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उपायुक्त को कार से उतार पूछा-मास्टर जी कब आएंगे
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स्कूल में अध्यापकों की कमी के चलते सोमवार को तहसील और हलका इसराना के अंतर्गत आने वाले गांव छिछड़ाना के ग्रामीणों ने लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया। साथ ही मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार में बैठे उपायुक्त का घेराव कर महिलाओं ने नीचे उतारा और फिर पूछा कि स्कूल में शिक्षक कब आएंगे। इस दौरान महिलाओं ने उपायुक्त सुशील सारवान के समक्ष सवालों की बौछार कर दी। इस पर उपायुक्त ने हाथ जोड़कर महिलाओं को भरोसा दिलाया कि जल्द ही स्कूलों में अध्यापकों को भेजा जाएगा।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे एडवोकेट संदीप रोड़ छिछड़ाना ने कहा कि गांव में 10वीं तक का एक ही सरकारी स्कूल है, जहां 180 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनको पढ़ाने के लिए एक ही अध्यापक हैं, जो हेडमास्टर भी हैं। ये हालात 30 अगस्त को सरकार की ओर से जारी हुई ट्रांसफर पॉलिसी के बाद से हैं। आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर अध्यापकों की पोस्ट को कैप्ट कर दिया है, जिससे इस स्कूल में कोई अध्यापक अपना ट्रांसफर ही न करवा सके। अगर यहां कोई शिक्षक नहीं आएगा तो स्कूल को बंद कर दिया जाएगा। पहले ही 125 स्कूलों को बंद किया जा चुका है, जिसके बाद बच्चों को मजबूरी में निजी स्कूलों में दाखिला लेना होगा।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने उपायुक्त से कहा कि उनके बच्चों का भविष्य खतरे में है। उपायुक्त के आश्वासन पर महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो फिर से सचिवालय में आंदोलन के लिए मजबूर होंगी। इस दौरान महिलाओं के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन भी उतर आई। प्रदेशाध्यक्ष रतन मान के साथ अन्य किसान नेता भी मौके पर पहुंच गए। विरोध प्रदर्शन में भाकियू के प्रदेश संगठन सचिव श्याम सिंह मान, महताब कादियान, सुरेंद्र सागवान, सुरेंद्र घुम्मन, राम दुरेजा, रविंद्र मास्टर, मनोज, सलिंदर, रविंद्र, अनिल, सतीश बाल्मीकि, राजेंद्र पंच, रामचंद्र, ओम प्रकाश, मुकेश, सुनीता, मंजू, कुसम सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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ग्रामीण पिछले 13 दिनों से लघु सचिवालय परिसर के बाहर फ्लाईओवर के नीचे धरना दे रहे हैं। राज्यसभा सांसद और जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर भी अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ हासिल नहीं हुआ। ऐसे में गुस्साए लोगों ने सोमवार को लघु सचिवालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की व्यवस्था को खत्म करना चाह रही है। गांव में स्कूलों की इमारतें बनी हुई हैं। पढ़ने वाले बच्चों की कमी नहीं है, लेकिन सरकार जानबूझकर अध्यापकों की भर्ती नहीं कर रही है। इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं।
- रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन।
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प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे एडवोकेट संदीप रोड़ छिछड़ाना ने कहा कि गांव में 10वीं तक का एक ही सरकारी स्कूल है, जहां 180 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनको पढ़ाने के लिए एक ही अध्यापक हैं, जो हेडमास्टर भी हैं। ये हालात 30 अगस्त को सरकार की ओर से जारी हुई ट्रांसफर पॉलिसी के बाद से हैं। आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर अध्यापकों की पोस्ट को कैप्ट कर दिया है, जिससे इस स्कूल में कोई अध्यापक अपना ट्रांसफर ही न करवा सके। अगर यहां कोई शिक्षक नहीं आएगा तो स्कूल को बंद कर दिया जाएगा। पहले ही 125 स्कूलों को बंद किया जा चुका है, जिसके बाद बच्चों को मजबूरी में निजी स्कूलों में दाखिला लेना होगा।
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प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने उपायुक्त से कहा कि उनके बच्चों का भविष्य खतरे में है। उपायुक्त के आश्वासन पर महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो फिर से सचिवालय में आंदोलन के लिए मजबूर होंगी। इस दौरान महिलाओं के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन भी उतर आई। प्रदेशाध्यक्ष रतन मान के साथ अन्य किसान नेता भी मौके पर पहुंच गए। विरोध प्रदर्शन में भाकियू के प्रदेश संगठन सचिव श्याम सिंह मान, महताब कादियान, सुरेंद्र सागवान, सुरेंद्र घुम्मन, राम दुरेजा, रविंद्र मास्टर, मनोज, सलिंदर, रविंद्र, अनिल, सतीश बाल्मीकि, राजेंद्र पंच, रामचंद्र, ओम प्रकाश, मुकेश, सुनीता, मंजू, कुसम सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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ग्रामीण पिछले 13 दिनों से लघु सचिवालय परिसर के बाहर फ्लाईओवर के नीचे धरना दे रहे हैं। राज्यसभा सांसद और जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर भी अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ हासिल नहीं हुआ। ऐसे में गुस्साए लोगों ने सोमवार को लघु सचिवालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की व्यवस्था को खत्म करना चाह रही है। गांव में स्कूलों की इमारतें बनी हुई हैं। पढ़ने वाले बच्चों की कमी नहीं है, लेकिन सरकार जानबूझकर अध्यापकों की भर्ती नहीं कर रही है। इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं।
- रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन।