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Panipat News: खेलों के साथ, शिक्षा, उद्योग, राजनीति, न्यायिक सेवा में भी उग्राखेड़ी की धाक

Sat, 02 May 2026 03:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Sat, 02 May 2026 03:37 AM IST
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Apart from sports, Ugrakhedi is also famous in education, industry, politics and judicial services.
अमन मलिक।
जगमहेंद्र सरोहा
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पानीपत। पानीपत की तीसरी लड़ाई के केंद्र बिंदु रहे उग्रा खेड़ी गांव की धाक पुलिस और सेना के साथ शिक्षा, खेल, उद्योग, राजनीति, न्यायिक सेवा और बॉलीवुड में भी रही है। इस माटी से निकले बेटे और बेटियों के साथ बहू भी कई क्षेत्र में आज भी नाम कमा रहीं हैं।
बिग्रेडियर सुरेंद्र मलिक ने सेना में चमकाया है। वे 1977 से 2014 तक सेना में रहे। अब उनके बेटे सिद्धार्थ मलिक विंग कमांडर हैं। वॉलीवुड में दरियाव सिंह मलिक खूब नाम रोशन किया। उनको राष्ट्रपति अवार्ड मिला। गांव के करीब 30 परिवार उद्योगों में आगे हैं। स्थानीय मशीनरी में सुखबीर मलिक को राष्ट्रपति अवार्ड मिल चुका है।
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वहीं यशपाल मलिक पानीपत डायर्स एसोसिएशन के लगातार कई साल तक प्रधान रहे। उनके बेटे और पुत्रवधू का पानीपत में अपना अस्पताल है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक समय प्रदेश में सबसे अधिक मास्टर उग्रा खेड़ी में होते थे। गांव में आज भी कोई अनपढ़ नही हैं। राजनीति में जगदेव मलिक कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष रहे। अब रमेश मलिक ग्रामीण जिलाध्यक्ष हैं। निशान सिंह मलिक इनेलो के टिकट पर पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। मनोज, बिंटू मलिक व निशान सिंह मलिक किसान यूनियन के जिला प्रधान रह चुके हैं।
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निशान सिंह मलिक की पुत्रवधू वंदिता ने यूजीएस नेट जीआरएफ परीक्षा-2025 में ऑल इंडिया में प्रथम स्थान पाया है। गांव के वीरेंद्र मलिक शिक्षा विभाग में एईओ और सुरेंद्र मलिक बीईईओ के पद से सेवानिवृत हो चुके हैं। गांव में सीनियर सिटीजन क्लब बनाया गया। इसमें ज्यादातर विभिन्न विभागों ने सेवानिवृत व्यक्ति गांव की सामाजिक गतिविधियों में आगे रहते हैं। गांव में साफ-सफाई, पौधरोपण के लिए जागरूक किया जा रहा है। गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष योगदान रहता है। संवाद
खेल विभाग में जूनियर कोच हैं शीतल मलिक
शीतल मलिक ने वर्ष 2004 में आठवीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान हैंडबॉल खेलना शुरू किया था। वे आज खेल विभाग में जूनियर कोच के पद पर हैं। उन्होंने बताया कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल चुकी हैं। साउथ एशियन चैंपियनशिप में चार बार देश की टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। एक स्वर्ण पदक जीता है। दो बार एशियन चैंपियनशिप में खेल चुकी हैं। नेशनल गेम्स में स्वर्ण सीनियर नेशनल में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता है।
राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित हो चुके दरियाव सिंह मलिक
दरियाव सिंह मलिक ने उग्राखेड़ी ही नहीं हरियाणा की धाक बॉलीवुड तक जमाई। उनके बेटे नरेंद्र मलिक ने बताया कि 11 जुलाई 1938 को जन्में दरियाव सिंह मलिक को राष्ट्रपति अवार्ड मिल चुका है। वे लोकसंपर्क विभाग में निरीक्षक के पद पर थे। उन्होंने हरियाणवीं फिल्म चंद्रावल में रुंडे का अभिनय किया। वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। उनका निधन 21 अप्रैल 2022 को हो गया था।
हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट के जज रहे रामेश्वर मलिक रामफल मलिक ने बताया कि उनके पिता खेतीबाड़ी करते थे। उनके बड़े भाई रामेश्वर मलिक ने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर वकालत की डिग्री प्राप्त की। वे हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट के 2011 में जस्टिस बने और 12 अक्तूबर 2017 को सेवानिवृति हुई है। वे अब दिल्ली में रहते हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस के दौरान और अब भी गांव में लगातार आ रहे हैं। गांव के सामाजिक कार्यों में उनकी भूमिका अग्रणी रहती है।
25 बार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं अमन
मलिक ने बताया कि उसके पिता सुंदर मलिक किसान थे। मां कौशल्या गृहिणी हैं। पिता की मौत के बाद उन पर परिवार की जिम्मेदारी आई। वह तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। वे तीनों भाई आज अपने परिवार को संभाल रहे हैं। वे बचपन से ही हैंडबॉल खेल रहे हैं और 25 बार नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2018 में पाकिस्तान में आयोजित प्रतियोगिता में देश की टीम का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक जीता था।
हिमाचल प्रदेश में न्यायाधीश है गांव की बहू रेणू मलिक
उग्राखेड़ी की बहू रेणू मलिक हिमाचल न्यायिक सेवा परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त कर जज बनी हैं। रेणू मलिक ने बताया कि उनका परिवार पहले से कानून के क्षेत्र से जुड़ा है। उनके पति गौरव मलिक और जेठ सचिन मलिक दोनों वकील हैं। उनके ससुर बलविंदर सिंह ने उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे न्याय व्यवस्था में नई ऊर्जा और निष्ठा के साथ काम कर रही हैं।

पर्दा प्रथा के खिलाफ बुलंद की थी आवाज
विद्या देवी ने गांव में करीब 40 साल पहले पर्दा प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उन्होंने खुद घूंघट हटाकर गांव की महिलाओं को भी प्रेरित किया था। इसके परिणामस्वरूप गांव में जागरूकता आई और बेटियों के साथ बहू भी शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में आगे आईं। विद्या देवी ने बताया कि वह अब परिवार सहित एल्डिगो में रहती हैं। गांव में जब भी जाती हैं तो महिलाओं से खुलकर बात करती हैं।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

अमन मलिक।

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अमन मलिक।

अमन मलिक।

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अमन मलिक।

अमन मलिक।

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