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बाल मित्र: सितंबर से होगी शुरुआत, जिले के चार थाना क्षेत्रों पर फोकस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 02:44 AM IST
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Bal Mitra: Will start from September, focus on four police station areas of the district
जिले के बच्चों को किसी भी मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न से बचाने के लिए बाल मित्र योजना को जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के निदेशक और उपायुक्त सुशील सारवान हरी झंडी दे दी है। सितंबर से इसकी शुरुआत होगी। योेजना के तहत जिले तीन थाना क्षेत्रों के 20 गांव और पांच वार्डों पर फोकस रहेगा। इस योजना का मकसद है बच्चों के जरिए उनकी परेशानियों को सामने लाकर सामाजिक एवं कानूनी समाधान निकालने का है।
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इस योजना के तहत हर गांव में बाल मित्र बनाएं जाएंगे, जो गांव के ही बच्चे होंगे। इन बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये बच्चे ही अपने आसपास के उन बच्चों की परेशानी सामने लाएंगे, जो शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न झेल रहे हैं। सीडब्ल्यूसी अधिकारी डॉ. मुकेश आर्य और उनकी टीम सितंबर से इसकी शुरुआत करेंगे। सितंबर से अक्तूबर तक बाल मित्र योजना का अवलोकन किया जाएगा। अगर पानीपत का प्रोजेक्ट सफल रहा तो, इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
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बाल मित्रों की आयु 14 से 16 वर्ष तक होगी, सरपंच और वार्ड पार्षद सुझाएंगे नाम
सीडब्ल्यूसी अधिकारी डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि बाल उत्पीड़न के सबसे ज्यादा मामले थाना चांदनीबाग, किला, पुराना औद्योगिक और सेक्टर 13-17 से आते हैं। इन थाना क्षेत्र के 20 गांव और पांच वार्ड को संवेदनशील मानते हुए चुना गया है। नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को बाल मित्र के रूप में चयनित करेंगे, इनकी आयु 14 से 16 वर्ष तक होगी। गांव का सरपंच और वार्ड पार्षद ही अपने क्षेत्र के बच्चों का नाम चयनित कर देंगे। वह सितंबर के पहले सप्ताह में सभी बाल मित्रों को ढूंढ लेंगे।
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- बाल मित्र को सीडब्ल्यूसी और डीसीपीओ देंगे ट्रेनिंग
गांव और वार्ड से चुने गए बच्चों को सीडब्ल्यूसी अधिकारी प्रशिक्षण देंगे। इन बच्चों को पोक्सो एक्ट के पीड़ित किशोर या किशोरी से बातचीत करने का तरीका बताया जाएगा। किस तरह व्यवहार करना है, क्या पूछना है। कुछ पता चलने पर सबसे पहले किसे सूचना देनी है। अहम मकसद है कि बच्चे जो आपबीती अपने परिजनों को नहीं बता पाते, उसे बाल मित्र को बता सकें।
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