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Panipat News: दिनेश के दोनों चिराग बुझे, बोला- गर्दन भी कटी और रीढ़ भी टूटी
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पानीपत। रेडक्रॉस के लैब सहायक दिनेश कुमार के घर के दो चिराग ( मनीष व आशीष) बुझ गए। बेटों की मौत से टूट चुके दिनेश कुमार बिलख बिलख कर बेटों को याद कर रहे हैं। उनकी नम आंखें व लड़खड़ाती जुबान कहती है कि भगवान ने सब कुछ छीन लिया। एक बेटा उसकी रीढ़ था और दूसरा गर्दन। उसकी रीढ़ भी टूट गई और गर्दन भी कट गई। वह अब कैसे जियेगा।
राजनगर में दोनों की एक साथ हुई मौत से मातम छाया हुआ है। दिनेश कुमार के परिवार को सांत्वना देने के लिए लोगों का तांता लगा है। दोनों बेटों की पत्नियां बेसुध हैं। वह पतियों की मौत पर विश्वास ही नहीं कर पा रहीं। वे उनके जल्द आने की कहकर फिर बेसुध हो जाती हैं। बच्चे भी अपने पिता को याद कर बिलख रहे हैं। मनीष व आशीष सगे भाई होने के साथ साथ घनिष्ठ मित्र भी थे। वे दोनों अक्सर साथ रहते थे और साथ ही घूमते फिरते थे। दोनों के शव जब राजनगर में इनके घर के पास एक साथ लाया गया तो चीख पुकार मच गई। दोनों भाइयों की अर्थी एक साथ उठाई गई और एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दिनेश ने अपने बेटों को मुखाग्नि दी।
मनीष (32) छोटे भाई आशीष (29) से तीन साल बड़ा था। दोनों ही स्नातक पास थे। मनीष ने मुजफ्फरनगर में कंबल की दुकान की थी। वह पानीपत से माल खरीदता था। मुजफ्फरनगर में ही उसकी ससुराल है। वह वहीं पर किराए के कमरे में रहता था। सप्ताह में एक दिन वह घर आता था। आशीष बीटेक पास है। वह सेक्टर 29 में एक कंपनी में तकनीकी विभाग में कार्यरत था। राजनगर निवासी मोहित ने बताया कि दोनों भाइयों में बहुत अधिक प्यार था। जब वह साथ होते थे तो इनको किसी की जरूरत नहीं थी। वह साथ खूब हंसते-घूमते थे। एक साथ दोनों मोबाइल में सेल्फी लेते रहते थे। दिन में कई कई बार एक दूसरे को कॉल कर हाल चाल जानते थे।
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दिवाली पर मनीष घर आया था। इसलिए घर में खुशियों का माहौल था। दिवाली पर भी दोनों भाइयों ने खूब मस्ती की। एक साथ दिवाली मनाई। भैया दूज पर दोपहर 12 बजे बहन साक्षी से तिलक लगवाकर दोनों एक्टिवा पर निकल गए थे। दोनों अपनी मां सर्वेश को बोलकर गए थे कि वह अपने दोस्त से मिलने जा रहे है। पिता दिनेश कुमार, बहन साक्षी व मां सर्वेश भी दोनों की यारी से वाकिफ थी। पूरा परिवार उनका मजाक भी उड़ाता था। दोनों साथ घर से निकले तो शाम सात बजे आशीष की पत्नी ने उन्हें कॉल कर पूछा था कि दोनों घर कब आ रहे थे। दोनों ने कुछ ही देर में घर आने को बोला था लेकिन एक हादसे ने हंसते खेलते घर को उजाड़ दिया।
बॉक्स
ट्रेन चालक बोला, युवक को बचाने के लिए दूसरे ने अपनी जान भी दे दी
जीआरपी ने ट्रेन चालक के बयान दर्ज किए गए हैं। उसने अपने बयान में बताया कि रात नौ बजे राजनगर के पीछे रेलवे ट्रैक पर एक युवक लघु शंका कर रहा था। उसने हॉर्न भी बजाया लेकिन युवक नहीं हटा। दूसरा युवक तेजी से दौड़ते हुए उसे बचाने आया। वह उस तक नहीं पहुंच पाया और दोनों ट्रेन की चपेट में आ गए। दोनों के सिर पर गहरी चोट लगी।
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राजनगर में दोनों की एक साथ हुई मौत से मातम छाया हुआ है। दिनेश कुमार के परिवार को सांत्वना देने के लिए लोगों का तांता लगा है। दोनों बेटों की पत्नियां बेसुध हैं। वह पतियों की मौत पर विश्वास ही नहीं कर पा रहीं। वे उनके जल्द आने की कहकर फिर बेसुध हो जाती हैं। बच्चे भी अपने पिता को याद कर बिलख रहे हैं। मनीष व आशीष सगे भाई होने के साथ साथ घनिष्ठ मित्र भी थे। वे दोनों अक्सर साथ रहते थे और साथ ही घूमते फिरते थे। दोनों के शव जब राजनगर में इनके घर के पास एक साथ लाया गया तो चीख पुकार मच गई। दोनों भाइयों की अर्थी एक साथ उठाई गई और एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दिनेश ने अपने बेटों को मुखाग्नि दी।
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मनीष (32) छोटे भाई आशीष (29) से तीन साल बड़ा था। दोनों ही स्नातक पास थे। मनीष ने मुजफ्फरनगर में कंबल की दुकान की थी। वह पानीपत से माल खरीदता था। मुजफ्फरनगर में ही उसकी ससुराल है। वह वहीं पर किराए के कमरे में रहता था। सप्ताह में एक दिन वह घर आता था। आशीष बीटेक पास है। वह सेक्टर 29 में एक कंपनी में तकनीकी विभाग में कार्यरत था। राजनगर निवासी मोहित ने बताया कि दोनों भाइयों में बहुत अधिक प्यार था। जब वह साथ होते थे तो इनको किसी की जरूरत नहीं थी। वह साथ खूब हंसते-घूमते थे। एक साथ दोनों मोबाइल में सेल्फी लेते रहते थे। दिन में कई कई बार एक दूसरे को कॉल कर हाल चाल जानते थे।
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दिवाली पर मनीष घर आया था। इसलिए घर में खुशियों का माहौल था। दिवाली पर भी दोनों भाइयों ने खूब मस्ती की। एक साथ दिवाली मनाई। भैया दूज पर दोपहर 12 बजे बहन साक्षी से तिलक लगवाकर दोनों एक्टिवा पर निकल गए थे। दोनों अपनी मां सर्वेश को बोलकर गए थे कि वह अपने दोस्त से मिलने जा रहे है। पिता दिनेश कुमार, बहन साक्षी व मां सर्वेश भी दोनों की यारी से वाकिफ थी। पूरा परिवार उनका मजाक भी उड़ाता था। दोनों साथ घर से निकले तो शाम सात बजे आशीष की पत्नी ने उन्हें कॉल कर पूछा था कि दोनों घर कब आ रहे थे। दोनों ने कुछ ही देर में घर आने को बोला था लेकिन एक हादसे ने हंसते खेलते घर को उजाड़ दिया।
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ट्रेन चालक बोला, युवक को बचाने के लिए दूसरे ने अपनी जान भी दे दी
जीआरपी ने ट्रेन चालक के बयान दर्ज किए गए हैं। उसने अपने बयान में बताया कि रात नौ बजे राजनगर के पीछे रेलवे ट्रैक पर एक युवक लघु शंका कर रहा था। उसने हॉर्न भी बजाया लेकिन युवक नहीं हटा। दूसरा युवक तेजी से दौड़ते हुए उसे बचाने आया। वह उस तक नहीं पहुंच पाया और दोनों ट्रेन की चपेट में आ गए। दोनों के सिर पर गहरी चोट लगी।