पानीपत में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का बड़ा फर्जीवाड़ा: USA में बैठे युवक का बना दिया लर्निंग लाइसेंस, केस दर्ज
पानीपत में फर्जीवाड़े के मामले का अजब-गजब मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार कर्मचारियों ने मिलीभगत से यूएसए में बैठे एक युवक का लर्निंग लाइसेंस बना दिया। फिलहाल एडीएम ने राजस्व विभाग के सहायक अधीक्षक सतबीर सिंह, रीडर विक्रम सिंह और जूनियर प्रोग्रामर कशिन चावला की टीम बनाई।
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पानीपत में सरकारी कर्मचारियों ने मिलकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में बड़ा फर्जीवाड़ा कर दिया। कर्मचारियों ने मिलीभगत से यूएसए में बैठे एक युवक का लर्निंग लाइसेंस बना दिया। जिसका खुलासा एक शिकायत पर सीएम फ्लाइंग टीम के इनपुट मिलने के बाद हुआ। एडीएम ने लर्निंग लाइसेंस क्लर्क, महिला और पुरुष कम्प्यूटर ऑपरेटर समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। थाना शहर पुलिस ने शिकायत के आधार पर लाइसेंस क्लर्क ललित कुमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर अंकित, शिप्रा और नारा गांव निवासी सगे भाई अमित व साहिल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
एक टीम ने की थी जांच
एडीएम ने राजस्व विभाग के सहायक अधीक्षक सतबीर सिंह, रीडर विक्रम सिंह और जूनियर प्रोग्रामर कशिन चावला की टीम बनाई। टीम ने सभी तथ्यों, दस्तावेजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच की। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमित पुत्र राजेश निवासी गांव नारा जिला पानीपत का लर्निंग लाइसेंस 30 मई को जारी हुआ था। इसके लिए 15 मई को ऑनलाइन अप्लाई किया था। इस संबंध में सरल केंद्र को 23 मई को 650 रुपए डेबिट कार्ड के माध्यम से अदा किए गए थे। यह फीस सरल केंद्र में नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अंकित ने ऑनलाइन काटी है। लाइसेंस के संबंध में आईडीटीआर से ट्रेनिंग या फीस के संबंध में ऑनलाइन रिकॉर्ड व रजिस्टर में कोई एंट्री नहीं मिली। आवेदक भी मौके पर नहीं मिला और मिलीभगत से महिला कर्मचारी ने किया टेस्ट लेकर क्वालीफाई दिखा दिया।
इसके अलावा रेडक्रॉस सोसायटी की 300 रुपए की फीस फाइल पर उपलब्ध थी। 26 जुलाई की शाम लगभग 4:30 बजे ड्राइविंग लाइसेंस क्लर्क (DLC) ललित कुमार ने फाइल उपलब्ध करवाई है। जिसकी जांच पर पाया गया कि आवेदक का स्टॉल टेस्ट 30 मई को कम्प्यूटर ऑपरेटर शिप्रा द्वारा शाम करीब 3:02 बजे लिया गया है। जिसकी स्टैंप फाइल पर लगी हुई है। इस फाइल पर डी एलसी ललित कुमार की मार्किंग है, लेकिन मार्किंग के साथ तारीख लिखी नहीं की गई है और न ही डीएलसी की मार्किंग पर स्टैंप है। आवेदक के बारे में उसके भाई साहिल से जब पूछा गया तो उसने बताया कि उसका भाई अमित जनवरी 2023 से यूएसए गया हुआ है।
जांच में सामने आया कि आवेदक के विदेश जाने से पहले 30 मई को उसका लर्निंग लाइसेंस गलत तरीके से अप्रूव किया गया है, जिसमें कम्प्यूटर ऑपरेटरों व डीएलसी ललित की लापरवाही व मिलीभगत साफ झलकती है।