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Panipat News: प्राॅपर्टी आईडी बनाने में बड़ा फर्जीवाड़ा, जांच शुरू
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पानीपत। नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी बनाने में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। दलालों ने प्रॉपर्टी टैक्स शाखा के कर्मचारियों के साथ मिलकर सैकड़ों प्रॉपर्टी आईडी फर्जी तरीके से बना दी। ऐसा कर निगम को करोड़ों रुपये की चपत लगा दी। इसमें नगर निगम की संयुक्त आयुक्त की सहायक का भी नाम सामने आया है।
आरोप हैं कि फर्जी प्राॅपर्टी आईडी के आधार पर राजस्व विभाग में रजिस्ट्री करा ली जाती थी। इनको बाद में पोर्टल से हटा लिया जाता था। संयुक्त आयुक्त ने मामला सामने आने के बाद खुद ही जांच करा दी है। शहर में करीब 1.80 लाख प्रॉपर्टी आईडी याशी कंपनी के सर्वे में मिली थी। इनमें से करीब 70 हजार में गलत मिली थी। इसके बाद प्रॉपर्टी आईडी बनवाना जरूरी कर दी।
शहर में पिछले चार साल से प्रॉपर्टी आईडी लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। निगम अधिकारी कई बार शिविर लगाकर भी इनका समाधान नहीं कर पाए हैं। इन सबके बीच फर्जीवाड़ा भी शुरू कर दिया गया। ये मामल कई बार अधिकारियों के सामने पहुंचे। इनमें केवल जांच का आश्वासन दिया गया।
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कर्मचारी दलालों के साथ मिल करते थे काम : प्रॉपर्टी आईडी में किसी प्रकार की आपत्ति दूर करने का अधिकार नगर निगम के संयुक्त आयुक्त के पास है। इसके लिए दस्तावेजों की सही प्रकार से जांच की जाती है। अधीनस्थ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही इनको ठीक किया जाता था। संयुक्त आयुक्त की आईडी की जानकारी उनकी महिला पीए को थी। उनके साथ प्रॉपर्टी टैक्स शाखा के दो कर्मचारी भी मिल गए। इन्होंने दलालों के साथ मिलकर दस्तावेजों के बिना ही आपत्ति खत्म कर दी। इनमें क्षेत्र, राशि और प्राॅपर्टी की कैटेगरी शामिल थी।
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आरोप हैं कि फर्जी प्राॅपर्टी आईडी के आधार पर राजस्व विभाग में रजिस्ट्री करा ली जाती थी। इनको बाद में पोर्टल से हटा लिया जाता था। संयुक्त आयुक्त ने मामला सामने आने के बाद खुद ही जांच करा दी है। शहर में करीब 1.80 लाख प्रॉपर्टी आईडी याशी कंपनी के सर्वे में मिली थी। इनमें से करीब 70 हजार में गलत मिली थी। इसके बाद प्रॉपर्टी आईडी बनवाना जरूरी कर दी।
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शहर में पिछले चार साल से प्रॉपर्टी आईडी लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। निगम अधिकारी कई बार शिविर लगाकर भी इनका समाधान नहीं कर पाए हैं। इन सबके बीच फर्जीवाड़ा भी शुरू कर दिया गया। ये मामल कई बार अधिकारियों के सामने पहुंचे। इनमें केवल जांच का आश्वासन दिया गया।
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कर्मचारी दलालों के साथ मिल करते थे काम : प्रॉपर्टी आईडी में किसी प्रकार की आपत्ति दूर करने का अधिकार नगर निगम के संयुक्त आयुक्त के पास है। इसके लिए दस्तावेजों की सही प्रकार से जांच की जाती है। अधीनस्थ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही इनको ठीक किया जाता था। संयुक्त आयुक्त की आईडी की जानकारी उनकी महिला पीए को थी। उनके साथ प्रॉपर्टी टैक्स शाखा के दो कर्मचारी भी मिल गए। इन्होंने दलालों के साथ मिलकर दस्तावेजों के बिना ही आपत्ति खत्म कर दी। इनमें क्षेत्र, राशि और प्राॅपर्टी की कैटेगरी शामिल थी।