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बिजली की फरियाद लगानी है तो पानी साथ लाएं
पानीपत
Updated Mon, 05 May 2014 12:26 AM IST
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बिजली निगम गर्मियों में उपभोक्ताओं को बेशक पर्याप्त बिजली देने का दावा कर रहा हो, लेकिन असल में बिजली के प्रबंध तो दूर निगम अपने कार्यालय में पेयजल तक के प्रबंध नहीं कर पाया है। ऐसे में यहां हर रोज आने वाले 15 हजार फरियादियों को गर्मियों में परेशानी हो सकती है। उनको यहां पर लाइन में कई घंटे खड़ा रहने के बाद सूखे गले से वापस जाना पड़ रहा है। निगम अधिकारी इसको लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में बिजली की किल्लत भी बढ़ जाएगी और साथ में निगम कार्यालय में समस्या समाधान को लेकर फरियादियों की संख्या भी बढ़ जाएगी। यहां पर फरियादियों की समस्या का समाधान हो या न हो, लेकिन पेयजल न मिलने पर उनकी परेशान बढ़ सकती है। अमर उजाला टीम ने रविवार को सर्कल कार्यालय में फरियादियों के लिए किए गए पेयजल के प्रबंधों का जायजा लिया।
निगम के अधीक्षक अभियंता कार्यालय के पास एक टोंटी है। वह भी कभी कभार ही चल पाती है। टोंटी को देखकर गलती से इंसान या पक्षी पानी की उम्मीद लगाकर आ जाते हैं, लेकिन बंद पड़ी टोंटी को देखकर उनके शरीर की रही सही एनर्जी भी कम हो जाती जाती है। इसके अलावा यहां पर एक वाटर कूलर लगा है। वाटर कूलर को हमेशा दरवाजे पर ताला लगाकर अंदर बंद कर रखा जाता है। इसका दरवाजा तभी खुलता है, जब निगम के किसी बडे़ अधिकारी की कुर्सी पर पानी ले जाना होता है। कई बार तो कर्मचारियों को भी इस वाटर कूलर के दरवाजे की चाबी नहीं मिलती।
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सिटी कार्यालय का वाटर कूलर ठप
निगम के सिटी सब डिवीजन कार्यालय में लगा वाटर कूलर तो कई साल से चल ही नहीं रहा है। यहां पर ठंडा पानी तो दूर साधारण पानी भी नहीं मिल पाता। इस वाटर कूलर को ठीक कराने के लिए कोई अधिकारी या कर्मचारी आगे नहीं आता। कर्मचारियों की यूनियन बनी है, कई बड़े अधिकारी अच्छा वेतन भी ले रहे हैं, लेकिन किसी ने पेयजल व्यस्था की तरफ कदम नहीं उठाया।
करीब 15 हजार उपभोक्ता आते हैं रोजाना
बिजली से संबंधित कई तरह की शिकायतें व फरियाद लेकर सर्कल कार्यालय में हर रोज करीब 15 हजार उपभोक्ता आते-जाते हैं। गर्मियों में उपभोक्ताओं की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। पूरे पानीपत सर्कल से किसी न किसी काम से उपभोक्ताओं का आना-जाना लगा रहता है। यहां पर पहुंचने के बाद ज्यादातर उपभोक्ता तो अपना बिजली से संबंधित काम पूरा करवाने के बजाय पीने के पानी के बारे में पूछते रहते हैं। कई कर्मचारी बताते हैं कि कई उपभोक्ता तो अपना काम पूरा कराने से पहले ही पानी पीने के चक्कर में उल्टे पैर दौड़ जाते हैं। सर्कल कार्यालय के आसपास भी कोई प्याऊ नहीं है।
इंसानियत दिखाना पड़ जाता है भारी
कर्मचारियों के अनुसार उन्हें इंसानियत दिखाना कई बार भारी पड़ जाता है। वे किसी को पानी पिला भी देते हैं तो बाद में उन्हें अन्य साथियों की पानी की बोतल टटोलनी पड़ती है। परेशानी यहीं खत्म नहीं होती, कई बार तो पड़ोसी कर्मचारी भी पानी पिलाने से पहले दो बातें सुना देते हैं। निगम के सर्कल कार्यालय में पीने के पानी के लिए इतनी बड़ी किल्लत देखकर आम आदमी को भी हैरानी होती है।
यह है स्टाफ मेंबरों की संख्या
निगम के सर्कल कार्यालय में स्टाफ मेंबराें की बात की जाए तो यहां पर अधिकारियों व कर्मचारियों समेत करीब पांच सौ स्टाफ मेंबर हैं। इनमें एक अधीक्षक अभियंता (एसई), एक्सईएन सिटी डिवीजन, एक्सईएन स्टोर, एक्सईएन ट्रांसमिशन सिस्टम, एक्सईएन मेंटेनेंस एंड प्रोटेक्शन, पांच एसडीओ व करीब 490 कर्मचारी हैं लेकिन पीने के पानी की तरफ कोई ध्यान नहीं देता।
कई घर से ही ले आते हैं पानी
यहां पर कार्यरत ज्यादातर कर्मचारी तो अपने लिए खुद के पैसों से ही पानी ले आते हैं। कई अपने घर से पानी ले जाते हैं। जिन कर्मचारियों को फील्ड में निकलना होता है, वे बाहर ही काम चला लेते हैं। हरियाणा कर्मचारी संघ के जिला प्रधान तेजपाल सिंह ने बताया कि फील्ड कर्मचारियों को दिन में कार्यालय पहुंचने से पहले ही पेयजल का प्रबंध करना पड़ता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें भारी परेशानी होती है।
सर्कल कार्यालय में पेयजल से संबंधित फिलहाल कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी कार्यालय में पेयजल का उचित प्रबंध होना आवश्यक है। अगर पेयजल से संबंधित कोई समस्या है तो इस तरफ ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों की बैठक में समस्या को उठाया जाएगा और पीने के पानी के उचित प्रबंधों की तरफ जल्दी ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
कशिक मान, एक्सईएन, सिटी डिवीजन, बिजली निगम, पानीपत
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गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में बिजली की किल्लत भी बढ़ जाएगी और साथ में निगम कार्यालय में समस्या समाधान को लेकर फरियादियों की संख्या भी बढ़ जाएगी। यहां पर फरियादियों की समस्या का समाधान हो या न हो, लेकिन पेयजल न मिलने पर उनकी परेशान बढ़ सकती है। अमर उजाला टीम ने रविवार को सर्कल कार्यालय में फरियादियों के लिए किए गए पेयजल के प्रबंधों का जायजा लिया।
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निगम के अधीक्षक अभियंता कार्यालय के पास एक टोंटी है। वह भी कभी कभार ही चल पाती है। टोंटी को देखकर गलती से इंसान या पक्षी पानी की उम्मीद लगाकर आ जाते हैं, लेकिन बंद पड़ी टोंटी को देखकर उनके शरीर की रही सही एनर्जी भी कम हो जाती जाती है। इसके अलावा यहां पर एक वाटर कूलर लगा है। वाटर कूलर को हमेशा दरवाजे पर ताला लगाकर अंदर बंद कर रखा जाता है। इसका दरवाजा तभी खुलता है, जब निगम के किसी बडे़ अधिकारी की कुर्सी पर पानी ले जाना होता है। कई बार तो कर्मचारियों को भी इस वाटर कूलर के दरवाजे की चाबी नहीं मिलती।
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सिटी कार्यालय का वाटर कूलर ठप
निगम के सिटी सब डिवीजन कार्यालय में लगा वाटर कूलर तो कई साल से चल ही नहीं रहा है। यहां पर ठंडा पानी तो दूर साधारण पानी भी नहीं मिल पाता। इस वाटर कूलर को ठीक कराने के लिए कोई अधिकारी या कर्मचारी आगे नहीं आता। कर्मचारियों की यूनियन बनी है, कई बड़े अधिकारी अच्छा वेतन भी ले रहे हैं, लेकिन किसी ने पेयजल व्यस्था की तरफ कदम नहीं उठाया।
करीब 15 हजार उपभोक्ता आते हैं रोजाना
बिजली से संबंधित कई तरह की शिकायतें व फरियाद लेकर सर्कल कार्यालय में हर रोज करीब 15 हजार उपभोक्ता आते-जाते हैं। गर्मियों में उपभोक्ताओं की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। पूरे पानीपत सर्कल से किसी न किसी काम से उपभोक्ताओं का आना-जाना लगा रहता है। यहां पर पहुंचने के बाद ज्यादातर उपभोक्ता तो अपना बिजली से संबंधित काम पूरा करवाने के बजाय पीने के पानी के बारे में पूछते रहते हैं। कई कर्मचारी बताते हैं कि कई उपभोक्ता तो अपना काम पूरा कराने से पहले ही पानी पीने के चक्कर में उल्टे पैर दौड़ जाते हैं। सर्कल कार्यालय के आसपास भी कोई प्याऊ नहीं है।
इंसानियत दिखाना पड़ जाता है भारी
कर्मचारियों के अनुसार उन्हें इंसानियत दिखाना कई बार भारी पड़ जाता है। वे किसी को पानी पिला भी देते हैं तो बाद में उन्हें अन्य साथियों की पानी की बोतल टटोलनी पड़ती है। परेशानी यहीं खत्म नहीं होती, कई बार तो पड़ोसी कर्मचारी भी पानी पिलाने से पहले दो बातें सुना देते हैं। निगम के सर्कल कार्यालय में पीने के पानी के लिए इतनी बड़ी किल्लत देखकर आम आदमी को भी हैरानी होती है।
यह है स्टाफ मेंबरों की संख्या
निगम के सर्कल कार्यालय में स्टाफ मेंबराें की बात की जाए तो यहां पर अधिकारियों व कर्मचारियों समेत करीब पांच सौ स्टाफ मेंबर हैं। इनमें एक अधीक्षक अभियंता (एसई), एक्सईएन सिटी डिवीजन, एक्सईएन स्टोर, एक्सईएन ट्रांसमिशन सिस्टम, एक्सईएन मेंटेनेंस एंड प्रोटेक्शन, पांच एसडीओ व करीब 490 कर्मचारी हैं लेकिन पीने के पानी की तरफ कोई ध्यान नहीं देता।
कई घर से ही ले आते हैं पानी
यहां पर कार्यरत ज्यादातर कर्मचारी तो अपने लिए खुद के पैसों से ही पानी ले आते हैं। कई अपने घर से पानी ले जाते हैं। जिन कर्मचारियों को फील्ड में निकलना होता है, वे बाहर ही काम चला लेते हैं। हरियाणा कर्मचारी संघ के जिला प्रधान तेजपाल सिंह ने बताया कि फील्ड कर्मचारियों को दिन में कार्यालय पहुंचने से पहले ही पेयजल का प्रबंध करना पड़ता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें भारी परेशानी होती है।
सर्कल कार्यालय में पेयजल से संबंधित फिलहाल कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी कार्यालय में पेयजल का उचित प्रबंध होना आवश्यक है। अगर पेयजल से संबंधित कोई समस्या है तो इस तरफ ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों की बैठक में समस्या को उठाया जाएगा और पीने के पानी के उचित प्रबंधों की तरफ जल्दी ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
कशिक मान, एक्सईएन, सिटी डिवीजन, बिजली निगम, पानीपत