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Panipat News: फर्स्ट एड बॉक्स, फायर सेफ्टी की अनदेखी पर पांच स्कूल बसों के किए चालान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2024 06:09 AM IST
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Challan issued to five school buses for ignoring fire safety
समालखा। पुराना बस स्टैंड पर फ्लाईओवर के नीचे से आवागमन करने वाली स्कूल बसों का ट्रैफिक इंचार्ज रामकुमार ने निरीक्षण किया। जिसमें स्कूल बसों, कैब आदि में प्रयोग होने वाली गाड़ियों में उचित फिटनेस व बीमा प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी सिलिंडर, फर्स्ट एड बॉक्स, कैमरे आदि नियमानुसार जांच की। अनियमितताएं मिलने पर पांच बसों के चालान किए गए। ट्रैफिक इंचार्ज रामकुमार ने बताया कि स्कूल बसों पर प्रिंसिपल और यातायात प्रबंधक का नंबर लिखा होना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशानुसार सरकार द्वारा स्कूल-काॅलेज बसों के लिए जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के वाहन चालकों से आह्वान किया है कि वे निर्देशों के अनुसार वाहनों को निर्धारित गति पर ही चलाएं। स्कूल-कॉलेज वाहनों के ड्राइवरों और कंडक्टरों को यातायात नियमों का पूरा ध्यान रखना चाहिए। लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सड़क एवं वाहन दुर्घटना होने पर आपातकालीन सेवा के लिए टोल फ्री नंबर 112, 1073 पर तुरंत सूचित करेें।
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डीएसपी ट्रैफिक सुरेश कुमार ने कहा कि चालकों, परिचालकों सहित स्कूल के अन्य स्टाफ का वेरिफिकेशन के बाद ही उन्हें ड्यूटी पर रखें। नियमों में अगर कोई शिक्षण संस्थान कोताही बरतेगा तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्कूल-काॅलेज की प्रत्येक गाड़ी, बस या अन्य प्रकार के वाहन के पास मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 के अनुसार परमिट होना चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों में प्रयोग होने वाली गाडि़यों में उचित फिटनेस व बीमा प्रमाणपत्र होना आवश्यक है। ड्राइवर को कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य। ड्राइवर व कंडक्टर निर्धारित ड्रेस में होने चाहिए। उनकी नेम प्लेट वर्दी पर लगी होनी चाहिए। ड्राइवर व कंडक्टर को नियुक्त करते समय उन्हें सक्षम अधिकारी द्वारा जारी लाइसेंस जांच करने के बाद ही उनकी नियुक्ति की जानी चाहिए। निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। डीएसपी नरेंद्र कादियान ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के वाहनों में फर्स्ट एड बाक्स व अग्निशमन यंत्र होना चाहिए। बस में जितनी सीट हों उतने ही बच्चों को बिठाया जाना चाहिए। अगर बस चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
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