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आयुष्मान योजना : हेमरेजिक डेंगू और मलेरिया के मरीज भी करा सकते हैं इलाज
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प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के पैनल वाले प्राइवेट अस्पतालों में पात्र मरीज हेमरेजिक डेंगू फीवर और खतरनाक मलेरिया रोग का इलाज फ्री करा सकता है। सामान्य मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टायफाइड का इलाज सिविल अस्पताल में ही कराना पड़ेगा। किसी मरीज को इलाज मिलने में दिक्कत आती है तो वह कोड संख्या बताकर लाभ प्राप्त कर सकता है। विभाग को लगातार शिकायत मिल रही थी कि पैनल के अस्पताल डेंगू, खतरनाक चिकनगुनिया व मलेरिया का इलाज करने से मना कर रहे हैं। उनका तर्क है कि ये बीमारियां आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नहीं है। जबकि ये इलाज इसी योजना के अंतर्गत हैं।
आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल कुछ प्राइवेट अस्पतालों में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया,टायफाइड का फ्री इलाज से इंकार के मामले सामने आए। आयुष्मान भारत की वेबसाइट पर बीमारियों के कोड खंगालने पर इसकी स्थिति साफ होती है। हेमरेजिक डेंगू और मलेरिया का इलाज योजना के पात्र पैनल वाले अस्पतालों में फ्री कराया जा सकता है। मलेरिया (कोड संख्या एम100014), डेंगू (कोड संख्या एम100015), चिकुनगुनिया (कोड संख्या एम100016) और टायफाइड (कोड संख्या एम100018) का इलाज सरकारी अस्पतालों में करा सकते हैं। अस्पतालों को बीमारियों के पैकेज के हिसाब से कोड दिए हुए हैं। हेमरेजिक डेंगू फीवर और कांप्लीकेटेड मलेरिया का इलाज एम-2 में शामिल हैं।
क्या है हेमरेजिक डेंगू फीवर, कांप्लीकेटेड मलेरिया
हेमरेजिक डेंगू फीवर खतरनाक है। इसमें प्लेटलेट्स और श्वेत रक्त कणिकाएं की संख्या कम होने लगती हैं। नाक और मसूड़ों से खून आने लगता है। शौच या उल्टी में खून आता है। स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे-बड़े चकत्ते पड़ जाते हैं। मलेरिया के साथ डेंगू होना बहुत खतरनाक होता है। हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगती हैं।
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अस्पताल में मरीज को मिलेगा आयुष्मान मित्र मरीज
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र को अस्पताल में भर्ती होने के लिए कोई चार्ज नहीं चुकाना पड़ेगा। अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च इस योजना में कवर किया जाएगा। इस खर्च में अस्पताल में दाखिल होने से पहले और बाद के खर्च भी कवर किए जाएंगे। पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा। वह मरीज की मदद करेगा और उसे अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा। अस्पताल में एक हेल्प डेस्क होना भी अनिवार्य है। जो दस्तावेज चेक करने, स्कीम में नामांकन के लिए वेरिफिकेशन में मदद करता है। आयुष्मान भारत योजना में शामिल व्यक्ति देश के किसी भी सरकारी/पैनल में शामिल निजी अस्पताल में इलाज करा सकेगा।
आयुष्मान भारत योजना के तहत यह बीमारी होती हैं कवर
इस स्कीम के तहत लाभार्थियों की भिन्न-भिन्न श्रेणियां बनाई गई हैं, जिनमें 1350 बीमारी के पैकेज मौजूद हैं, जो कैंसर के इलाज, रेडिएशन थेरेपी, कीमो थेरेपी, हृदय से जुड़ी दिक्कतें, स्टंट डालने, दिमागी ऑपरेशन, दांतों व आंखों का ऑपरेशन, एमआरआई व सीटी स्कैन जैसे विशेष टेस्ट कवर होते हैं।
योजना में जिले के यह अस्पताल हो गए हैं शामिल
इसमें सिविल अस्पताल, ईएसआई अस्पताल, सीएचसी समालखा, छाबड़ा अस्पताल, जीसी गुप्ता अस्पताल, पार्क अस्पताल, लाला हरभगवान दास मेमोरियल प्रेम अस्पताल, अपैक्स अस्पताल, जितेंद्र अस्पताल, पतंजलि अस्पताल, रैनबो अस्पताल, आईबीएम अस्पताल, सिग्निस अस्पताल, गुप्ता आई अस्पताल, आरएम आनंद अस्पताल, साइप्रस एंड सत्या क्लीनिक, शोभित अस्पताल, डॉ. सोमबीर अस्पताल, पाहुजा अस्पताल, मित्तल चेस्ट एंड एलर्जी अस्पताल और जिंदल अस्पताल शामिल हैं।
