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छह साल में चार बार भेजी ब्लड बैंक की डिमांड, सीआईडी ने पीएमओ से ली रिपोर्ट
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पानीपत। छह साल इंतजार के बाद भी पानीपत को सरकारी ब्लड बैंक नहीं मिल पाया है। अब भी ब्लड बैंक का प्रोजेक्ट फाइलों में ही कैद है। ब्लड बैंक के स्टाफ के लिए सिविल अस्पताल के पीएमओ तीन बार डिमांड भेज चुके हैं। अब मंगलवार को सीआईडी ने पीएमओ से ब्लड बैंक की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जो पंचकूला मुख्यालय भेज दी गई है। विदित हो कि सीआईडी सीएम घोषणाओं के कार्यों की मॉनीटरिंग भी करती है।
जिले में सरकारी ब्लड बैंक शुरू न होने से लोगों को निजी ब्लड बैंक से ही रक्त खरीदना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवतियों को होती है। परिजनों को आनन-फानन में निजी ब्लड बैंक से अधिक मूल्य पर रक्त खरीदना पड़ता है। पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने रिपोर्ट में बताया कि उन्होंने अस्पताल के प्रथम तल पर ब्लड बैंक के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवा दिया था। तीन बार स्टाफ की डिमांड भेजी जा चुकी है। रक्त के लिए दो फ्रीजर भी उनके पास है, लेकिन पैथोलॉजिस्ट नहीं है। पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति के बाद ही ब्लड बैंक का लाइसेंस लिया जाएगा। पीएमओ ने ब्लड बैंक प्रोजेक्ट के संबंध में मंगलवार को डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग के साथ बैठक भी की।
इतनी चाहिए मैन पावर
पैथोलॉजिस्ट, प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, सुपरवाइजर प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, काउंसलर, सोशल वर्कर, स्वीपर्स इत्यादि।
28 लाख के उपकरण आने हैं
ब्लड बैंक के लिए लगभग 45 तरह के छोटे-बड़े उपकरण खरीदे जाने हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 28 लाख रुपये है। अस्पताल प्रशासन लोकल परचेज कर नहीं सकता। उच्चाधिकारियों से इस संबंध में किसी तरह का आश्वासन नहीं मिला है।
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दोबारा स्टाफ की डिमांड का रिमांडर भेजेंगे- पीएमओ
स्टाफ की डिमांड कई बार भेजी जा चुकी है। ब्लड बैंक का कुछ सामान भी आया है। इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कराया गया है। पैथोलॉजिस्ट की कमी है। अब स्टाफ की नियुक्ति के लिए दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा।
-डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल
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जिले में सरकारी ब्लड बैंक शुरू न होने से लोगों को निजी ब्लड बैंक से ही रक्त खरीदना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवतियों को होती है। परिजनों को आनन-फानन में निजी ब्लड बैंक से अधिक मूल्य पर रक्त खरीदना पड़ता है। पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने रिपोर्ट में बताया कि उन्होंने अस्पताल के प्रथम तल पर ब्लड बैंक के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवा दिया था। तीन बार स्टाफ की डिमांड भेजी जा चुकी है। रक्त के लिए दो फ्रीजर भी उनके पास है, लेकिन पैथोलॉजिस्ट नहीं है। पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति के बाद ही ब्लड बैंक का लाइसेंस लिया जाएगा। पीएमओ ने ब्लड बैंक प्रोजेक्ट के संबंध में मंगलवार को डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग के साथ बैठक भी की।
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इतनी चाहिए मैन पावर
पैथोलॉजिस्ट, प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, सुपरवाइजर प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, काउंसलर, सोशल वर्कर, स्वीपर्स इत्यादि।
28 लाख के उपकरण आने हैं
ब्लड बैंक के लिए लगभग 45 तरह के छोटे-बड़े उपकरण खरीदे जाने हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 28 लाख रुपये है। अस्पताल प्रशासन लोकल परचेज कर नहीं सकता। उच्चाधिकारियों से इस संबंध में किसी तरह का आश्वासन नहीं मिला है।
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दोबारा स्टाफ की डिमांड का रिमांडर भेजेंगे- पीएमओ
स्टाफ की डिमांड कई बार भेजी जा चुकी है। ब्लड बैंक का कुछ सामान भी आया है। इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कराया गया है। पैथोलॉजिस्ट की कमी है। अब स्टाफ की नियुक्ति के लिए दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा।
-डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल