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नेत्रहीनों के जीवन के अंधकार को ज्ञान के उजाले से मिटा रहे नेत्रहीन अध्यापक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:50 AM IST
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Blind teachers erasing the darkness of the life of the blind with the light of knowledge
नीरज गिरी
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पानीपत। अंध विद्यालय के सात नेत्रहीन अध्यापक 150 नेत्रहीनों को शिक्षा का उजाला दे रहे हैं। उनका मकसद जीवन भर के अंधकार को ज्ञान के उजाले से मिटाना है। ताकि नेत्रहीन उनकी तरह ही आत्मनिर्भर बन सकें। अपनी शर्तों पर जीवन जी सकें। ये नेत्रहीन विद्यार्थी अगर इन शिक्षकों के मकसद को पूरा करते हैं तो शिक्षक दिवस पर इससे बड़ा उपहार नहीं हो सकता। कोरोना महामारी के कठिन दौरान में भी व्हॉट्सएप और स्मार्टफोन के जरिए इन्होंने पढ़ाई को जारी रखा।
पानीपत स्थित अंध विद्यालय में 16 अध्यापक हैं। इनमें से सात अध्यापक पूर्ण रूप से दृष्टिहीन हैं। विद्यालय से पास होकर निकले 70 फीसदी विद्यार्थी सरकारी नौकरियों में हैं। कुछ उच्च पदों पर भी हैं। इसी स्कूल से पढ़े सुरेंद्र लांबा आज एचसीएस अधिकारी हैं। वहीं कुछ विद्यार्थी आईएएस हैं तो कुछ बैंक में पीओ या क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। ये आत्मनिर्भर हैं और समाज के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं। संवाद
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गुरनाम ने लॉकडाउन में वॉइस रिकार्डिंग कर बच्चों का सिलेबस कराया पूरा
कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन का समय कठिन था, ऐसे में नेत्रहीन अध्यापकों ने ऑनलाइन शिक्षा दी। अंध विद्यालय के अध्यापक गुरनाम ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप में वॉइस रिकॉर्डिंग करके भेजते थे, जिसके जरिए बच्चों का सिलेबस पूरा कराया गया। उन्होंने बताया कि उनकी आंखों की रोशनी बचपन से ही नहीं है। वे हिंदी और सामाजिक विज्ञान पढ़ाते हैं। कोशिश रहती है कि बच्चों में विषय के प्रति समझ लाई जाए, उन्हें रटने से रोका जाता है।
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विज्ञान पढ़ाते हैं अध्यापक अनीश जैन
अध्यापक अनीश जैन अंध स्कूल में विज्ञान पढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि एमएससी करने के बाद उनकी आंखों की रोशनी चली गई। उन्होंने हार नहीं मानी। विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया। एमएससी तक विज्ञान के जो भी प्रैक्टिकल किए थे, उनकी तस्वीर मस्तिष्क में छपी हुई थी। जिससे नेत्रहीन विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल कराने की कोशिश की, जिसमें सफलता मिली। वर्ष 1998 से अंध विद्यालय पानीपत विज्ञान के शिक्षक हैं।
विद्यार्थियों को संगीत सिखाते हैं सोहन
संगीत अध्यापक सोहन लाल की आंखों की रोशनी बचपन से ही नहीं है। वे 10वीं तक अंध विद्यालय में पढ़े। संगीत में रुचि रही तो आगे की पढ़ाई के लिए जालंधर पहुंचे। जहां संगीत में एमए किया और फिर अंध विद्यालय के लिए परीक्षा पास कर संगीत अध्यापक के तौर पर नियुक्ति पाई। सोहन लाल ने बताया कि बच्चों को हार्मोनियम और अन्य वाद्य यंत्र बजाना सिखाते हैं। कहते हैं विद्यार्थियों को वाद्य यंत्र बजाना और सुनना काफी पसंद है।

प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लेने को प्रेरित करते हैं मनीष
अंध विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष ने बताया कि उनकी कोशिश रहती है कि बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठें। यह कभी न सोचें कि वे नेत्रहीन हैं। उन्हें प्रेरित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। मनीष ने बताया कि उन्हें 12वीं के बाद से ही दिखना कम हो गया था, जिसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और एमएससी करते-करते रोशनी पूरी तरह से चली गई। जिसके बाद देहरादून गए और वहां ब्रेल लिपि सीखी और बीएड किया। फिर अंध विद्यालय में शिक्षा देनी शुरू की।
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