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लग्न, विश्वास और निष्ठा से ही प्रभु की प्राप्ति संभव : आचार्य लालमणि
Wed, 20 May 2026 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 20 May 2026 03:42 AM IST
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कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : स्वयं
पानीपत। वार्ड-11 स्थित श्री महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य लालमणि पांडेय ने प्रभु भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि लगन, विश्वास और निष्ठा से ही भगवान की प्राप्ति संभव है।
उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से ध्रुव भक्त ने लग्न, निष्ठा और विश्वास के साथ भगवान को प्राप्त किया सिर्फ उसी तरह आस्था रखकर ही भगवान की प्राप्ति संभव है। हमें भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। जड़ भरत के प्रसंग से हमें किसी भी व्यक्ति या वस्तु में अति आसक्ति न रखने की शिक्षा मिलती है। नरक से बचने के लिए अजामिल की कथा हमें समझाती है कि भगवान के नाम का जाप सदैव करना चाहिए। नाम जप चाहे भाव से हो या कुभाव से हमेशा जपना चाहिए। प्रहलाद का चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि सबके प्रति दया, धर्म और नाम प्रभु के प्रति समर्पित रहना चाहिए। गजेंद्र मोक्ष की कथा हमें यह शिक्षा देती है कि संकट में प्रभु को ही पुकारना चाहिए। ब्राह्मण समाज का शिक्षक है, क्षत्रिय समाज के रक्षक है, वैश्य समाज का पोषक है, शूद्र समाज का सेवक है। हमें प्रत्येक जीव के प्रति दया की भावना रखनी चाहिए और समाजसेवा करनी चाहिए। संवाद
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उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से ध्रुव भक्त ने लग्न, निष्ठा और विश्वास के साथ भगवान को प्राप्त किया सिर्फ उसी तरह आस्था रखकर ही भगवान की प्राप्ति संभव है। हमें भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। जड़ भरत के प्रसंग से हमें किसी भी व्यक्ति या वस्तु में अति आसक्ति न रखने की शिक्षा मिलती है। नरक से बचने के लिए अजामिल की कथा हमें समझाती है कि भगवान के नाम का जाप सदैव करना चाहिए। नाम जप चाहे भाव से हो या कुभाव से हमेशा जपना चाहिए। प्रहलाद का चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि सबके प्रति दया, धर्म और नाम प्रभु के प्रति समर्पित रहना चाहिए। गजेंद्र मोक्ष की कथा हमें यह शिक्षा देती है कि संकट में प्रभु को ही पुकारना चाहिए। ब्राह्मण समाज का शिक्षक है, क्षत्रिय समाज के रक्षक है, वैश्य समाज का पोषक है, शूद्र समाज का सेवक है। हमें प्रत्येक जीव के प्रति दया की भावना रखनी चाहिए और समाजसेवा करनी चाहिए। संवाद

कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : स्वयं
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