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आशा वर्करों ने सिविल अस्पताल में किया प्रदर्शन
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कोरोना वैक्सीनेशन के 7 दिन बाद हुई आशा वर्कर की मौत के बाद आशा वर्करों में भय है। पुलिस ने आशा वर्कर कविता के शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। जांच के लिए विसरा भी मधुबन लैब में भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका आशा वर्कर कविता की मौत के कारण स्पष्ट होंगे। सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने डीजी हेल्थ को भी आशा वर्कर कविता की मौत की जानकारी दी है। वहीं दूसरी ओर कविता की मौत से आशा वर्करों में रोष है। आशा वर्कर्स यूनियन ने शनिवार को सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने कविता के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद, कोरोना वैक्सीनेशन से पहले सभी तरह के टेस्ट कराने और वैक्सीनेशन के लिए किसी पर दबाव न बनाने की मांग की है। आशा वर्करों ने साफ कर दिया है कि वो बिना जांच के वैक्सीन नहीं लगवाएंगी। वो किसी के दबाव में भी नहीं आएंगी। आशा वर्करों का कहना है कि वैक्सीनेशन के बाद से ही लगभग 20 आशा वर्कर बुखार और एलर्जी जैसी समस्याओं से जूझ रही है। आशा वर्करों ने सीएमओ के माध्यम से गृहमंत्री अनिल विज को ज्ञापन सौंपा है।
कविता की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग: सुमन
आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान सुमन ने कहा कि आशा कविता की मौत का जिम्मेदार पूरी तरह स्वास्थ्य विभाग है। आरोप लगाया कि मना करने के बावजूद बार-बार टीकाकरण के लिए दबाव बनाया गया। अब स्वास्थ्य विभाग कविता की मौत के अन्य कारण बता रहा है। जबकि परिजनों के अनुसार कविता पूरी तरह स्वस्थ थी और टीका लगने के बाद हालत बिगड़ी है।
उन्होंने बताया कि कविता की एक बार कोरोना पॉजिटिव हो चुकी थी और दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख का बीमा कवर देने की घोषणा की थी। इस आधार पर कविता के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाए।
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वैक्सीन लगने के बाद से ही बुखार है
आशा वर्कर सरोज ने बताया कि उसको 9 फरवरी को कोरोना वैक्सीन लगी थी। वैक्सीन लगने के बाद से ही उसको बुखार है। हर चार घंटे में उसको बुखार की गोली लेनी पड़ रही है। वो कुछ काम भी नहीं कर पा रही है। वैक्सीनेशन से पहले उसकी जांच नहीं की गई थी।
एलर्जी से परेशान हो गई हूं : नसीम
आशा वर्कर नसीम ने बताया कि उसने 9 फरवरी को कोरोना वैक्सीन लगवाई थी। उसको हर वक्त बेचैनी रहती है। पूरे शरीर पर एलर्जी हो गई है। वो कई डॉक्टर से ईलाज भी करवा रही है। उसकी वैक्सीनेशन से पहले जांच नहीं की गई थी।
बिना टेस्ट ना हो किसी का वैक्सीनेशन
आशा वर्कर्स ने कहा कि अब विभाग कविता की मौत के अन्य कारण बता रहा है। टीकाकरण से पहले हर किसी को नहीं पता होता कि उसे क्या बीमारी है। इसलिए कोरोना वैक्सीनेशन से पहले सभी के पूरे टेस्ट कराए जाए। इसके साथ किसी पर भी कोरोना वैक्सीनेशन के लिए दबाव न बनाया जाए।
ये है मामला
मतलौडा ब्लॉक के गांव अटावला निवासी कविता आशा वर्कर थी। उन्होंने 4 फरवरी को कोरोना का टीका लगवाया। परिजनों के अनुसार टीका लगने के बाद ही कविता की हालत बिगड़ गई। 8 फरवरी को उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां, 12 फरवरी को कविता की मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि कविता की मौत कोरोना के टीके के कारण हुई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग कविता की मौत का कारण अन्य बीमारी बता रहा है।
वर्जन
आशा वर्कर के शव का पोस्टमार्टम हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत के कारण स्पष्ट होंगे। जांच के बाद वैक्सीनेशन किया जाएगा। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में ये मामला डाल दिया है।
डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन
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कविता की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग: सुमन
आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान सुमन ने कहा कि आशा कविता की मौत का जिम्मेदार पूरी तरह स्वास्थ्य विभाग है। आरोप लगाया कि मना करने के बावजूद बार-बार टीकाकरण के लिए दबाव बनाया गया। अब स्वास्थ्य विभाग कविता की मौत के अन्य कारण बता रहा है। जबकि परिजनों के अनुसार कविता पूरी तरह स्वस्थ थी और टीका लगने के बाद हालत बिगड़ी है।
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उन्होंने बताया कि कविता की एक बार कोरोना पॉजिटिव हो चुकी थी और दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख का बीमा कवर देने की घोषणा की थी। इस आधार पर कविता के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाए।
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वैक्सीन लगने के बाद से ही बुखार है
आशा वर्कर सरोज ने बताया कि उसको 9 फरवरी को कोरोना वैक्सीन लगी थी। वैक्सीन लगने के बाद से ही उसको बुखार है। हर चार घंटे में उसको बुखार की गोली लेनी पड़ रही है। वो कुछ काम भी नहीं कर पा रही है। वैक्सीनेशन से पहले उसकी जांच नहीं की गई थी।
एलर्जी से परेशान हो गई हूं : नसीम
आशा वर्कर नसीम ने बताया कि उसने 9 फरवरी को कोरोना वैक्सीन लगवाई थी। उसको हर वक्त बेचैनी रहती है। पूरे शरीर पर एलर्जी हो गई है। वो कई डॉक्टर से ईलाज भी करवा रही है। उसकी वैक्सीनेशन से पहले जांच नहीं की गई थी।
बिना टेस्ट ना हो किसी का वैक्सीनेशन
आशा वर्कर्स ने कहा कि अब विभाग कविता की मौत के अन्य कारण बता रहा है। टीकाकरण से पहले हर किसी को नहीं पता होता कि उसे क्या बीमारी है। इसलिए कोरोना वैक्सीनेशन से पहले सभी के पूरे टेस्ट कराए जाए। इसके साथ किसी पर भी कोरोना वैक्सीनेशन के लिए दबाव न बनाया जाए।
ये है मामला
मतलौडा ब्लॉक के गांव अटावला निवासी कविता आशा वर्कर थी। उन्होंने 4 फरवरी को कोरोना का टीका लगवाया। परिजनों के अनुसार टीका लगने के बाद ही कविता की हालत बिगड़ गई। 8 फरवरी को उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां, 12 फरवरी को कविता की मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि कविता की मौत कोरोना के टीके के कारण हुई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग कविता की मौत का कारण अन्य बीमारी बता रहा है।
वर्जन
आशा वर्कर के शव का पोस्टमार्टम हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत के कारण स्पष्ट होंगे। जांच के बाद वैक्सीनेशन किया जाएगा। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में ये मामला डाल दिया है।
डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन