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धागा क्षेत्र में बूम, अब कंबल उद्यमी भी अाजमा रहे हाथ
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पानीपत। कंबल, कॉरपेट और डाइंग के साथ ही अब जिले की धागा इंडस्ट्री में भी बूम देखने को मिल रहा है। इस वक्त 500 से अधिक धागा यूनिट लग चुकी हैं और रंगीन धागा बनाने में इटली को पछाड़ पानीपत विश्व में प्रथम स्थान पर आ चुका है। यहां प्रतिदिन करीब 25 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन हो रहा है। धागा बनाने में उद्यमी जर्मन मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई कंबल उद्यमी भी धागा के क्षेत्र में हाथ अजमा रहे हैं।
पिछले दो साल में पानीपत में धागे की 30 नई यूनिट लगी हैं। कंबल का काम सीजनल है इसलिए कंबल व्यापारी जनवरी से जून तक धागा क्षेत्र में हाथ अजमा रहे हैं। ऐसे में धागे का उत्पादन एकाएक करीब 10 लाख किलोग्राम बढ़ गया है। पानीपत विश्व भर में टेक्सटाइल नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां के टेक्सटाइल उत्पाद विश्व के 150 देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं। हरदोई के बाद पानीपत देश भर में कॉपेट इंडस्ट्री हब बनकर भी उभरा है। डाइंग के क्षेत्र में भी पानीपत में कीर्तिमान स्थापित किया है। ऐसे में अब धागा उत्पादन में नाम होने से पानीपत के सिर एक और ताज सजा है।
कंबल बनाने वाले बना रहे धागा
पहले ओपन एंड (धागा बनाने वाले) उद्यमी मिंक कंबल बनाने की लाइन में कूदे थे । अब मिंक कंबल बनाने वाले उद्यमियों ने ओपन एंड की लाइन अपनानी शुरू कर दी है। ओपन एंड प्लांट लगाने की मशीनरी की आठ-आठ महीने की वेटिंग पर बुकिंग चल रही है। मशीनरी आने से छह माह पहले एडवांस में मशीनरी निर्माता पैसे ले रहे हैं। आने वाले समय में ओपन एंड के 10-12 से ज्यादा नए प्लांट लगेंगे।
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ओपन एंड धागा मिल लगाने का बूम
पानीपत में ओपन एंड प्लांट लगाने वालों की होड़ मच गई है। मिंक कंबल की डिमांड कम होने के कारण उद्यमियों का रुख कंबल से हटकर ओपन एंड उद्योग पर चला गया है। ओपन एंड प्लांट 15 से 18 करोड़ रुपये जमीन सहित लग जाता है। जबकि मिंक कंबल का यूनिट 20 से 25 करोड़ में लगता है। इसके बाद ओपन एंड यूनिट को एक्सपेंशन किया जा सकता है। कंबल का काम सीजनल होने के कारण उद्यमियों का ध्यान ओपन एंड उद्योग पर टिका है।
हमने धागा उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया है
हमने धागा उत्पादन में रिकॉर्ड कायम किया है। हर रोज 25 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन हो रहा है। धागे के कई बड़े बड़े प्रोजेक्ट लग रहे हैं। कंबल व्यापारी अब धागा क्षेत्र में भी हाथ अजमा रहे हैं। रंगीन धागा बनाने में पानीपत विश्व में नंबर वन है। - प्रीतम सचदेवा, प्रधान, पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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पिछले दो साल में पानीपत में धागे की 30 नई यूनिट लगी हैं। कंबल का काम सीजनल है इसलिए कंबल व्यापारी जनवरी से जून तक धागा क्षेत्र में हाथ अजमा रहे हैं। ऐसे में धागे का उत्पादन एकाएक करीब 10 लाख किलोग्राम बढ़ गया है। पानीपत विश्व भर में टेक्सटाइल नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां के टेक्सटाइल उत्पाद विश्व के 150 देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं। हरदोई के बाद पानीपत देश भर में कॉपेट इंडस्ट्री हब बनकर भी उभरा है। डाइंग के क्षेत्र में भी पानीपत में कीर्तिमान स्थापित किया है। ऐसे में अब धागा उत्पादन में नाम होने से पानीपत के सिर एक और ताज सजा है।
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कंबल बनाने वाले बना रहे धागा
पहले ओपन एंड (धागा बनाने वाले) उद्यमी मिंक कंबल बनाने की लाइन में कूदे थे । अब मिंक कंबल बनाने वाले उद्यमियों ने ओपन एंड की लाइन अपनानी शुरू कर दी है। ओपन एंड प्लांट लगाने की मशीनरी की आठ-आठ महीने की वेटिंग पर बुकिंग चल रही है। मशीनरी आने से छह माह पहले एडवांस में मशीनरी निर्माता पैसे ले रहे हैं। आने वाले समय में ओपन एंड के 10-12 से ज्यादा नए प्लांट लगेंगे।
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ओपन एंड धागा मिल लगाने का बूम
पानीपत में ओपन एंड प्लांट लगाने वालों की होड़ मच गई है। मिंक कंबल की डिमांड कम होने के कारण उद्यमियों का रुख कंबल से हटकर ओपन एंड उद्योग पर चला गया है। ओपन एंड प्लांट 15 से 18 करोड़ रुपये जमीन सहित लग जाता है। जबकि मिंक कंबल का यूनिट 20 से 25 करोड़ में लगता है। इसके बाद ओपन एंड यूनिट को एक्सपेंशन किया जा सकता है। कंबल का काम सीजनल होने के कारण उद्यमियों का ध्यान ओपन एंड उद्योग पर टिका है।
हमने धागा उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया है
हमने धागा उत्पादन में रिकॉर्ड कायम किया है। हर रोज 25 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन हो रहा है। धागे के कई बड़े बड़े प्रोजेक्ट लग रहे हैं। कंबल व्यापारी अब धागा क्षेत्र में भी हाथ अजमा रहे हैं। रंगीन धागा बनाने में पानीपत विश्व में नंबर वन है। - प्रीतम सचदेवा, प्रधान, पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन