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Panipat News: संतों के प्रवचनों और श्याम बाबा के जयकारों से गूंजा चुलकाना धाम
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पानीपत/समालखा। श्री श्याम बाबा मंदिर के कपाट जैसे ही बुधवार तड़के करीब तीन बजे दर्शनों के लिए खोले तो भक्त बाबा के जयकारे लगाते हुए दर्शनों को पहुंचने लगे। दिन चढ़ने के साथ श्याम भक्तों का रेला भी पहुंचने लगा। भक्त टोलियों में बाबा के जयकारे लगाते हुए श्याम के दर पहुंचे। पानीपत और आसपास के जिलों के अलावा पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व दिल्ली से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। उनके वाहनों को समालखा अनाज मंडी और चुलकाना की तीन से पांच किलोमीटर बाहर बनाई पार्किंग में रोका गया। यहां से भक्त श्याम बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे पहुंचे।
श्री श्याम मंदिर चुलकाना में पहली बार श्री श्याम फाल्गुनी महोत्सव मनाया गया। इससे पहले यहां मंदिर प्रबंधन के स्तर पर फाल्गुन महोत्सव मनाया जाता था। इस बार शहर की सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं ने आगे आकर महोत्सव मनाने का फैसला लिया। 21 जनवरी की श्रीराम शोभायात्रा की तर्ज पर श्रीश्याम शोभायात्रा पानीपत से चुलकाना धाम पहुंची। श्याम प्रेमी इसको खींचकर पहुंचे। श्याम के भजनों पर रथ मंदिर में लाया गया। इस दौरान भक्तों ने श्याम रथ के दर्शन किए। इस रथ को मंदिर प्रबंधन को भेंट किया जाएगा। सांसद संजय भाटिया ने इनकी अगुवाई की।
संतों ने दिया आशीर्वाद
गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज व स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज समेत 101 संत महोत्सव में पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महोत्सव में शामिल नहीं हो पाए। गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति सबसे हटकर है। इसी धरा पर भगवान समय-समय पर प्रकट हुए और मानवता का कल्याण किया। विश्व के कई देश आज भारतीय सभ्यता और संस्कृति को अपनाया जा रहा है। हमें इसको अपनाना है। उन्होंने कहा कि श्रीश्याम बाबा धाम चुलकाना का अलग महत्व है। इनको हारे का सहारा कहा जाता है।
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मनोहर लाल बोले : पीएम के सामने रखी थी शर्त
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि उनको भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार उनकी जिम्मेदारी बदलते हुए करनाल लोकसभा से चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने सांसद संजय भाटिया की सहमति पर ही चुनाव लड़ने की शर्त रखी थी। संजय भाटिया ने अपनी सहमति दी। यह सब सादगी को दर्शाता है।
राजनीति के क्षेत्र में कोई व्यक्ति मौका नहीं छोड़ता। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक राजस्थान के खाटू धाम के बारे में बहुत सुना था। चुलकाना धाम में आने के बाद मन के भाव बदल गए हैं। यहां सब कुछ समर्पित कर दिया है। संतों का समाज की मजबूती में विशेष योगदान है।
पैदल ही बाबा के दर पहुंचे भक्त
पुलिस और प्रशासन के इस बार सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध रहे। पानीपत से आने वाली यात्राओं के वाहनों और डीजे को समालखा अनाज मंडी में रोका गया। यहां से भक्त पैदल ही बाबा के दर पहुंचे। सोनीपत की तरफ से आने वाले भक्तों को पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना केंद्र की पार्किंग में वाहनों को रोका गया। चुलकाना आने वाले सातों रास्तों पर पूरा दिन भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। बुधवार देर रात को भी पैदल यात्राओं का आना जारी रहा।
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श्री श्याम मंदिर चुलकाना में पहली बार श्री श्याम फाल्गुनी महोत्सव मनाया गया। इससे पहले यहां मंदिर प्रबंधन के स्तर पर फाल्गुन महोत्सव मनाया जाता था। इस बार शहर की सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं ने आगे आकर महोत्सव मनाने का फैसला लिया। 21 जनवरी की श्रीराम शोभायात्रा की तर्ज पर श्रीश्याम शोभायात्रा पानीपत से चुलकाना धाम पहुंची। श्याम प्रेमी इसको खींचकर पहुंचे। श्याम के भजनों पर रथ मंदिर में लाया गया। इस दौरान भक्तों ने श्याम रथ के दर्शन किए। इस रथ को मंदिर प्रबंधन को भेंट किया जाएगा। सांसद संजय भाटिया ने इनकी अगुवाई की।
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संतों ने दिया आशीर्वाद
गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज व स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज समेत 101 संत महोत्सव में पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महोत्सव में शामिल नहीं हो पाए। गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति सबसे हटकर है। इसी धरा पर भगवान समय-समय पर प्रकट हुए और मानवता का कल्याण किया। विश्व के कई देश आज भारतीय सभ्यता और संस्कृति को अपनाया जा रहा है। हमें इसको अपनाना है। उन्होंने कहा कि श्रीश्याम बाबा धाम चुलकाना का अलग महत्व है। इनको हारे का सहारा कहा जाता है।
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मनोहर लाल बोले : पीएम के सामने रखी थी शर्त
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि उनको भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार उनकी जिम्मेदारी बदलते हुए करनाल लोकसभा से चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने सांसद संजय भाटिया की सहमति पर ही चुनाव लड़ने की शर्त रखी थी। संजय भाटिया ने अपनी सहमति दी। यह सब सादगी को दर्शाता है।
राजनीति के क्षेत्र में कोई व्यक्ति मौका नहीं छोड़ता। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक राजस्थान के खाटू धाम के बारे में बहुत सुना था। चुलकाना धाम में आने के बाद मन के भाव बदल गए हैं। यहां सब कुछ समर्पित कर दिया है। संतों का समाज की मजबूती में विशेष योगदान है।
पैदल ही बाबा के दर पहुंचे भक्त
पुलिस और प्रशासन के इस बार सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध रहे। पानीपत से आने वाली यात्राओं के वाहनों और डीजे को समालखा अनाज मंडी में रोका गया। यहां से भक्त पैदल ही बाबा के दर पहुंचे। सोनीपत की तरफ से आने वाले भक्तों को पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना केंद्र की पार्किंग में वाहनों को रोका गया। चुलकाना आने वाले सातों रास्तों पर पूरा दिन भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। बुधवार देर रात को भी पैदल यात्राओं का आना जारी रहा।