है।
पर्यावरण मामलों के एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि चार दिन में शहर में बूंदाबांदी हुई है। इससे स्मॉग की परत टूटी है। बरसात में धूल के कण बह गए हैं। 10 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चल रही है। इससे धूल के कण व धुआं जमीन से ऊपर उठ गया है। इसलिए प्रदूषण स्तर में काफी सुधार हुआ है। जनवरी माह में प्रदूषण स्तर में काफी सुधार रहने की उम्मीद है।
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एक शिफ्ट में चल रहे हैं उद्योग
उद्योग पिछले एक माह से एक शिफ्ट में चल रहे हैं। अधिकतर उद्योगों में रात को उत्पादन बंद पड़ा है। प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग करने वालों पर प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर रहा है। इसलिए उद्योगों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला धुआं नहीं निकल रहा है। एनजीटी ने उद्योगों में फिलहाल जेनरेटर सेट भी बंद किए हैं। यह भी प्रदूषण स्तर में सुधार आने का बड़ा कारण है।
पिछले पांच दिन का एक्यूआई
7 जनवरी- 99
8 जनवरी- 96
9 जनवरी- 55
10 जनवरी- 77
11 जनवरी- 76
हवा व बरसात से भी टूटी प्रदूषण की परत
ग्रैप के तहत फिलहाल उद्योगों में जनरेटर सेट बंद हैं। प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। ये भी प्रदूषण स्तर में गिरावट आने का कारण है। हवा व बरसात से भी प्रदूषण की परत टूटी है। पिछले पांच दिन से पानीपत का प्रदूषण स्तर ग्रीन जोन में है।
कमलजीत सैनी, रिजनल ऑफिसर, एचएसपीसीबी
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माना जा रहा है कि पानीपत के बेहतर प्रदूषण स्तर का काम एनसीआर में ग्रैप का लागू होना भी है। एनजीटी ने उद्योगों में फिलहाल जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध लगाया है। नाइट कर्फ्यू के कारण वाहनों का आवागमन भी कम है। यह भी पानीपत के प्रदूषण स्तर का ग्रीन जोन में आने का कारण माना जा रहा है।
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पर्यावरण मामलों के एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि चार दिन में शहर में बूंदाबांदी हुई है। इससे स्मॉग की परत टूटी है। बरसात में धूल के कण बह गए हैं। 10 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चल रही है। इससे धूल के कण व धुआं जमीन से ऊपर उठ गया है। इसलिए प्रदूषण स्तर में काफी सुधार हुआ है। जनवरी माह में प्रदूषण स्तर में काफी सुधार रहने की उम्मीद है।
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एक शिफ्ट में चल रहे हैं उद्योग
उद्योग पिछले एक माह से एक शिफ्ट में चल रहे हैं। अधिकतर उद्योगों में रात को उत्पादन बंद पड़ा है। प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग करने वालों पर प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर रहा है। इसलिए उद्योगों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला धुआं नहीं निकल रहा है। एनजीटी ने उद्योगों में फिलहाल जेनरेटर सेट भी बंद किए हैं। यह भी प्रदूषण स्तर में सुधार आने का बड़ा कारण है।
पिछले पांच दिन का एक्यूआई
7 जनवरी- 99
8 जनवरी- 96
9 जनवरी- 55
10 जनवरी- 77
11 जनवरी- 76
हवा व बरसात से भी टूटी प्रदूषण की परत
ग्रैप के तहत फिलहाल उद्योगों में जनरेटर सेट बंद हैं। प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। ये भी प्रदूषण स्तर में गिरावट आने का कारण है। हवा व बरसात से भी प्रदूषण की परत टूटी है। पिछले पांच दिन से पानीपत का प्रदूषण स्तर ग्रीन जोन में है।
कमलजीत सैनी, रिजनल ऑफिसर, एचएसपीसीबी