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Panipat News: बीडीपीओ का जमानती वारंट जारी, दो साल बाद भी नहीं मिली संपूर्ण सूचना
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सनौली। हरियाणा सूचना आयोग ने बीडीपीओ सनौली ने नाम जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही उनको 30 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के आदेश जारी किए हैं। उन पर पंचायती चुनाव में नामांकन में गड़बड़ी के मामले में शामिल लोगों को संरक्षण देने का आरोप है। इसी में उन पर संपूर्ण सूचना न देने का भी आरोप है।
वर्ष 2022 में सनौली खुर्द गांव में ग्राम पंचायत चुनाव थे। ग्रामीण महेंद्र चावला ने वर्तमान सरपंच संजय त्यागी व पंच बबीता व प्रदीप आदि पर कुछ गलत व झूठे तथ्यों के आधार पर चुनाव लड़ने के आरोप लगाए थे। आरोप है कि नामांकन पत्र के साथ झूठे शपथपत्र दिए। जिसके संबंध में नवंबर 2022 में महेंद्र चावला ने इन सबके नामांकन पत्र व अन्य संबंधित दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से मांगे थे। आरोप है कि बीडीपीओ सनौली ने उक्त लोगों को बचाने के नीयत से कोई भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद चावला ने प्रथम अपील दायर की और प्रथम अपील अधिकारी डीडीपीओ के आदेश के बाद भी बीडीपीओ सनौली द्वारा कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई।
महेंद्र चावला ने सूचना आयोग में वर्ष 2023 में शिकायत दर्ज करवाई और बीडीपीओ सनौली के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की। सूचना आयोग द्वारा दोनों पक्षों को सुनवाई के नोटिस जारी किए। बीडीपीओ सनौली ने बार-बार नोटिस के बाद भी संपूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई और न ही आयोग के सामने अपनी हाजिरी दी। सूचना आयोग ने इसको गंभीरता से लिया और बीडीपीओ सनौली के नाम जमानती वारंट जारी किए। उनको 30 जनवरी को हाजिर होने के आदेश जारी किए हैं। जमानती वारंट की एक प्रति पुलिस अधीक्षक पानीपत को भेजी है।
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चावला का संरक्षण देने का आरोप
शिकायतकर्ता महेंद्र चावला ने आरोप लगाया कि बीडीपीओ सनौली द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है। दो वर्ष से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी आज तक संपूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई। बीडीपीओ सनौली द्वारा रिकॉर्ड अवलोकन के लिए बुलाया जाता है, परंतु न तो संपूर्ण रिकॉर्ड का अवलोकन कराया जाता है और न ही सूचना उपलब्ध कराई जाती है। बीडीपीओ सनौली के पहले भी जमानती वारंट हो चुके हैं।
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वर्ष 2022 में सनौली खुर्द गांव में ग्राम पंचायत चुनाव थे। ग्रामीण महेंद्र चावला ने वर्तमान सरपंच संजय त्यागी व पंच बबीता व प्रदीप आदि पर कुछ गलत व झूठे तथ्यों के आधार पर चुनाव लड़ने के आरोप लगाए थे। आरोप है कि नामांकन पत्र के साथ झूठे शपथपत्र दिए। जिसके संबंध में नवंबर 2022 में महेंद्र चावला ने इन सबके नामांकन पत्र व अन्य संबंधित दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से मांगे थे। आरोप है कि बीडीपीओ सनौली ने उक्त लोगों को बचाने के नीयत से कोई भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद चावला ने प्रथम अपील दायर की और प्रथम अपील अधिकारी डीडीपीओ के आदेश के बाद भी बीडीपीओ सनौली द्वारा कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई।
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महेंद्र चावला ने सूचना आयोग में वर्ष 2023 में शिकायत दर्ज करवाई और बीडीपीओ सनौली के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की। सूचना आयोग द्वारा दोनों पक्षों को सुनवाई के नोटिस जारी किए। बीडीपीओ सनौली ने बार-बार नोटिस के बाद भी संपूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई और न ही आयोग के सामने अपनी हाजिरी दी। सूचना आयोग ने इसको गंभीरता से लिया और बीडीपीओ सनौली के नाम जमानती वारंट जारी किए। उनको 30 जनवरी को हाजिर होने के आदेश जारी किए हैं। जमानती वारंट की एक प्रति पुलिस अधीक्षक पानीपत को भेजी है।
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चावला का संरक्षण देने का आरोप
शिकायतकर्ता महेंद्र चावला ने आरोप लगाया कि बीडीपीओ सनौली द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है। दो वर्ष से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी आज तक संपूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई। बीडीपीओ सनौली द्वारा रिकॉर्ड अवलोकन के लिए बुलाया जाता है, परंतु न तो संपूर्ण रिकॉर्ड का अवलोकन कराया जाता है और न ही सूचना उपलब्ध कराई जाती है। बीडीपीओ सनौली के पहले भी जमानती वारंट हो चुके हैं।