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Panipat News: सीबीएसई के परीक्षा सुधारों से मूल्यांकन नहीं, समझ और विकास बने केंद्र बिंदु

Sat, 31 Jan 2026 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Sat, 31 Jan 2026 01:23 AM IST
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CBSE exam reforms put understanding and development at the centre, not assessment
सुनीता मान
पानीपत। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा लागू किए गए परीक्षा सुधार शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव की ओर संकेत करते हैं। ये सुधार अंकों पर आधारित प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान को प्राथमिकता देते हैं। शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा की यह बदली हुई भूमिका विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध हो रही है।
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रटंत से आगे सोचने की दिशा में परीक्षा प्रणाली

लंबे समय तक परीक्षा को ही शिक्षा की सफलता का पैमाना माना गया, लेकिन केवल अंकों पर आधारित मूल्यांकन विद्यार्थियों की वास्तविक प्रतिभा को पूरी तरह सामने नहीं ला पाता। सीबीएसई के हालिया परीक्षा सुधार इसी पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने का प्रयास हैं। नई प्रणाली में रटत ज्ञान की बजाय अवधारणात्मक समझ, तार्किक चिंतन और अभिव्यक्ति कौशल पर विशेष जोर दिया गया है। योग्यता आधारित प्रश्न यह स्पष्ट करते हैं कि विद्यार्थी अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग किस स्तर तक कर पा रहे हैं। वहीं निरंतर मूल्यांकन से शिक्षकों को विद्यार्थियों की प्रगति को समय-समय पर समझने में मदद मिल रही है। कक्षा दसवीं में वर्ष में दो बार परीक्षा की व्यवस्था विद्यार्थियों को आत्म मूल्यांकन का अवसर देती है और कमजोर पक्षों में सुधार की संभावना बढ़ाती है। इससे परीक्षा का भय कम होता है और सीखने की प्रक्रिया अधिक सकारात्मक बनती है। ऐसे में शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जिन्हें अंकों से अधिक प्रयास और विकास पर ध्यान देना चाहिए।
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- समता, अंग्रेजी प्राध्यापिका, न्यू एरा पब्लिक स्कूल, मतलौडा।


मूल्यांकन से आगे बढ़ती शिक्षा की अवधारणा

परीक्षा शिक्षा का आवश्यक अंग है, लेकिन जब इसका उद्देश्य केवल अंक अर्जित करना बन जाए, तो शिक्षा का व्यापक लक्ष्य सीमित हो जाता है। सीबीएसई द्वारा किए गए परीक्षा सुधार इसी सोच में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देते हैं। नई परीक्षा व्यवस्था में स्मरण शक्ति के स्थान पर समझ, विश्लेषण और अभिव्यक्ति को महत्व दिया गया है। योग्यता आधारित प्रश्नों और निरंतर आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों की वास्तविक सीख का आकलन किया जा रहा है। कक्षा दसवीं में दो बार परीक्षा आयोजित करने से विद्यार्थियों को स्वयं को परखने और सुधार करने का अवसर मिलता है, जिससे तनाव में भी कमी आती है। इन बदलाव के साथ शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यवस्तु तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को सोचने, प्रश्न पूछने और सीख को जीवन से जोड़ने तक विस्तृत हो गई है। वहीं अभिभावकों से अपेक्षा है कि वे अंकों से आगे बढ़कर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, रुचियों और प्रयासों को महत्व दें। जब परीक्षा डर नहीं, बल्कि सीख का साधन बने, तभी शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर पाएगी।
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- सुनीता मान, प्रधानाचार्या, सर छोटू राम हेरिटेज स्कूल, विकास नगर, पानीपत।

सुनीता मान

सुनीता मान

सुनीता मान

सुनीता मान

सुनीता मान

सुनीता मान

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