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Panipat News: शहरी निकाय विभाग के चीफ विजिलेंस ऑफिसर तलब
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पानीपत। प्रॉपर्टी आईडी सर्वे घोटाले में 12 आईएएस व याशी कंपनी को अपनी जांच में क्लीन चिट देने वाले शहरी स्थानीय निकाय विभाग के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) को लोकायुक्त ने तलब किया है। उनको 11 सितंबर को केस की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि लोकायुक्त में शिकायत होने पर 12 सितंबर 2023 को सरकार ने याशी कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया और करीब चार करोड़ रुपये की पेमेंट रोक दी थी। इसके बाद चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने कंपनी को क्लीन चिट दे दी थी। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि लोकायुक्त कोर्ट में पिछले वर्ष 19 जुलाई 2023 को आरटीआई दस्तावेजों सहित लिखित शिकायत दी थी। जिसमें 12 आईएएस अधिकारियों व सर्वे करने वाली याशी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि याशी कंपनी के सर्वे में बड़ा घोटाला हुआ है। इस सर्वे की बिना फिजिकल वेरिफिकेशन अधिकारियों ने साइन ऑफ सर्टिफिकेट जारी कर याशी कंपनी को करीब 63 करोड़ रुपये की पेमेंट करा दी, जबकि सर्वे बिल्कुल बोगस होने व इसमें भारी त्रुटियां होने के कारण आज तक लोग धक्के खा रहे हैं।
लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा ने शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो से प्राथमिक जांच रिपोर्ट लेने के बाद शहरी निकाय विभाग के प्रधान सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। इस पर छह मई 2024 को अपनी जांच रिपोर्ट में निकाय विभाग के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) जेएस बोपाराय ने याशी कंपनी सहित सभी आईएएस अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। शिकायतकर्ता पीपी कपूर ने सीवीओ की इस जांच रिपोर्ट को गलत बताया और लिखित तौर पर चुनौती दी। इसे रद्द कर घोटाले की एंटी करप्शन ब्यूरो से विस्तृत जांच कराने की मांग की। लोकायुक्त ने निकाय विभाग की सीवीओ जेएस बोपाराय को तलब किया है।
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याशी कंपनी को क्लीनचिट देने का आरोप
पीपी कपूर ने बताया कि सीवीओ की जांच रिपोर्ट अनुसार सभी 88 शहरों में 42,70,449 संपत्ति सर्वे किया। इनमें से करीब आधी संपत्ति यानी 21.35 लाख संपत्तियां तो खाली प्लॉट, निर्माणाधीन या बंद पड़े भवन थे, फिर भी अधिकारियों ने याशी कंपनी को इन सबका भुगतान कर दिया। सर्वे कंपनी को भुगतान करने से पहले सभी संपत्तियों के 10वें हिस्से की फिजिकल वेरिफिकेशन की जानी थी। प्रॉपर्टी आईडी सर्वे का डाटा 16 नवंबर 2022 को एनडीसी पोर्टल पर ऑनलाइन करने से 21 मार्च 2023 तक 15 माह में 8,02,480 संपत्ति मालिकों ने 18,74,676 आपत्तियां दर्ज कराई। यानी हर महीने औसतन 52,523 संपत्ति मालिकों ने करीब 1.25 लाख आपत्ति दर्ज कराई। ऐसे में लोग अब अपनी प्रॉपर्टी आईडी ठीक कराने को लेकर निकाय विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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गौरतलब है कि लोकायुक्त में शिकायत होने पर 12 सितंबर 2023 को सरकार ने याशी कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया और करीब चार करोड़ रुपये की पेमेंट रोक दी थी। इसके बाद चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने कंपनी को क्लीन चिट दे दी थी। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि लोकायुक्त कोर्ट में पिछले वर्ष 19 जुलाई 2023 को आरटीआई दस्तावेजों सहित लिखित शिकायत दी थी। जिसमें 12 आईएएस अधिकारियों व सर्वे करने वाली याशी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि याशी कंपनी के सर्वे में बड़ा घोटाला हुआ है। इस सर्वे की बिना फिजिकल वेरिफिकेशन अधिकारियों ने साइन ऑफ सर्टिफिकेट जारी कर याशी कंपनी को करीब 63 करोड़ रुपये की पेमेंट करा दी, जबकि सर्वे बिल्कुल बोगस होने व इसमें भारी त्रुटियां होने के कारण आज तक लोग धक्के खा रहे हैं।
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लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा ने शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो से प्राथमिक जांच रिपोर्ट लेने के बाद शहरी निकाय विभाग के प्रधान सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। इस पर छह मई 2024 को अपनी जांच रिपोर्ट में निकाय विभाग के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) जेएस बोपाराय ने याशी कंपनी सहित सभी आईएएस अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। शिकायतकर्ता पीपी कपूर ने सीवीओ की इस जांच रिपोर्ट को गलत बताया और लिखित तौर पर चुनौती दी। इसे रद्द कर घोटाले की एंटी करप्शन ब्यूरो से विस्तृत जांच कराने की मांग की। लोकायुक्त ने निकाय विभाग की सीवीओ जेएस बोपाराय को तलब किया है।
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याशी कंपनी को क्लीनचिट देने का आरोप
पीपी कपूर ने बताया कि सीवीओ की जांच रिपोर्ट अनुसार सभी 88 शहरों में 42,70,449 संपत्ति सर्वे किया। इनमें से करीब आधी संपत्ति यानी 21.35 लाख संपत्तियां तो खाली प्लॉट, निर्माणाधीन या बंद पड़े भवन थे, फिर भी अधिकारियों ने याशी कंपनी को इन सबका भुगतान कर दिया। सर्वे कंपनी को भुगतान करने से पहले सभी संपत्तियों के 10वें हिस्से की फिजिकल वेरिफिकेशन की जानी थी। प्रॉपर्टी आईडी सर्वे का डाटा 16 नवंबर 2022 को एनडीसी पोर्टल पर ऑनलाइन करने से 21 मार्च 2023 तक 15 माह में 8,02,480 संपत्ति मालिकों ने 18,74,676 आपत्तियां दर्ज कराई। यानी हर महीने औसतन 52,523 संपत्ति मालिकों ने करीब 1.25 लाख आपत्ति दर्ज कराई। ऐसे में लोग अब अपनी प्रॉपर्टी आईडी ठीक कराने को लेकर निकाय विभाग के चक्कर काट रहे हैं।