इन अस्पतालों को शामिल करने की चल रही है प्रक्रिया
एएस दहिया अस्पताल, डॉ. हवा सिंह चिल्ड्रन अस्पताल, मलिक अस्पताल, गैलेक्सी अस्पताल एंड ट्रामा सेंटर और मदान अस्पताल की प्रक्रिया अभी चल रही है। वहीं दिल्ली आई अस्पताल को रिजेक्ट कर दिया गया।
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आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल कुछ प्राइवेट अस्पतालों में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया,टायफाइड का फ्री इलाज से इंकार के मामले सामने आए। आयुष्मान भारत की वेबसाइट पर बीमारियों के कोड खंगालने पर इसकी स्थिति साफ होती है। हेमरेजिक डेंगू और मलेरिया का इलाज योजना के पात्र पैनल वाले अस्पतालों में फ्री कराया जा सकता है। मलेरिया (कोड संख्या एम100014), डेंगू (कोड संख्या एम100015), चिकुनगुनिया (कोड संख्या एम100016) और टायफाइड (कोड संख्या एम100018) का इलाज सरकारी अस्पतालों में करा सकते हैं। अस्पतालों को बीमारियों के पैकेज के हिसाब से कोड दिए हुए हैं। हेमरेजिक डेंगू फीवर और कांप्लीकेटेड मलेरिया का इलाज एम-2 में शामिल हैं।
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क्या है हेमरेजिक डेंगू फीवर, कांप्लीकेटेड मलेरिया
हेमरेजिक डेंगू फीवर खतरनाक है। इसमें प्लेटलेट्स और श्वेत रक्त कणिकाएं की संख्या कम होने लगती हैं। नाक और मसूड़ों से खून आने लगता है। शौच या उल्टी में खून आता है। स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे-बड़े चकत्ते पड़ जाते हैं। मलेरिया के साथ डेंगू होना बहुत खतरनाक होता है। हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगती हैं।
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अस्पताल में मरीज को मिलेगा आयुष्मान मित्र मरीज
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र को अस्पताल में भर्ती होने के लिए कोई चार्ज नहीं चुकाना पड़ेगा। अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च इस योजना में कवर किया जाएगा। इस खर्च में अस्पताल में दाखिल होने से पहले और बाद के खर्च भी कवर किए जाएंगे। पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा। वह मरीज की मदद करेगा और उसे अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा। अस्पताल में एक हेल्प डेस्क होना भी अनिवार्य है। जो दस्तावेज चेक करने, स्कीम में नामांकन के लिए वेरिफिकेशन में मदद करता है। आयुष्मान भारत योजना में शामिल व्यक्ति देश के किसी भी सरकारी/पैनल में शामिल निजी अस्पताल में इलाज करा सकेगा।
आयुष्मान भारत योजना के तहत यह बीमारी होती हैं कवर
इस स्कीम के तहत लाभार्थियों की भिन्न-भिन्न श्रेणियां बनाई गई हैं, जिनमें 1350 बीमारी के पैकेज मौजूद हैं, जो कैंसर के इलाज, रेडिएशन थेरेपी, कीमो थेरेपी, हृदय से जुड़ी दिक्कतें, स्टंट डालने, दिमागी ऑपरेशन, दांतों व आंखों का ऑपरेशन, एमआरआई व सीटी स्कैन जैसे विशेष टेस्ट कवर होते हैं।
योजना में जिले के यह अस्पताल हो गए हैं शामिल
इसमें सिविल अस्पताल, ईएसआई अस्पताल, सीएचसी समालखा, छाबड़ा अस्पताल, जीसी गुप्ता अस्पताल, पार्क अस्पताल, लाला हरभगवान दास मेमोरियल प्रेम अस्पताल, अपैक्स अस्पताल, जितेंद्र अस्पताल, पतंजलि अस्पताल, रैनबो अस्पताल, आईबीएम अस्पताल, सिग्निस अस्पताल, गुप्ता आई अस्पताल, आरएम आनंद अस्पताल, साइप्रस एंड सत्या क्लीनिक, शोभित अस्पताल, डॉ. सोमबीर अस्पताल, पाहुजा अस्पताल, मित्तल चेस्ट एंड एलर्जी अस्पताल और जिंदल अस्पताल शामिल हैं।
इन अस्पतालों को शामिल करने की चल रही है प्रक्रिया
एएस दहिया अस्पताल, डॉ. हवा सिंह चिल्ड्रन अस्पताल, मलिक अस्पताल, गैलेक्सी अस्पताल एंड ट्रामा सेंटर और मदान अस्पताल की प्रक्रिया अभी चल रही है। वहीं दिल्ली आई अस्पताल को रिजेक्ट कर दिया गया।