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जल शक्ति अभियान के तहत रैली निकालकर लोगों को किया जागरूक
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पानीपत। जन स्वास्थ्य केंद्र किला पानीपत में पौधारोपण करते कर्मचारी।
- फोटो : panipat
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जल शक्ति अभियान को सफल बनाने और प्रकृति के प्रति लोगों को और अधिक जागरूक करने के लिए इन दिनों जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाया जा रहा है। कई विभागों व पंचायती राज संस्थाओं द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए रैली, गोष्ठी, वन महोत्सव, जल महोत्सव और स्कूलों में भाषण व गीत प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है। इसी कड़ी में वीरवार को गांव सींक, डाडोला, जलमाना, बापौली, सनौली, समालखा और पानीपत शहर में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जल-शक्ति मंत्रालय की टीम ने पानीपत जिले का तीन दिवसीय दौरा किया। टीम ने जिले में जल-शक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए करवाए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया और गांव नैन में जिला स्तरीय वन महोत्सव में भी शिरक्त की। इस टीम ने जहां भविष्य के जल-संकट के बारे में अधिकारियों को अवगत करवाया, वहीं जिले में करवाए जा रहे कार्यों की सराहना भी की। उन्होंने बताया कि हरियाणा के 22 जिलों में से 19 जिलों को डार्क जोन घोषित किया गया है। विकास खण्ड समालखा और बापौली को डार्क जोन ही नहीं, क्रिटिकल जोन घोषित किया है। अब गिरते जल-स्तर को बचाने का केवल यही उपाय है कि हम अधिक-से-अधिक पौधरोपण करें और वर्षा जल को तालाबों में इकट्ठा करें। सभी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से जल को जमीन में उतार दें। ताकि पानीपत की चौथी लड़ाई- हरियाली, पानी और सफाई अभियान को सफल बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि पानीपत के हालात भी ठीक नहीं है। यहां लोगों द्वारा मीठे जल का तेजी से दोहन करने के कारण भू-जल तेजी से नीचे गिर रहा है। इससे बचाव का एक ही उपाय है कि लोगों को जल संरक्षण व जल पुनरभरण के प्रति और अधिक जागरूक किया जाए। इसके लिए सभी विभाग, सभी धार्मिक व समाजसेवी संस्थाएं और पंचायती राज संस्थाएं इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। उन्होंने जिला के सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए ताकि जिला में 12 लाख के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
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उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जल-शक्ति मंत्रालय की टीम ने पानीपत जिले का तीन दिवसीय दौरा किया। टीम ने जिले में जल-शक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए करवाए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया और गांव नैन में जिला स्तरीय वन महोत्सव में भी शिरक्त की। इस टीम ने जहां भविष्य के जल-संकट के बारे में अधिकारियों को अवगत करवाया, वहीं जिले में करवाए जा रहे कार्यों की सराहना भी की। उन्होंने बताया कि हरियाणा के 22 जिलों में से 19 जिलों को डार्क जोन घोषित किया गया है। विकास खण्ड समालखा और बापौली को डार्क जोन ही नहीं, क्रिटिकल जोन घोषित किया है। अब गिरते जल-स्तर को बचाने का केवल यही उपाय है कि हम अधिक-से-अधिक पौधरोपण करें और वर्षा जल को तालाबों में इकट्ठा करें। सभी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से जल को जमीन में उतार दें। ताकि पानीपत की चौथी लड़ाई- हरियाली, पानी और सफाई अभियान को सफल बनाया जा सके।
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उन्होंने कहा कि पानीपत के हालात भी ठीक नहीं है। यहां लोगों द्वारा मीठे जल का तेजी से दोहन करने के कारण भू-जल तेजी से नीचे गिर रहा है। इससे बचाव का एक ही उपाय है कि लोगों को जल संरक्षण व जल पुनरभरण के प्रति और अधिक जागरूक किया जाए। इसके लिए सभी विभाग, सभी धार्मिक व समाजसेवी संस्थाएं और पंचायती राज संस्थाएं इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। उन्होंने जिला के सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए ताकि जिला में 12 लाख के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
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