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Panipat News: छठ मैया ने भरी सुनी गोद, अब हर साल रखती हैं व्रत

Sat, 25 Oct 2025 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Sat, 25 Oct 2025 01:46 AM IST
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Chhath Maiya filled her lap with tears, now she observes the fast every year
रीना देवी। स्रोत : स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
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पानीपत। छठ मैया के आशीर्वाद से सुनी गोद भर जाती हैं और उनके आशीर्वाद से महिलाएं बच्चों की दीर्घायु के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत कर पाती हैं।छठ महापर्व का शुभारंभ शनिवार को नहाय-खाय से होगा। छठ महापर्व के लिए के लिए महिलाओं ने घरों की और पुरुषों ने घाटों की साफ-सफाई शुरू कर दी है। महापर्व के लिए पूर्वांचल समाज के लोगों ने तैयारी पूरी कर ली है।
छठ मैया ने भरी सुनी गोद, अब हर साल रखती हूं व्रत
मैं बिहार के गोपालगंज जिले की रहने वाली हूं। मेरा परिवार लगभग 30 साल से जाटल रोड के नजदीक रह रहा है। मेरी शादी को 11 साल हो चुके हैं। जब मेरी शादी हुई तब मैंने पांच साल तक छठ मैया का व्रत नहीं किया। पांच साल तक मेरी गोद सुनी रही। फिर अगले साल मैंने अपनी सास से बात कर छठ मैया का व्रत किया। मैया के आशीर्वाद से उससे अगली छठ व्रत से पहले मुझे बेटा हो गया था। मैया ने मेरी सुनी गोद भरी है। तब से आज तक मैं प्रत्येक साल मैया का व्रत नियमानुसार व आस्थापूर्वक करती हूं। किरन पटेल, जाटल रोड।
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मेरी सास निभा रही पंरपरा, पूरा परिवार करता है सहयोग
मैं मूलरूप से बिहार के मधुबनी की रहने वाली हूं। पिछले 20 साल से आजाद नगर में अपने पति व बच्चों के साथ रह रही हूं। हमारे परिवार में मान्यता है कि सास ही छठ मैया का व्रत करने के लिए कहती है जब तक नहीं कहती बहु व्रत नहीं करती है। अब तक मेरी सास इस पंरपरा को निभा रही है। जब चार दिवसीय पर्व शुरू होता है तो पूरा परिवार उनका सहयोग करता है।
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रीना देवी, आजाद नगर।
परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कर रही हूं व्रत
मैं बिहार के मधुबनी की रहने वाली हूं। पानीपत टीडीआई फरीदपुर में परिवार के साथ रह रही हूं। पिछले 40 साल से परिवार की सुख-समृद्धि व संतानों की दीर्घायु के लिए छठ मैया का व्रत कर रही हूं। मान्यता है कि सास अपनी बहू को छठ मैया का व्रत करने के लिए जब तक नहीं कहती है तब तक बहु व्रत न करके सास ही करती है। परिवार का एक सदस्य जरूर मैया का व्रत करता है।

मेम देवी, टीडीआई फरीदपुर पानीपत।
पूर्वांचल समाज में इस पर्व का है विशेष महत्व

मैं बिहार के दरभंगा की रहने वाली हूं। पिछले 16 साल से विकास नगर में रह रही हूं। मेरी शादी को 18 साल हो चुके हैं पहले मेरी सास इस परंपरा को निभा रही थी। छह साल पहले उन्होंने मुझे यह व्रत दिया है तब से मैं श्रद्धापूर्वक और पूरी आस्था से इस पर्व को मनाती हूं। पहले दिन घर, कपड़ों-बर्तनों की साफ-सफाई की जाती है और नहाय-खाय किया जाता है। शाम को चावल, लौकी की दाल का सात्विक भोजन किया जाता है। दूसरे दिन खरना होता है इसमें पूरा दिन व्रत कर शाम को गुड़ की खीर, पूरी का भोजन किया जाता है और 36 घंटे का व्रत का संकल्प लिया जाता है। 36 घंटे बाद चौथे दिन सूर्योदय अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। पूर्वांचल समाज में इस पर्व का विशेष महत्व है।
रीता सिंह, विकास नगर।

रीना देवी। स्रोत : स्वयं

रीना देवी। स्रोत : स्वयं

रीना देवी। स्रोत : स्वयं

रीना देवी। स्रोत : स्वयं

रीना देवी। स्रोत : स्वयं

रीना देवी। स्रोत : स्वयं

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