फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Chhathi fast is for 36 hours for the longevity of children and husband.

Panipat News: बच्चों और पति की दीर्घायु के लिए 36 घंटे है छठी व्रत

Fri, 24 Oct 2025 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Fri, 24 Oct 2025 01:40 AM IST
विज्ञापन
Chhathi fast is for 36 hours for the longevity of children and husband.
नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

पानीपत।पूर्वांचल समाज का छठ महापर्व पर बच्चों और पति की दीर्घायु के लिए 36 घंटे का निर्जला कठिन व्रत किया जाता है। यह आस्था के साथ-साथ निरोगी काया की मनोकामना के साथ किया जाता है। इस दौरान प्रकृति संरक्षण, प्रकृति की पूजा, सूर्य की आराधना की जाती है। इस साल छठ महापर्व 25 से 28 अक्तूबर तक किया जाएगा। 25 को नहाय खाए के साथ व्रत शुरू होगा और 28 को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। पूर्वांचल समाज की महिलाएं कई सौ किलोमीटर दूर दूसरे प्रदेश में आकर अपनी सभ्यता और संस्कृति को अपना रही हैं। यही नहीं साल दर साल व्रतियों की संख्या बढ़ रही है।
पूर्वांचल समाज में छठ का विशेष महत्व
मैं मूल रूप से बिहार के गोरखपुर की रहने वाली हूं। पिछले 20 साल से अपने पति के साथ विकास नगर में रह रही हूं। पूर्वांचल समाज में विवाहित महिला और पुरुष के जीवन में छठ पर्व का विशेष महत्व है। दिवाली के बाद इस पर्व के लिए साफ-सफाई शुरू हो जाती है। बिहार की तरह ही यहां भी मैं घर की साफ-सफाई करती हूं। चार दिवसीय पर्व में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है और छठ मैया से बच्चों और पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हूं।
विज्ञापन

नीलम सिंह, विकास नगर।
मनोकामना पूर्ति के लिए मैया से करते हैं प्रार्थना
मैं बिहार के सीतामढ़ी जिले की रहने वाली हूं। अब पिछले 13 साल से सेक्टर 13-17 में रह रही हूं। यहां भी छठ महापर्व धूमधाम से मनाती हूं। चार दिवसीय महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय में शाम को चावल, लौकी की दाल सेंधा नमक का प्रयोग कर बनाई जाती है। इस दौरान आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। दूसरे दिन खरना में शाम को पूरा दिन व्रत करने के बाद खीर-पूरी का सात्विक भोजन किया जाता है और 36 घंटे के व्रत का संकल्प लिया जाता है, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन सूर्योदय अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय नए फल-सब्जी, नारियल, केला छठ मैया को चढ़ाते हैं और पूजा कर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मैया से प्रार्थना करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुधा झा, बाल अधिकारी सुरक्षा समिति की मुख्य सलाहकार।
सहायता करने वाली भी होनी चाहिए व्रतधारी
मैं मूलरूप से पटना की रहने वाली हूं। अब पिछले 30 साल से हरिनगर में परिवार के साथ रह रही हूं। पूर्वांचल समाज में छठ महापर्व का विशेष महत्व और मान्यता है। इस व्रत को संतान प्राप्ति, संतान की दीर्घायु, परिवार की सुख-शांति के लिए किया जाता है। चार दिवसीय पर्व में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत के पहले दिन गेंहू जो व्रत के दिनों में प्रयोग होता है उसे धोया जाता है। जिस चक्की में उसे पीसा जाता है उसे भी धोकर ही प्रयोग किया जाता है। व्रत के दिनों में खाने बनवाने में सहायता करने वाली भी व्रतधारी ही होनी चाहिए।

पूनम रामदेव, हरिनगर।
पिछले छह साल से रख रही हूं छठ मैया का व्रत
मैं मूल रूप से बिहार के बक्सर जिले से हूं। यहां अपने पति कुमार चंदन के साथ 18 साल से सिद्धार्थ नगर में रह रही हूं। मैं पिछले छह साल से छठ मैया का व्रत रख रही हूं। इसमें बच्चों की दीर्घायु और परिवार में सुख समृद्धि की कामना करती हैं। यह दिन बेहद खास होता है। 36 घंटे के निर्जला व्रत की मान्यता है कि इसे करने से छठ मैया के आशीर्वाद से संतान सुख प्राप्त होता है और संतान की दीर्घायु होती है।
रोमा देवी, सिद्धार्थ नगर।

नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं

नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं

नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं

नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं

नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं

नीलम सिंह। स्रोत : स्वयं

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed